पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

सोमवार, 28 नवंबर 2016

500...कर कुछ भी कर बात कुछ और ही कर


हम को मिटा सके, ये ज़माने में दम नहीं
हमसे ज़माना खुद है, ज़माने से हम नहीं
-जिगर मुरादाबादी 


आज अत्यन्त हर्षित हूँ

पाँच लिंकों का आनन्द का पाँच सौवाँ अंक

प्रस्तुत करते हुए..
आप सभी के सहयोग के बिना ये कतई मुमकिन नहीं था
आभार आप सभी को..


चलिए चलते है आज की मिली-जुली रचनाओं की ओर........

पहली बार....

भारत इकलौता ऐसा देश है जहां बड़ीं संख्या में ऐसे लोग रहते हैं जो स्वयं तो बेवकूफ बन जाते हैं 
लेकिन बेवकूफ बनाने वाले को हीरो बना देते हैं!

कहा जा रहा है कि इकॉनमी की सुधार की रफ्तार धीमी पड़ गई है! 
इसका कुछ श्रेय उन लोगों को भी दिया जाना चाहिए जो संसद नहीं चलने देते!


ख़िजाँ में फूल खिले ऐसा किया है दंगा....शैल सिंह
सबके साथ सबके विकास का
सुर में सुर मिला चलने का
ना खाऊँगा ना खाने दूँगा
इस तर्ज़ पर आगे बढ़ते रहने का ,





...फिदेल कास्त्रो के नाम क्यूबा में मार्ग नहीं हैं और भविष्य में यहाँ मोदी के नाम भी नहीं होंगे। नवोन्मेषी लोग 'मार्ग और मूर्ति' सरीखी बहुजनी कांग्रेसी गतिविधियों में अपनी ऊर्जा नहीं खपाते। हाँ, उन्हें प्रचार तंत्र तगड़ा रखना ही होता है और दण्ड का भी। कौटल्य भी तो यही कह गये हैं, नहीं?



धूर्त मन,मक्कार दिल पर,ओढ़ चादर केसरी
देश पर खतरा बताते,आज भी कुछ लोग हैं !

हमको लड़ना ही पड़ेगा, इन ठगों के गांव में,
कौम को ज़िंदा बताते,आज भी कुछ लोग हैं !




अमेरिका की प्रथम महिला मिशेल ओबामा कहती हैं, ‘जिंदगी हमेशा सुविधाजनक नहीं होती | 
ना ही एक साथ सभी समस्याएं हल हो सकती हैं | इतिहास गवाह है कि साहस दूसरों को प्रेरित करता है 
और उम्मीद जिंदगी में अपना रास्ता स्वयं तलाश लेती है |’ 

काली भयानक रात,
चारों ओर झंझावात,
पर, जलता रहेगा - दीप---मणिदीप
सद्भाव का / सहभाव का।

किसी ने बर्फ से पूछा कि, आप इतनी ठंडी क्यूं हो ? .बर्फ ने बड़ा अच्छा जवाब दिया :-" मेरा अतीत भी पानी; मेरा भविष्य भी पानी..." फिर गरमी किस बात पे रखूं ?? क्या इंसान की भी यही स्थिति नहीं है। उसका अतीत भी "खाली हाथ" एवं भविष्य भी "खाली हाथ"फिर....? घमंड किस बात का !!! 


सत् के सम्मुख कब टिक पाया
घोर तमस की कुत्सित चाल,
ज्ञान रश्मियों से बिंध कर ही
हत होता अज्ञान कराल,

उड़ता पंछी.........शुभा मेहता 
मैं , उडता पंछी
दूर....दूर .....
उन्मुक्त गगन तक
फैलाकर अपनी पाँखें
उड़ता हूँ


दो साल पहले
यहां कोई 
बात कर
वहां कोई
बात कर
बाकी पूछे
कोई कभी
कहना ऊपर
वाले से डर ।

आज्ञा दें यशोदा को
डर है कि सीमा न लाँघ जाऊँ
सादर










16 टिप्‍पणियां:

  1. पाँच डब्बे की रेल पाँचसौ पर आ कर खड़ी कर दी आपने। पाँच लिंको के आनन्द के सभी चर्चाकारों की मेहनत को सलाम। आभारी है 'उलूक' सूत्र 'कर कुछ भी कर बात कुछ और ही कर' को शीर्षक देकर सम्मान देने के लिये। अब कारवाँ यहाँ से इसी तरह बढ़ता चले हजार की ओर यही मंगलकामना है ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभप्रभात....
    पांच लिंक....
    पांच चर्चाकार...
    500 अंक....
    क्या खूब मेल है आज...
    सुंदर....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बेहतरीन लिंक कलेक्शन , हार्दिक आभार रचना को स्थान देने के लिए ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति..

    उत्तर देंहटाएं
  5. उत्तर
    1. शुभ संध्या दीदी
      सादर चरणस्पर्श
      आभार
      सादर

      हटाएं
  6. बहुत खूबसूरत लिंक है विविधताओं से भर हुआ। हर लेख हर कविता सुन्दर रचनाकार बधाई के पात्र हैं

    उत्तर देंहटाएं
  7. मेरी पोस्ट का लिंक देने के लिए आभार। बाकी रचनाएँ अदभुत हैं।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. शुभ संध्या वीरेन्द्र भैय्या
      अद्भुत रचना है आपकी
      पढ़ने में आनन्द आया
      और थोड़ा तीखा चाहिए
      सादर

      हटाएं
  8. आभार, यशोदा जी । सुंदर संयोजन ।

    उत्तर देंहटाएं
  9. इस शिखर को पार करने की बधाई। आने वाले समय में और भी ऊंचाइयां देखने को मिलें।

    उत्तर देंहटाएं
  10. बहुत-बहुत बधाई पाँच सौंवेँ अंक के लिए , मेरी रचना को स्थान देने के लिए हृदय से आभार ।सभी लिंक अप्रतिम ।

    उत्तर देंहटाएं
  11. सोने की चिड़ीया से मुल्क में अंधेरा क्यों है
    इस दौर में भी काला इतना सवेरा क्यों है

    दिखती है अब हर शय में खौफ की आहट
    सवेरा है मगर फिर भी घना अंधेरा क्यों है

    माना की हर फैसले से वास्ता नहीं तेरा
    मगर फिर भी हर फैसला तेरा क्यों है !

    अजीब सवाल पूछ रह है निशब्द परिंदों से
    इस दौर में बिजली के तार पर बसेरा क्यों है।

    उत्तर देंहटाएं
  12. सोने की चिड़ीया से मुल्क में अंधेरा क्यों है
    इस दौर में भी काला इतना सवेरा क्यों है

    दिखती है अब हर शय में खौफ की आहट
    सवेरा है मगर फिर भी घना अंधेरा क्यों है

    माना की हर फैसले से वास्ता नहीं तेरा
    मगर फिर भी हर फैसला तेरा क्यों है !

    अजीब सवाल पूछ रह है निशब्द परिंदों से
    इस दौर में बिजली के तार पर बसेरा क्यों है।

    उत्तर देंहटाएं
  13. मेरी post "कभी न छोड़े उम्मीदों का साथ " को halchalwith5links पर शामिल करने के लिए धन्यवाद यशोदा जी |

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...