सादर नमस्कार...
अभी-अभी समाचार मिला है कि
पटना शहर के सारे डॉक्टर
अभी-अभी समाचार मिला है कि
पटना शहर के सारे डॉक्टर
एक जुट होकर आदरणीय विभा दीदी
और उनके ग्रुप से रार ठान ली....
उनके मिशन 1000 टन के चलते
और उनके ग्रुप से रार ठान ली....
उनके मिशन 1000 टन के चलते
उनका धन्धा चौपट हो गया है
.....
आज करवा चौथ है..
घर पर ही रहने की हिदायत मिली है
चना-चबेना का इन्तजाम घर पर ही है
मेरे स्वास्थ की चिन्ता हैं न उसे...
........
आज-कल की पसंदीदा रचनाएँ...
आज की शुरुआत..एक आत्मविश्वासी बच्चे से..
जो अविश्वसनीय है...
चिट्ठी-पत्री के दिन लद गए थे..
उलूक टाईम्स से..डॉ.सुशील जोशी

लिखना भेजना
डाकिये का पता
देख कर किसी
का घर ढूँढना
कितना होम वर्क
किया जा रहा है
आँख के आँसू छुपाकर....श्वेता सिन्हा

सूखते सपनों के बिचड़े
रोपकर मुस्कान लिखना,
लूटते अस्मत को ढककर
बातों के आख्यान लिखना,
बुझ गये चूल्हों पर लोटते
बदन के अंगार लिखना।
एक रोज......पारूल कनानी

एक रोज छुपा दूंगा
सारे लफ्ज तुम्हारे
और तुम मेरी खामोशी
पर फिसल जाओगी!!
देखता हूँ कब तलक
छुपी रहोगी मुझसे
यादें.... विभा ठाकुर
सुनी-सुनी अखियों में
भीगी-भीगी रतियों में
सुनी-सुनी गलियों में
दिल रोये मेरा तुम बिन
आपको लोग नाम से जानते हैं कि घर के नंबर से.... गगन शर्मा
आस-पड़ोस के लोगों की पहचान भी घरों के नंबर से होने लगी है, किसी से पूछिए मल्होत्रा जी कहाँ रहते है तो छूटते ही उलटा पूछेगा, कौन 312 वाले ? जो गंजे से हैं ? किसी कालोनी में जा किसी बच्चे से कोई पूछे कि शर्मा जी को जानते हो तो पलट कर वही पूछेगा, घर का नंबर क्या है ? यदि बताया जाएगा कि 162 में ग्राउंड फ्लोर; तो वह घर की दिशा ही बता पाएगा। यदि गलती से दो-तीन लोगों के बीच जा, पूछा जाए कि सदानंद वर्मा जी कहाँ रहते हैं तो पहले वे आपस में ही तसल्ली करेंगें; वही, जिनका हार्ट का ऑपरेशन हुआ था ? अरे नहीं वे तो थर्ड फ्लोर पर हैं अग्रवाल, वर्मा जी उनके नीचे रहते हैं, 224 में।
सब्र से अब रहा नहीं जाता....विनीता तिवारी
फ़र्क़ दिल में रहा, दिमाग में भी
उम्र का फ़ासला नहीं जाता
जा रहे चाँद पे, सितारों पे
दिल से दिल तक चला नहीं जाता
और अब उलूक टाईम्स के पुराने अखबार की कतरन
परमानंद
अभी बचा है
मेरे पास
सोच कर
'उलूक' ने
अपनी पीठ
को फिर से
खुद ही
थपथपाया।
अब आज्ञा दें दिग्विजय को...
सादर
.....
आज करवा चौथ है..
घर पर ही रहने की हिदायत मिली है
चना-चबेना का इन्तजाम घर पर ही है
मेरे स्वास्थ की चिन्ता हैं न उसे...
........
आज-कल की पसंदीदा रचनाएँ...
आज की शुरुआत..एक आत्मविश्वासी बच्चे से..
जो अविश्वसनीय है...
चिट्ठी-पत्री के दिन लद गए थे..
उलूक टाईम्स से..डॉ.सुशील जोशी

लिखना भेजना
डाकिये का पता
देख कर किसी
का घर ढूँढना
कितना होम वर्क
किया जा रहा है
आँख के आँसू छुपाकर....श्वेता सिन्हा

सूखते सपनों के बिचड़े
रोपकर मुस्कान लिखना,
लूटते अस्मत को ढककर
बातों के आख्यान लिखना,
बुझ गये चूल्हों पर लोटते
बदन के अंगार लिखना।
एक रोज......पारूल कनानी

एक रोज छुपा दूंगा
सारे लफ्ज तुम्हारे
और तुम मेरी खामोशी
पर फिसल जाओगी!!
देखता हूँ कब तलक
छुपी रहोगी मुझसे
यादें.... विभा ठाकुर
सुनी-सुनी अखियों में
भीगी-भीगी रतियों में
सुनी-सुनी गलियों में
दिल रोये मेरा तुम बिन
आपको लोग नाम से जानते हैं कि घर के नंबर से.... गगन शर्मा
आस-पड़ोस के लोगों की पहचान भी घरों के नंबर से होने लगी है, किसी से पूछिए मल्होत्रा जी कहाँ रहते है तो छूटते ही उलटा पूछेगा, कौन 312 वाले ? जो गंजे से हैं ? किसी कालोनी में जा किसी बच्चे से कोई पूछे कि शर्मा जी को जानते हो तो पलट कर वही पूछेगा, घर का नंबर क्या है ? यदि बताया जाएगा कि 162 में ग्राउंड फ्लोर; तो वह घर की दिशा ही बता पाएगा। यदि गलती से दो-तीन लोगों के बीच जा, पूछा जाए कि सदानंद वर्मा जी कहाँ रहते हैं तो पहले वे आपस में ही तसल्ली करेंगें; वही, जिनका हार्ट का ऑपरेशन हुआ था ? अरे नहीं वे तो थर्ड फ्लोर पर हैं अग्रवाल, वर्मा जी उनके नीचे रहते हैं, 224 में।
सब्र से अब रहा नहीं जाता....विनीता तिवारी
फ़र्क़ दिल में रहा, दिमाग में भी
उम्र का फ़ासला नहीं जाता
जा रहे चाँद पे, सितारों पे
दिल से दिल तक चला नहीं जाता
और अब उलूक टाईम्स के पुराने अखबार की कतरन
परमानंद
अभी बचा है
मेरे पास
सोच कर
'उलूक' ने
अपनी पीठ
को फिर से
खुद ही
थपथपाया।
अब आज्ञा दें दिग्विजय को...
सादर



