हिन्दू, हिन्दू बने रहें
मुसलमान बने रहें मुसलमान
क्योंकि इंसान बनने में
धर्म नष्ट होता है श्रीमान।
सादर अभिवादन..
आज की पसंदीदा रचनाओं पर आपकी नज़र...

स्वर्ण किरण के
तारों से नित बुनी
सुनहरी धूप की चादर
तुम्हें नमन हे भुवन भास्कर !

फिर खिला है अमलतास.....रश्मि शर्मा
फिर खिला है
अमलतास
सूनी दोपहर
घर है उदास
पीले गजरे
झूम रहे कंचन वृक्ष में
फिर खिला है अमलतास.....रश्मि शर्मा
फिर खिला है
अमलतास
सूनी दोपहर
घर है उदास
पीले गजरे
झूम रहे कंचन वृक्ष में

याद आता है ख़ूब वो गांव का मकान
वो खुली सी ज़मीन वो खुला आसमान
वो बड़ा सा आंगन और ऊंचा रोशनदान
वो ईंटों का छत और पतंगों की उड़ान
टूट कर बिखरे सपने
पड़े हैं एक कोने मे ,
आज उन्हें
सिसकने की भी
इज़ाज़त नहीं ,

खामोश निगाहें
और लरजते होंठ
जैसे बन्द किताब कोई
फड़फड़ाती हो कोने से

बावरे की कलम
बेजान जरूर होती है
पर लिखने पर आती है
तो बावरे की तरह ही
बावरी हो जाती है
बावरों की दुनियाँ
के बावरेपन को
बावरे ही समझ पाते हैं
जो बावरे नहीं होते हैं
उनको कलम से
कुछ लेना देना
नहीं होता है
जो भी लिखवाते हैं
दिमाग से लिखवाते हैं
आज्ञा दें दिग्विजय को
सादर
सादर
