सादर अभिवादन..
लगता है..
जाग गया हिन्दुस्तान
गतिविधियाँ जारी हो गई..
गर.. सच मे जारी हो गई तो जारी रहे..
इच्छा है करांची घूमने की
वो भी बिना पासपोर्ट...
सादर..
चनिए चलें आज की चयनित रचनाओं की ओर..
अग्रलेख....
एक खत... साधना वैद
कुछ करिये मोदी जी ! अब तो कुछ करिये !
करोड़ों भारतवासियों की नज़रें आप पर टिकी हैं !
यह चुप्पी साधने का नहीं हुंकार भरने का समय आया है !
इस एक पल की निष्क्रियता सारी सेना का मनोबल
और सारे भारतवासियों की उम्मीदों को तोड़ जायेगी !
इतने वीरों के बलिदान को निष्फल मत होने दीजिये !
शान्ति और अहिंसा के नाम पर कब तक
हमारे वीर जवान अपनी जानें न्यौछावर करते रहेंगे
अमृत सा उसका पानी....रेखा जोशी
हिमालय पर्वत से
लहराती बलखाती
रवानी जवानी सी
उफनती जोशीली
बहती जा रही
अमृत सा उसका पानी
अच्छे दिनों की गज़ल....निखिल आनन्द गिरि
छप्पन इंची सीने का क्या काम है सरहद पर,
मच्छर तक से लड़ने में नाकाम है, अच्छा है।
बिना बुलाए किसी शरीफ के घर हो आते हैं
और ओबामा से भी दुआ-सलाम है, अच्छा है।
हो गई पूजा.........दिलबाग विर्क
कहीं न गया
तुझे याद किया है
हो गई पूजा ।
कविता महिलाओ से....विरम सिॆ़ंह
हर दिन सड़को पर मचली जाती हो ।
सिर्फ सिसकियाँ भर रह जाती हो ।।
फिर भी कहती अबला नही, हम है सबला ।
क्यों ओढ रखा है कायरता पर वीरता का चोला ।।
एक साल पहले..पाँच लिंकों का आनन्द में..
शिप्रा की लहरें..
अनंग गंध..प्रतिभा सक्सेना
गंध-मुग्ध मृगी एक निज में बौराई,
विकल प्राण-मन अधीर भूली भरमाई .
कैसी उदंड गंध मंद नहीं होती,
जगती जो प्यास ,पल भर न चैन लेती .
आज्ञा दें यशोदा को..
फिर मिलते हैं..
आज एक फ्राँसिसी जादू दिखाती हूँ
"Where Did She Go?"
लगता है..
जाग गया हिन्दुस्तान
गतिविधियाँ जारी हो गई..
गर.. सच मे जारी हो गई तो जारी रहे..
इच्छा है करांची घूमने की
वो भी बिना पासपोर्ट...
सादर..
चनिए चलें आज की चयनित रचनाओं की ओर..
अग्रलेख....
एक खत... साधना वैद
कुछ करिये मोदी जी ! अब तो कुछ करिये !
करोड़ों भारतवासियों की नज़रें आप पर टिकी हैं !
यह चुप्पी साधने का नहीं हुंकार भरने का समय आया है !
इस एक पल की निष्क्रियता सारी सेना का मनोबल
और सारे भारतवासियों की उम्मीदों को तोड़ जायेगी !
इतने वीरों के बलिदान को निष्फल मत होने दीजिये !
शान्ति और अहिंसा के नाम पर कब तक
हमारे वीर जवान अपनी जानें न्यौछावर करते रहेंगे
अमृत सा उसका पानी....रेखा जोशी
हिमालय पर्वत से
लहराती बलखाती
रवानी जवानी सी
उफनती जोशीली
बहती जा रही
अमृत सा उसका पानी
अच्छे दिनों की गज़ल....निखिल आनन्द गिरि
छप्पन इंची सीने का क्या काम है सरहद पर,
मच्छर तक से लड़ने में नाकाम है, अच्छा है।
बिना बुलाए किसी शरीफ के घर हो आते हैं
और ओबामा से भी दुआ-सलाम है, अच्छा है।
हो गई पूजा.........दिलबाग विर्क
कहीं न गया
तुझे याद किया है
हो गई पूजा ।
कविता महिलाओ से....विरम सिॆ़ंह
हर दिन सड़को पर मचली जाती हो ।
सिर्फ सिसकियाँ भर रह जाती हो ।।
फिर भी कहती अबला नही, हम है सबला ।
क्यों ओढ रखा है कायरता पर वीरता का चोला ।।
एक साल पहले..पाँच लिंकों का आनन्द में..
शिप्रा की लहरें..
अनंग गंध..प्रतिभा सक्सेना
गंध-मुग्ध मृगी एक निज में बौराई,
विकल प्राण-मन अधीर भूली भरमाई .
कैसी उदंड गंध मंद नहीं होती,
जगती जो प्यास ,पल भर न चैन लेती .
आज्ञा दें यशोदा को..
फिर मिलते हैं..
आज एक फ्राँसिसी जादू दिखाती हूँ
"Where Did She Go?"





