960 का जोड़ अंक 6
आप ये न कहना 9
सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
हुआ जो आके आश्कार होली का
बजा रबाब से मिलकर सितार होली का
सुरुद रक्स हुआ बेशुमार होली का
हंसी खुशी में बढ़ा करोबार होली का
जुबां पे नाम हुआ बारबार होली का।
।। नजीर अकबरबादी।।
** होली मुबारक**
©निवेिदता
आज बसियौरा होली है. बसियौरा माने बासी.
बिहार में लगभग हर बड़े त्यौहार का बसियौरा मनाया जाता है
या फिर उसको छोटा-बड़ा में बाँट देते हैं. दीवाली में बच्चों का एक दिन से मन नहीं भरता
तो एक दिन पहले छोटी दिवाली कर दिया. बचे पटाखों का स्टॉक ख़त्म करने के लिए
एक दिन बाद बसियौरा दिवाली भी मना लेते हैं. वैसे ही बसियौरा दसहरा
और बसियौरा होली भी. होली के फंक्शन की तैयारी में इस पर
कुछ लिख नहीं पाया. दिमाग में आ रहा था कुछ कुछ.
फिर लगा क्यों न एक बसियौरा पोस्ट ही ठेल दी जाये..
तो पहले आपको होली मुबारक
बसियौरा

दोहे रमेश के
सूना-सूना है बडा, .....होली का त्योहार !
ओठों पे मुस्कान ले, आ भी जाओ यार !!
दिखी नहीं त्यौहार में, शक्लें कुछ इस बार !
थी जिनकी मुस्कान ही, पिचकारी की धार !!
होली
उड़त गुलाल लाल भए बादर
आसमान रंगों की झालर
झरे अबीर चले पछवैया
आँगन बोले सोन चिरैया
मन के द्वार, नयन के पनघट
रंग बिखरते मिठबोली के
होली
राम रहीम बने हमजोली
डालें रंग बनाकर टोली
कोई धर्म हो कोई जाति
सभी बने है संगी-साथी
गले लगे सब लगा गुलाल
दिल में ना अब कोई मलाल
होली

रंग उड़े चेहरे हैं, कौन रंग डालोगे
मांस रहित हड्डियां हैं, कब तक संभालोगे ।
फिर मिलेंगे....
अरे जरा ठहरें
प्रणामाशीष
हुआ जो आके आश्कार होली का
बजा रबाब से मिलकर सितार होली का
सुरुद रक्स हुआ बेशुमार होली का
हंसी खुशी में बढ़ा करोबार होली का
जुबां पे नाम हुआ बारबार होली का।
।। नजीर अकबरबादी।।
** होली मुबारक**
©निवेिदता
आज बसियौरा होली है. बसियौरा माने बासी.
बिहार में लगभग हर बड़े त्यौहार का बसियौरा मनाया जाता है
या फिर उसको छोटा-बड़ा में बाँट देते हैं. दीवाली में बच्चों का एक दिन से मन नहीं भरता
तो एक दिन पहले छोटी दिवाली कर दिया. बचे पटाखों का स्टॉक ख़त्म करने के लिए
एक दिन बाद बसियौरा दिवाली भी मना लेते हैं. वैसे ही बसियौरा दसहरा
और बसियौरा होली भी. होली के फंक्शन की तैयारी में इस पर
कुछ लिख नहीं पाया. दिमाग में आ रहा था कुछ कुछ.
फिर लगा क्यों न एक बसियौरा पोस्ट ही ठेल दी जाये..
तो पहले आपको होली मुबारक
बसियौरा

दोहे रमेश के
सूना-सूना है बडा, .....होली का त्योहार !
ओठों पे मुस्कान ले, आ भी जाओ यार !!
दिखी नहीं त्यौहार में, शक्लें कुछ इस बार !
थी जिनकी मुस्कान ही, पिचकारी की धार !!
होली
उड़त गुलाल लाल भए बादर
आसमान रंगों की झालर
झरे अबीर चले पछवैया
आँगन बोले सोन चिरैया
मन के द्वार, नयन के पनघट
रंग बिखरते मिठबोली के
होली
राम रहीम बने हमजोली
डालें रंग बनाकर टोली
कोई धर्म हो कोई जाति
सभी बने है संगी-साथी
गले लगे सब लगा गुलाल
दिल में ना अब कोई मलाल
होली

रंग उड़े चेहरे हैं, कौन रंग डालोगे
मांस रहित हड्डियां हैं, कब तक संभालोगे ।
फिर मिलेंगे....
अरे जरा ठहरें
क़दम हम
सभी के लिए एक खुला मंच
आपका हम-क़दम आठवें क़दम की ओर
इस सप्ताह का विषय है
:::: उदास ::::
उदाहरणः
जब कभी उकेर लेती हूँ तुम्हें
अपनी नज़्मों में !
आँसुओं से भीगे
गीले, अधसूखे शब्दों से!!
सूख जायेंगी गर कभी
आप अपनी रचना आज शनिवार 03 मार्च 2018
शाम 5 बजे तक भेज सकते हैं। चुनी गयी श्रेष्ठ रचनाऐं आगामी सोमवारीय अंक 05 मार्च 2018 को प्रकाशित की जाएगी ।
इस विषय पर सम्पूर्ण जानकारी हेतु हमारे पिछले गुरुवारीय अंक