सादर अभिवादन..
भाई कुलदीप जी रुद्राभिषेक में व्यस्त हैं आज
भाई कुलदीप जी रुद्राभिषेक में व्यस्त हैं आज
पहली बार व्हाट्सएप्प का उपयोग हुआ है
सूचना का आदान प्रदान के लिए...
प्रस्तुत हैं मेरी पसंद जो मैंने आज पढ़ी....
सूचना का आदान प्रदान के लिए...
प्रस्तुत हैं मेरी पसंद जो मैंने आज पढ़ी....

छोटी लहरों पर ही, पड़ते हैं पहरे और
जिन्दगी की ज़ोर - हवा हैं कायम..
पर मेरी फसाने की, मनमानी
अब भी बाकी है
वधू बिन शादी , शादी बिन प्यार ,
बिन शादी के लिव इन यार।
जब ऐसा व्यवहार , तो व्यर्थ संस्कार !

मिले जीवन के पथ कितने ही सहारे,
मन के उस जिद्दी से कोने से बस हम हैं हारे,
खाली खाली सा रहता हरदम वो कोना!
वो सूना सा कोना चाहे तेरा ही होना!
करता हूँ अब अंतिम अधिकार समर्पित
याद नही मैं अब उसको कर पाऊंगा ।
मर्म छुपा लूँगा दिल में सच कहता हूँ
अब मैं नही किसी को बतलाऊँगा
मझधार की
उछलती लहरें
बुला रही हैं,
कब तक
सिमटा हुआ
बैठा रहेगा किनारों में।
देखें कब बूंदों के सोंधेपन से
भरेंगे नथुने सरगोशी कराती है
कब रिमझिम सुरों से हर्षोन्माद
जगेंगे धरा बुदबुदाती है ,
इस प्रस्तुति का समापन इन पंक्तियों के साथ
कभी जिन्दगी का
ये हुनर भी
आजमाना चाहिए,
जब अपनों से
जंग हो, तो
हार जाना चाहिए

