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आज ब्लेक डे
चौदह फरवरी 2019
याद मे वो सड़क /रात, 42 जवान शहीद हो गए थे
जी हां वैकल्पिक ,
जी हां वैकल्पिक ,
भूल नहीं सकते वो दिन..शहादत का दिन था,
बिना बुलेट वीर शहीद हो गए
दो पुरानी रचनाएँ याद है आप पढ़िएगा तो
वेलेंटाईन डे भूल जाएंगे
शहादत ...अनुराधा चौहान
शहादत ...अनुराधा चौहान
मातृभूमि का मैं वीर सुपूत
अपना हर फर्ज निभा आया
मां-बाबा तेरा मैं वीर सपूत
तिरंगे में लिपट घर आया हूं
नमन ...मीना भारद्वाज
माटी का रंग सुर्ख है….,
वसन्त में किसने बिखेर दिए गए हैं
अनगिनत पलाश के फूल
ठूंठ से गाछ
धूसर सी फिजायें..,
यकायक कहीं आवाज गूँजी
एक झूठी साजिश में....,
मातृभूमि के रक्षक….,
अब रचनाएँ देखें
फरवरी का महीना है और वेलेंटाइन डे के पहले आंकड़े हैं। आज 14 फरवरी को वेलेंटाइन डे है और इस दिन प्यार का इजहार भी होता है और इकरार भी। लेकिन कई बार बात सही नहीं होती और धारणा से युवावस्था की देहरी पर कदम रखते हैं युवा प्रेम को समझ नहीं पाते।
सुनिए अपर्णा की जुबानी
उम्र की संपूर्णता पर दिल का आलम गुलजार सा है,
अप्रत्याशित होने पर न जाने किसका इंतजार कर रहा है,
क़ाब एक क़दीम को एक नया शक्ल ओ रंग चाहिए,
हदे नज़र पे मुंतज़िर मुस्कान, कोई बात नहीं है,
मौन के बिना रुके भी
अन्य लोगों में से कौन सा नज़र आता है
जैसे कोई कृष्ण कहते हैं
तो राधा प्रकट होती है
और इतना ही नहीं
गौएँ और गवाले भी !
वृंदावन में उभर रहे हैं
और महारास घटता है
घर में
राय दूर हो जाओगे
नंद और भौजाई,
सिरहाने से
लापता नीरज,
नंद औ परसाई,
छठा -छमासे
वाणिज्य के लिए
आती कहाँ बुआ.
छुप गई, रुत किस ओर,
रुख-ए-रौशन, ज्यूं बन गए बुत,
यूं बुलाते ही, रह गए,
ये ईशारे कहीं!
यहीं रह गई परछाइयां, दब कर कहीं!
आज बस
सादर





