निवेदन।

*हम अपने पाठकों का हर्षित हृदय से सूचित कर रहे हैं कि शनिवार दिनांक 14 जुलाई, रथयात्रा के दिन हमारे ब्लॉग का तीसरा वर्ष पूर्ण हो रहा है, साथ ही यह ब्लौग अपने 11 शतक भी पूरे कर रहा है, इस अवसर पर आपसे
आपकी पसंद की एक रचना की गुज़ारिश है, रचना किसी भी विषय पर हो सकती है, जिससे हमारा तीसरी वर्ष यादगार वर्ष बन जाएगा* रचना दिनांक 13 जुलाई 2018 सुबह 10 बजे तक हमे इस ब्लौग के संपर्क प्रारूप द्वारा भेजे।
सादर


समर्थक

सोमवार, 21 मार्च 2016

248...गैर आशिक़ हैं जो वो आशिक़ बनाए जाएंगे

सादर अभिवादन..
होलिका पर्व की अग्रिम शुभकामनाएँ


चलें चलते हैं आज की चयनित रचनाओं की ओर...

तू रोता है अपने दुःख से 
और मैं 
रोती हूँ
प्यार की चाहत मे 

जब कभी
....मैं
नहीं कह पाती
....तुमसे
अपने मन की बात


जली होलिका 
प्रहलाद न जला 
विजयी सत्य |

कभी-कहीं दि‍ख जाती हैं एक साथ हजारों गौरैया तो वाकई बहुत अच्‍छा लगता है। कुछ साल पहले मैंने ये तस्‍वीर ली थी जो मुझे बेहद पसंद है। एक ढलती शाम में गौरैयों के बसेरे से आती चहचहाहट ने मेरे पांव थाम लि‍ए थे। बहुत देर मैं इन्‍हें देखती रही।


मेरी धरोहर में.. महेश चंद्र गुप्त खलिश
जान लिया नामुमकिन है दिल को पाना अहसासों से
पास न दौलत तो मत जाना उल्फ़त के बाज़ारों में

आज तलक मुँह ना मोड़ा है ख़लिश वफ़ा से तो हमने
भूल न जाना, गिन लेना हमको अपने दिलदारों में.



आज की शीर्षक कड़ी कुछ हुलियाना अंदाज में

मह्वे-हैरत में हूँ कि वो सैटर था कितना बाकमाल
इश्क़ के बारे में पूछा जिसने पर्चे में सवाल
ऐसे ही सैटर अगर दो-चार पैदा हो गए
देखना इस मुल्क में फनकार पैदा हो गए
आम होगी आशिकी कालिज के अर्ज़-ओ-तूल में
लैला-ओ-मजनूं नज़र आएँगे अब इस्कूल में
इश्क़ के आदाब लड़कों को सिखाये जाएंगे

आज्ञा दें
फिर मिलेंगे
एक छोटा सा विज्ञापन वीडियो....
पर इसे कला की दृष्टि से देखें
बच्चो को भी आनन्द आएगा
कोशिश करेंगे बनाने की




5 टिप्‍पणियां:

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...