भारतीय स्वतंत्रता दिवस पर
आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ
शुभकामनाएँ व सादर अभिवादन स्वीकार करें
प्रस्तुत कर रही हूँ आज की पसंदीदा रचनाएँ...
आप सभी का हार्दिक अभिनन्दन करती हूँ
शुभकामनाएँ व सादर अभिवादन स्वीकार करें
प्रस्तुत कर रही हूँ आज की पसंदीदा रचनाएँ...
``सखि वे मुझसे कह कर जाते,
तो क्या वे मुझको अपनी पथ बाधा ही पाते।
नयन उन्हें हैं निष्ठुर कहते
पर इनसे जो आँसू बहते
सदय हृदय वे कैसे सहते?
जब से सीखा है
मैनें जीना
बंद दरवाजों
के भीतर
तब महसूस किया
कि ये तो
बतियाती हैं
घंटों मुझसे
दूसरों की गुलामी के निवाले से हृष्ट-पुष्ट हो जाने से,
स्वतंत्रता के साथ दुर्बल बने रहना भला ।
झूठ-फरेब, भ्रष्टाचार, दुराचार-अनाचार भरी शान से
गरीब रहकर घर की रुखी-सूखी खाकर जीना भला ।।
नियति...उपासना सियाग
कोमल दोनों की आवाजों में अंतर को सुन और पहचान रही थी। बाहर वाले तोते से पिंजरे वाले तोते की आवाज़ कितनी कर्कश थी। परतन्त्रता की एक पीड़ा भी झलक रही थी। आराम कुर्सी पर झूलती हुई कोमल सोच रही थी कि तोते और उसके जीवन में कितना साम्य है। दोनों ही पिंजरे में है।
नियति...उपासना सियाग
कोमल दोनों की आवाजों में अंतर को सुन और पहचान रही थी। बाहर वाले तोते से पिंजरे वाले तोते की आवाज़ कितनी कर्कश थी। परतन्त्रता की एक पीड़ा भी झलक रही थी। आराम कुर्सी पर झूलती हुई कोमल सोच रही थी कि तोते और उसके जीवन में कितना साम्य है। दोनों ही पिंजरे में है।
कोई तो पल
दे दो सुशासन का
खुश हो प्रजा !
आज की प्रथम कड़ी..
सपने देख
मशालें देख
गाँव देख
लोग देख
गा सके
तो गा
नहीं गा सके
तो चिल्ला
क्राँति गीत
कहीं भी
किसी भी
गिरोह में
जा और देख
आज बस इतना ही..
आज्ञा दीजिए यशोदा को
चलते-चलते एक देशगान सुनिए
साधना दीदी का पसंदीदा देशगान
आज की प्रथम कड़ी..
सपने देख
मशालें देख
गाँव देख
लोग देख
गा सके
तो गा
नहीं गा सके
तो चिल्ला
क्राँति गीत
कहीं भी
किसी भी
गिरोह में
जा और देख
आज बस इतना ही..
आज्ञा दीजिए यशोदा को
चलते-चलते एक देशगान सुनिए
साधना दीदी का पसंदीदा देशगान





