पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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शनिवार, 19 नवंबर 2016

491... प्रतीक्षा



सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष

हमारा पूरा घर भरा है 
किसी कोने से बेटा घूर रहा है
तो किसी कोने से बहू मुस्कुरा रही है
मज़ा लेने के लिए देवर का परिवार जुटा है 
देवर देवरानी की कल शादी की सालगिरह है
तो ननद की बेटी की शादी की रस्में शुरू होनी है
मैं लैपटॉप उठाई कि पोस्ट बना दूँ 
लिखूं क्या !
सोचने के लिए सूना कोना ढूँढना है






अशफ़ाक़ ने कहा-सुनो अंग्रेज़ के कप्तान.
मेरी तो है सरकार ये अज़ीज़ हिंदुस्तान.
तख्ते पे फांसियों के हम चढ़ेंगे यूँ पुरजोश.
अंग्रेज़ सल्तनत के उड़ाएंगे वहीं होश.





कभी यूँ ही कह दो
रास्तों को मौन सहने दो,
थककर आह से टूटेंगे
जुड़ेंगे न मिटेंगे ...
थोड़ा प्यार की नींद सा
कहे-सुने 




अपेक्षायें होती हैं कष्टकर
जहरीली, घुमावदार
लगें सर्प दंश सरीखी
कभी कभी 




भारत के पास पाकिस्तान से बदला लेने के युद्ध के अलावा और भी रास्ते हैं, 
यदि भारत ने अन्य बड़े देशों को विश्वास में लिए बिना युद्ध शुरू कर दिया 
तो पाकिस्तान परमाणु छोड़ सकता है, (जिसकी वह पहले से ही धमकी देता है) 
 इस आशंका के चलते अन्य बड़े देश भारत पर युद्ध रोक देने का दबाव बनाएँगे
 और चूँकि भारत एक शरीफ और अन्तर्राष्ट्रीय कानून को
 मानने वाला देश है तो उसे रुकना पड़ेगा।




अव्वल आने पर
साथियों की ईर्ष्या के डर
औसत रहने पर
पिछड़ जाने के डर
प्रेम की अभिव्यक्ति पर
ठुकराये जाने के डर




हम अपने पसंदीदा खिलौने जैसे ही होते हैं. 
वे अपने तमाम अच्छाइयों-बुराइयों के बाद भी कभी बुरी नहीं लगती.
 ठीक वैसे ही जैसे हम खुद को कभी गलत नहीं मानते. 
हम जानते हैं, खिलौने में किस जगह दरार है. किधर से जरा सा टूट गया है. बाएं वाले लीवर को जरा आहिस्ते से दबाना है नहीं तो धागा टूट जाएगा, वह निष्प्राण करने वाला खेल अब और नहीं. लेकिन फिर भी वह हमारा फेवरेट होता है,





ननकाना साहिब रहा, हमको आज पुकार।
नौशेरा लाहौर पर, कर लो अब अधिकार।।
--
रावलपिण्डी से यही, आती है आवाज।
कब्जा पाकिस्तान से, छोड़ो अरे नवाज।।



मिल मिलेंगे .... मिलने की दुआ कीजियेगा
शुभ दिवस


विभा रानी श्रीवास्तव



3 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात दीदी
    सादर नमन
    एक बेहतरीन प्रस्तुति
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. आदरणीय आंटी नमस्ते...
    सुंदर संकलन...
    मैं भी पहुंच ही सका...
    आप की प्रस्तुति पढ़ने...
    उमीद नहीं थी आज भी...
    कंप्यूटर फारमैट ही करना पड़ा...
    पुनः आभार...

    उत्तर देंहटाएं

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