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मंगलवार, 19 जून 2018

1068....अंकुर फूटेगा एक दिन पुनः

सादर अभिवादन
आज फिर हम....
पहाड़ी इलाके में कश-मकश चलती ही रहती है
चलिए कोई बात नहीं....
देखिए आज हमारी पसंद की रचनाएँ...

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तुम आकाश में उड़ते स्वछन्द परिन्दे,
और मैं पृथ्वी पर कांटों के बीच खिलती
एक नर्म नाज़ुक कली,
तुम आकाश में किरणें बन न जाने कहा-कहा
पहुँच जाते हो,
पृथ्वी को भी अपने आग़ोश में भर लेते हो,


मैं चाँद हूँ
आसमाँ के दामन से उलझा
बदरी की खिड़कियों से झाँकता
चाँदनी बिखराता हूँ
मुझे न काटो जाति धर्म की कटार से
मैं शाश्वत प्रकृति की धरोहर
हीरक कणों से सरोबार


पैसे से
तुम घर खरीद सकते हो
महंगी चीजें खरीद सकते हो,
लेकिन यदि तुम खुद को खर्च नहीं कर सकते,
तो घर को घर का रूप नहीं दे सकते !
पैसे से
तुम महंगे, अनगिनत
कपड़े खरीद सकते हो,
प्रसाधनों की भरमार लगा सकते हो,
लेकिन यदि तुम खुद को खर्च नहीं कर सकते,


सूरज खिला तो धूप के साए मचल गए
कुछ बर्फ के पहाड़ भी झट-पट पिघल गए

तहजीब मिट गयी है नया दौर आ गया
इन आँधियों के रुख तो कभी के बदल गए


"कुछ कहना है"
रस्सी जैसी जिंदगी, तने तने हालात |
एक सिरे पे ख्वाहिशें, दूजे पे औकात ||

पहली कक्षा से सुना, बैठो तुम चुपचाप।
यही आज भी सुन रहा, शादी है या शाप।।


शोणित-सागर में सिन्दुरी
सोने सा सूरज ढ़लका
नील गगन ललित अम्बर में
लाल रंग है छलका
                                       
चिरई-चिरगुन नीड़ चले
अब चकवा-चकई आ रे
प्रेम सुधा दृग अंचल धारे
राही राह निहारे
दो पथिक किनारे 


सीप मातृ कोख के जैसी 
गुण अवगुण सब रख लेती 
नव सृजन करती है प्रति पल 
आत्मसात सब कुछ करती !

स्वाति बूँद गिरे जो भीतर 
सच्चे मोती  सा गढती 
निर्मल जल बूँद होय तो 
व्यर्थ ना उसको जाने  देती !

अब बारी है हम-क़दम की
सरल सा विषय हम-क़दम का इसबार
हम-क़दम 
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम चौबीसवें क़दम की ओर
इस सप्ताह का विषय है
अंकुर
उदाहरण...
सिर्फ प्रेम है और केवल प्रेम है
प्रेम न तो व्यापर है
न ही इर्ष्या और स्वार्थ
प्रेम तो है निश्छल और नि:स्वार्थ
प्रेम का एक ही नियम है
प्रेम... प्रेम... प्रेम...!
अंकुर फूटेगा एक दिन पुनः
क्योंकि यही जिंदगी का
नियम हैं।
-सुमित जैन

उपरोक्त विषय पर आप सबको अपने ढंग से 
पूरी कविता लिखने की आज़ादी है

आप अपनी रचना शनिवार 23 जून 2018  
शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं। चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाऐं आगामी सोमवारीय अंक 25 जून 2018  को प्रकाशित की जाएगी । 
रचनाएँ  पाँच लिंकों का आनन्द ब्लॉग के 
सम्पर्क प्रारूप द्वारा प्रेषित करें





11 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभातम् दी:)
    नेटवर्क के उठा-पटक के बीच आपके द्वारा बनायी गयी झटपट और बढ़िया प्रस्तुति सर सराहनीय है दी। रचनाएँ बहुत अच्छी है।
    मेरी रचना को शामिल करने के लिए हार्दिक आभार आपका।

    जवाब देंहटाएं
  2. बहुत सुंदर प्रस्तुति सभी रचनाऐं बहुत सुंदर सभी रचनाकारों को बधाई।

    जवाब देंहटाएं
  3. सभी रचनाएँ लाजवाब हैं ... हर वक लिंक एक से बढ़ कर एक ... आपका आभार आज मेरी ग़ज़ल को स्थान देने के लिए ...

    जवाब देंहटाएं
  4. वाह!!बहुत खूबसूरत प्रस्तुति । सभी लिंक लाजवाब । सभी रचनाकारों को हार्दिक अभिनंदन।

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
  6. अति सुन्दर संकलन मेरे काव्य को सम्मिलित किया ...आभार !

    जवाब देंहटाएं
  7. बहुत सुंदर संकलन मेरी रचनाओं को आपने सम्मलित
    किया इसके लिए आपका बहुत बहुत आभार

    जवाब देंहटाएं
  8. 👌👌👌👌अति सुन्दर मंतव्यों से ओत प्रोत रचनायें .
    मेरे लेखन को सम्मलित किया आभार

    जवाब देंहटाएं
  9. बेहतरीन प्रस्तुति करण ....उम्दा लिंक संकलन...

    जवाब देंहटाएं

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