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सोमवार, 2 जनवरी 2023

3626 / आओ, मिल कर साथ चलें ।

 


 नमस्कार ! .... पाँच  लिंकों के आनंद के सभी पाठकों को  नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएँ .....हर वर्ष  1  जनवरी को लोग नए वर्ष की बधाई देते हुए आशाओं से भरे होते हैं और कामना करते हैं कि आने वाला साल सबके लिए शुभ हो .......  लेकिन वक़्त है की अपनी रफ़्तार से चलता रहता है ....... फिर भी जो हम कर सकते हैं उसके लिए प्रयास ज़रूर करना चाहिए .........आइये सबसे पहले पढ़ते हैं नव वर्ष का एक संकल्प गीत ----

आओ, मिल कर साथ चलें ।

कहीं रहे न भूखा कोई,
सबको रोटी दाल मिले।
सभी निरोगी रहें हमेशा,
हर जीवन खुशहाल मिले।
भले ठगे जाएँ हम लेकिन,
नहीं किसी को कभी छलें।।

वैसे तो नए साल में अचानक कुछ नहीं बदलता केवल कैलेण्डर के और उम्मीदों के ...... इसी बात को कितने सहज ढंग से  कह दिया है इस रचना में .... 

काल प्रवाह


अर्द्धरात्रि के अंधियारे में,

एक साल काल का डूबता।

क्षण में दूर क्षितिज से उसके,

नये साल का सूरज उगता।

सच है कि  क्या बदल जाता है नए वर्ष में ? लम्हा लम्हा बीतता जाता है ..... कोई लम्हा ख़ुशी ले आता है तो कोई यूँ ही फिसल जाता है ....... एक सशक्त रचना पढ़िए .... 

लम्हे


लम्हे लम्हे सिमटा जीवन
लम्हे लम्हे बिखरा जीवन
किसने पकड़े किसने जकड़े
लम्हे बहके लम्हे संभले
मन ही मन |


 कुछ को मलाल कि साल बीत गया और हमने तो कुछ नया किया ही नहीं तो कुछ का कहना कि साल कहाँ बीतता है ..... हम बीतते जाते हैं ........ तो किसी की सोच कि ये साल गया और नया आया लेकिन क्या नया आता है ... वही सब तो चलता रहता है ........ एक के बाद एक पढ़िए ये रचनाएँ ..... 


आली ,मेरा हाल न पूछो

मन कितना बेहाल न पूछो .

बैठे ठाले खिसक गया

मुट्ठी से सिक्का , साल न पूछो .


साल नहीं बीतता है....

बरखा में बूँद - बूँद कर, टपक रही है उम्र,

चुभती हवा में शिशिर की, सिहर रही है उम्र ।

फिर बसंत आगम पर रीझते हैं हम,

साल नहीं बीतता है, बीतते हैं हम !

साल


क्यों इतना शोर?क्यों इतना बवाल?
वो गया साल! ये नया साल!

ना कुछ बदला,ना कुछ सुधरा,
बस वही भेड़ की भेड़चाल।

और इन सब रचनाकारों के अतिरिक्त भी कुछ अलग ही तरह की सोच से परिचित हुई हूँ  कि वाकई क्या नया साल है भी या नहीं ..... 

क्या नया साल है ?


झुग्गियों में भी कुछ, झालरें लग रहीं,

आ रही रोशनी, क्या नया साल है ?


प्रेम-सौहार्द से एक नौका सजी,

देश में बह रही, क्या नया साल है ?


बिलकुल नया साल है .... तभी तो नए साल से ये उम्मीद की जा रही है ......


एक कामना नए साल में


गए  साल  जैसा  न  फिर  हाल  होगा,
तवक़्क़ो  है अच्छा  नया  साल  होगा।

सभी  और  देशों  से   ऊँचा  जगत् में, 
हमारे   वतन   का  सदा  भाल  होगा।

नव वर्ष की शुभकामनाओं के बाद अक्सर लोग हाल चाल भी पूछ ही लेते हैं तो चलिए हम भी पूछ लेते हैं ...... 

कैसे हो ...


अचानक  जब कोई  
रास्ते में मिल जाता है 
 और पूछता है ..
  कैसे हो .....?
  तो मैं कहती हूं
   कि जैसे समुद्र की मौजें  
     हमेशा मौज -मस्ती में रहती हैं . 

आज का यह अंक काव्य विधा को समर्पित  है ...... रस से परिपूर्ण ...... इसी तरह आप सबके जीवन में भी रस रहे ..... 

एक सूचना  - डॉ ०  उषा किरण जी की एक नयी पुस्तक आई है " दर्द का चन्दन " आप चाहें तो पुस्तक परिचय  या कहूँ कि समीक्षा यहाँ पढ़ सकते हैं ..... 

पुस्तक परिचय -- दर्द का चन्दन ( उषा किरण )


यूँ तो आज लोग काफी जागरूक हैं कैंसर के प्रति लेकिन जिस तरह से नायिका ने अपनी बीमारी के प्रति सजगता दिखाई वो बिरला ही कोई कर पाता है अन्यथा डॉक्टर के कह देने पर कि सब रिपोर्ट सही है ,निश्चिंत ही हो जाते हैं । यहाँ पर लेखिका यह संदेश दे रही हैं कि जब तक आप संतुष्ट न हों तब तक निश्चिंत न हों । इलाज से पहले ईश्वर के साथ संवाद  नायिका के  मन की दृढ़ता को दर्शाता है । 

इसी  के साथ आज विदा लेती हूँ | 
 नमस्कार 

 संगीता स्वरुप .

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