जय मां हाटेशवरी...
आप सभी को नूतन वर्ष 2017 की शुभकामनाएं...
स्वागत! जीवन के नवल वर्ष
आओ, नूतन-निर्माण लिये,
इस महा जागरण के युग में
जाग्रत जीवन अभिमान लिये;
दीनों दुखियों का त्राण लिये
मानवता का कल्याण लिये,
स्वागत! नवयुग के नवल वर्ष!
तुम आओ स्वर्ण-विहान लिये।
संसार क्षितिज पर महाक्रान्ति
की ज्वालाओं के गान लिये,
मेरे भारत के लिये नई
प्रेरणा नया उत्थान लिये;
मुर्दा शरीर में नये प्राण
प्राणों में नव अरमान लिये,
स्वागत!स्वागत! मेरे आगत!
तुम आओ स्वर्ण विहान लिये!
युग-युग तक पिसते आये
कृषकों को जीवन-दान लिये,
कंकाल-मात्र रह गये शेष
मजदूरों का नव त्राण लिये;
श्रमिकों का नव संगठन लिये,
पददलितों का उत्थान लिये;
स्वागत!स्वागत! मेरे आगत!
तुम आओ स्वर्ण विहान लिये!
सत्ताधारी साम्राज्यवाद के
मद का चिर-अवसान लिये,
दुर्बल को अभयदान,
भूखे को रोटी का सामान लिये;
जीवन में नूतन क्रान्ति
क्रान्ति में नये-नये बलिदान लिये,
स्वागत! जीवन के नवल वर्ष
आओ, तुम स्वर्ण विहान लिये!
सोहनलाल द्विवेदी
अब पेश है...चयनित कड़ियां...
वह साल गया, यह साल चला.....हरिवंशराय बच्चन
मित्रों ने हर्ष-बधाई दी
मित्रों को हर्ष-बधाई दी
उत्तर भेजा, उत्तर आया
'नूतन प्रकाश', 'नूतन प्रभात'
इत्यादि शब्द कुछ दिन गूंजे
फिर मंद पडे, फिर लुप्त हुए
फिर अपनी गति से काल चला;
वह साल गया, यह साल चला।
मुदित मन से आ रहा नव वर्ष है-
दर्द दुःख की कालिमा से मुक्त हो
उदित हो सूरज क्षितिज के भाल पे
उल्लसित हो थिरकने वसुधा लगे
मुग्ध हो संसृति प्रकृति की चाल पे !
बह चले गंगा पराई पीर से
पिघलता हो मन किसी बदहाल पे
जंग और आतंक की बातें न हों
शुभाशंसा हो लिखी हर भाल पे !
आनेवाली मुस्कराहटों ...-
बस जरा सा..
हँसते हुए ख्वाबों ने कान के पास आकर हौले से बोला..
क्या जाने कल क्या हो?
कोमल मन के ख्याल अच्छी हि होनी चाहिए..।
आओ खेलें झूठ सच खेलना भी कोई खेलना है-
किसी
एक झूठे
के
बड़े झूठ
ने ही
जीतना है
झूठों में
सबसे
बड़े झूठे
को
मिलना
है ईनाम
किसी
नामी
बेनामी
झूठे
ने ही
खुश
हो कर
अन्त में
उछलना है
भुला नहीं देना जी भुला नहीं देना-
वैसे काफी पहले से ही मोबाईल,लैपटॉप,डेस्कटॉप आदि ने संगीत उपकरणों की जगह लेनी शुरू कर दी थी,रही सही कसर इंटरनेट पर मौजूद गीतों,गजलों का भरपूर संग्रह भी
इसका एक कारण हो सकता है.आने वाले समय में तकनीक का और विस्तार हो सकता है लेकिन संगीत प्रेमियों के लिए संगीत का खजाना तब भी बदस्तूर जारी रहेगा.
इन कैसेटों पर नजर जाती है तो लगता है ये कह रही हों.........
भुला नहीं देना जी भुला नहीं देना
जमाना ख़राब है दगा नहीं देना
नववर्ष ( गीत ).....नीलेन्द्र शुक्ल
नवजीवन हो नये वर्ष में
भरे सदा उजियारा ।
रहे सदा उत्तुड़्ग श्रृड़्ग
पर भारतवर्ष हमारा ।।
आकांक्षा...संध्या शर्मा-
और मैं
पलकें बंद करके
डूबी रहूँ
प्रीत की गहराईयों में ....
धन्यवाद।

