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रविवार, 20 मार्च 2016

247....विजय ध्वज लहराते चले

सुप्रभात दोस्तो 
सभी को सादर प्रणाम 
आशापुरा माँ की कृपा और आप सब की दुआ से राजस्थान पटवारी भर्ती की प्रारम्भिक परीक्षा मे उत्तीर्ण हो गया । अब मुख्य परीक्षा की तैयारी की वजह से अप्रैल मे मिलना नही हो पाएगा । 


आइए चलते आज की प्रस्तुति की ओर .....


एक बार एक हंस और हंसिनी हरिद्वार के सुरम्य वातावरण से भटकते हुए, उजड़े वीरान और रेगिस्तान के इलाके में आ गये!

हंसिनी ने हंस को कहा कि ये किस उजड़े इलाके में आ गये हैं ??
यहाँ न तो जल है, न जंगल और न ही ठंडी हवाएं हैं, यहाँ तो हमारा जीना मुश्किल हो जायेगा !
भटकते भटकते शाम हो गयी तो हंस ने हंसिनी से कहा कि किसी तरह आज की रात बिता लो, सुबह हम लोग हरिद्वार लौट चलेंगे !

कहाँ खबर थी,तुम्हारे साथ वो...
होली आखिरी थी...
नही तो जी भर कर...
खेल लेती मैं होली...
तुम्हारी हथेलियों से...
मेरे गालो पर लगा वो गुलाल,
तो कब का मिट गया गया था..
पर तुम्हारी हथेलियों के निशां,
आज भी मेरे गालो पर नजर आते है....
मुझे याद है...जब तुमने हँसते हुऐ,
गुलाल से सिंदूर भर दिया था,


ले आजादी की मशाल
वे झूमते गाते चले
कफ़न बाँधकर अपने सर
शान से मुस्काते चले

बाजुओं में जोश था
रक्त में थी रवानगी
भारत माँ के वंदन की
भरी हुई थी दीवानगी
केसरिया से तन मन रँग
विजय ध्वज लहराते चले


पढ़ाई के द्वारा इस दुनिया में कुछ भी हासिल किया जा सकता है,जैसा की हम सब जानते है,कई लोग अपने तेज दिमाग का उपयोग करके लाखो कमा रहे है,जैसा की आप सब जानते है,की दुनिया भर में कई सारे कांटेस्ट चलाये जा रहे है,क्विज आदि के,अगर आप एक छात्र है,और आप पढ़ने में ठीक-ठाक है,और आप को अपने उपर पूरा विशबास है,की मै जित सकता हु,तो आप इन साधनों द्वारा अपने परिवार की थोड़ी बहुत मदद कर पायंगे,और अपने सपनों को भी पूरा कर सकेंगे,अपना नाम दुनिया में फैला सकेंगे,तो चलिए आज मै कुछ ऐसे साधन बताऊंगा जिन के द्वारा आप कुछ कमाई अथवा अपनी रोज्म्रा की जिन्दगी में इस्तेमाल किये जाने बाले यंत्र को हासिल कर सकेंगे।


          कविताएँ
अच्छे लगते हैं मुझे आम के बौर,
हरे पत्तों से झांकते पीले-पीले बौर,
सुन्दर से,मासूम से, नाज़ुक से.

कुछ बौर झर जाएंगे,
फागुन की तेज़ आँधियों में
या बेमौसम की बरसात में,
पर कुछ झेल लेंगे सब कुछ,
खेल-खेल में उछाले गए पत्थर भी
और बन जाएंगे खट्टी कैरियां
या मीठे रसीले आम.


धन्यवाद 
अब दीजिए आज्ञा 
सादर विरम सिंह सुरावा

4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत बढ़िया हलचल प्रस्तुति हेतु आभार !

    जवाब देंहटाएं
  2. सुन्दर लिंक्स से सजी हुई हलचल .....आपको बधाई और उज्जवल भविष्य के लिए शुभकामनाये ....

    जवाब देंहटाएं
  3. भाई विराम जी...
    एक से एक लिंक...
    आप सफल हों...
    ये कामना है।

    जवाब देंहटाएं
  4. Looking to publish Online Books, in Ebook and paperback version, publish book with best
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    जवाब देंहटाएं

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