पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

सोमवार, 7 नवंबर 2016

479..किसी के पढ़ने या समझने के लिये नहीं होता है लक्ष्मण के प्रश्न का जवाब होता है बस राम ही कहीं नहीं होता है

सादर अभिवादन
पिछले वर्ष आज धनतेरस था
इस वर्ष दीपावली मन चुकी है...

चलिए चलें आज की चयनित रचनाओं की ओर....


हुजुर ! यहाँ तो एक ही व्यक्ति सक्षम है जो इस शेर से निहत्था लड़ सकता है| 
वो है दलथंभन के विरुद से विभूषित खण्डेला के राजा द्वारकादास|
राजा द्वारकादास नरसिंह अवतार के उपासक थे अत: उन्हें अपने ईष्ट पर भरोसा था कि 
सिंह उनका कुछ नहीं बिगाड़ सकता| अत: उन्होंने स्नान-पूजा कर पीतल के एक थाल में पूजा की सामग्री लेकर उसे भगवान का अवतार नरसिंह समझकर पूजा हेतु आगे बढे और सिंह (शेर) के पास गए| उनके सिंह के पास पहुँचते ही वहां उपस्थित सभी दरबारियों व सैनिकों ने बादशाह के साथ एक चमत्कार देखा कि- खण्डेला प्रमुख राजा द्वारकादास सिंह के कपाल पर तिलक रहे है| तिलक के बाद सिंह के गले में माला पहना रहे है और सिंह ने बड़ी विनम्रता के साथ उनके सामने खड़े रहकर तिलक लगवाया और माला पहनी| यही नहीं इसके बाद सिंह नम्रता से राजा की ओर बढ़ा और राजा का मुख चाटने लगा|


जिंदगी की तलाश में
वह बैठा रहता है
शहंशाही अंदाज़ लिए 
कूड़े के ढेर पर,
नाक पर रूमाल रखे

मेरी फ़ोटो
बापू मुझे बस कवि बना दे
तोड़ मोड़ जोडू क़ायदा सीखा दे

अनभिज्ञ जहान से बचपन था
देख लेख लिखने को मन था



आगाज तो होता है...  मीनाकुमारी
आगाज तो होता है अंजाम नहीं होता
जब मेरी कहानी में वह नाम नहीं होता

जब जुल्फ की कालिख में गुम जाए कोई राही
बदनाम सही लेकिन गुमनाम नहीं होता


एक साल पहले....


और मुझे राम से
डर लगने लगा है
राम आज मुझे
पल पल हर पल
नोच रहा है
किस से कहूँ
नहीं कह सकता
राम राम है
जय श्री राम है
मेरा ही राम है
लक्ष्मण तुम को
शक्ति लगी थी
और तुम्हारे पास
प्रश्न तब नहीं थे



मेहमान.....ओंकार केडिया
सड़कें बंद हैं,
रास्ता रोके खड़े हैं
पुलिस के बैरियर,
आड़ी-तिरछी बेतरतीब
बिखरी हुई हैं गाड़ियाँ,
सूई भर जगह नहीं सरकने को,


आज्ञा दें
कल भी मैं थी
आज भी मैं ही हूँ
कल मिलिएगा भाई कुलदीप जी से...
सादर




7 टिप्‍पणियां:

  1. उम्दा सूत्रों के साथ 'उलूक' की बकवास 'किसी के पढ़ने या समझने के लिये नहीं होता है लक्ष्मण के प्रश्न का जवाब होता है बस राम ही कहीं नहीं होता है' आज की हलचल में भी । आभार यशोदा जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभप्रभात....
    सुंदर संकलन...

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति ...

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर लिंक्स. मेरी कविता को जगह देने के लिए शुक्रिया

    उत्तर देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...