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गुरुवार, 14 जून 2018

1063....शान्ति के लिये सम्वाद होना चाहिये...


सादर अभिवादन। 
ख़ुश-ख़बरी!!! 
शान्ति के लिये सम्वाद होना चाहिये, 
दुनिया में विवेक का बोलबाला होना चाहिये,
परमाणु हथियार की होड़ बंद होना चाहिये, 
सनक त्यागकर रहबर को सिंगापुर में मानवीय होना चाहिये। 

आइये अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें -



चित्र में ये शामिल हो सकता है: 1 व्यक्ति, बैठे हैं

- विज्ञापन देखी होंगी तो उसमें 30-40 उम्र सीमा तय है ,उसपर आपकी नजर जरूर पड़ी होगी... उस स्थिति में आपका फोन करना, आपको ही शक के दायरे में ला खड़ा किया... एक औरत होने के नाते हर लड़की के बारे में सोचना मैं अपना दायित्व बना ली हूँ... कोई बच्ची मकड़जाल में फँस ना जाये... इसलिए आपको भी कहती हूँ पहले पढ़ाई पूरी कीजिये... माँ बाप जो तय करें उसमें उनका सहयोग करें... "



My photo

जीवन की व्यस्तता ने हमें और बड़ा कर दिया था।इसी बीच एक बार मौका मिला फिर गाँव जाने का।चाचा के बेटे को पुत्री रत्न की प्राप्ति हुई थी।मुझे बड़े अरमानों के साथ बुलाया गया।इन सब में मैं ये बताना कैसे भूल सकती हूँ कि मेरे चाचा चाची के तीन पुत्रियों के साथ एक पुत्र था, हम सब साथ में ही पापा के पास शहर में रह कर पढ़ते थे,जो की उन दीनों मे आम बात थी।चाचा चाची गाँव में रहते थे। सबसे खास बात ये कि मुझसे चाचा और चाची दोनों का बहुत हीं लगाव था और ढेर लाड़ मिलता था मुझे । दोनों हीं मुझसे अक्सर अपने दिल की बात किया करते थे ,पता नहीं क्यों।




सोए सपनों को झकझोरो
माटी को सोना कर दो ना !
पार क्षितिज के कहाँ रुके हो,
आओ मेघा, बरसो ना !!!



My photo

सब कुछ सदा ही ठीक-ठीक चलता रहे ऐसी कामना जो करता है, उसे दो के पार ही जाना होगा. उस स्थिति में मन साक्षी भाव में टिकना सिख जाता है. साक्षी भाव में रहकर, कर्त्तव्य कर्म को पालन करते हुए अपने जीवन को उन्नत बनाने का प्रयत्न करने वाले साधक के जीवन में भविष्य के लिए पाप कर्म जमा नहीं होते. उसका वर्तमान भी संतुष्टिदायक होता है.



है आँख किसी की खुली
किसी की सोती
खोजो,
पा ही जाओगे कोई मोती







IMAGE1

मैं आऊंगा, फिर आऊंगा,
निज को विसर्जित कर
सामूहिक चेतना का अंग बन
अन्तहीन भीड़ में मिल जाऊंगा।

अब बारी है...
हम-क़दम के तेईसवें क़दम
का विषय...
...........यहाँ देखिए...........


कल मिलिए श्वेता सिन्हा से
रवीन्द्र सिंह..

11 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति
    बड़े देश कर लेते हैं सम्वाद
    हम अपने पड़ोसी से नहीं कर पाते
    अच्छी रचनाएँ
    आभार
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. सस्नेहाशीष व आभार संग शुभ दिवस
    स्तब्ध हो जाती हूँ अपने लिखे को चयन हुआ देख

    उत्तर देंहटाएं
  3. वाह!!रविन्द्र जी ,बहुत खूबसूरत संकलन लेकर आए हैं आप !!सभी रचनाएँ बहुत सुंदर ..रचनाकारों को हार्दिक बधाई ।

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर रचनाओं का गुलदस्ता! उपसंहार वाक्य से पहले ही मन ने पढ़ लिया ' रविन्द्र जी '! बहुत आभार और बधाई, इस सुकृत्य का!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत बहुत आभार आदरणीय रवींद्रजी !
    सुबह जागने के बाद चाय के साथ साथ ही हलचल का अंक देख लेती हूँ। उत्सुकता बनी रहती है कि आज क्या नया पढ़ने को मिलेगा। इधर कल से स्कूल खुलने वाले हैं और व्यस्तता बढ़ गई है। रचनाओं पर प्रतिक्रिया ना दे पाने का मलाल तो रहता है पर पढ़ती जरूर हूँ हलचल की सारी रचनाएँ। बहुत सारी मंगलकामनाओं और धन्यवाद के साथ....

    उत्तर देंहटाएं
  6. शानदार संकलन सही है मै मानती हूं बातचीत से हल निकलते है बस पूर्वाग्रह छोडने होते है ये बडे स्तर पर ही नही मानव जीवन की छोटी से छोटी ईकाई पर लागू होता है चाहे वो आपसी सम्बन्ध हो चाहे पारिवारिक चाहे रिश्ते दारी चाहे समाज, देश, राजनीति और विश्व स्तर पर,।
    जानदार भुमिका के साथ शानदार लिंक, सभी रचनाकारों को बधाई।

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  8. चार पंक्तियों की सारगर्भित भूमिका में काफी गहरी बात समेटी है आपने रवींद्र जी।
    सभी रचनाएँ बेहद सराहनीय हैं।
    बहुत अच्छा अंक है रवींद्र जी।

    उत्तर देंहटाएं
  9. रवींद्र जी, आभार, मैं 13 जून से छोटा चार धाम यात्रा पर हूँ, इसलिए टिप्पणी विलंब से दे रहा हूँ। सुन्दर प्रस्तुति,इस चर्चा में सम्मलित सभी रचनाकारों को बधाई।

    उत्तर देंहटाएं

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