सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
जीवन में जिंदा होना थोड़ा सा मुश्किल है,हर रोज तो बेख़ुदी ही ज़मीर का कातिल है।
कल की ही बात है 'हाइकु चर्चा' में डॉ. जगदीश व्योम जी ने एक गहरी बात कही,-
"आजकल वही सबसे अधिक परेशान हैं , जो अधिक संवेदनशील हैं ।"
तो 'अति सर्वत्र वर्जयेत्'। इंसान बने रहने के लिए क्या होना चाहिए..
पहला कदम

कदम बढ़ाने की जरूरत है
काजल के पर्वत पर चढ़ना

फौजी बीवी

ठोस कदम

बाधाएँ आती है आएँ,
घिरें प्रलय की घोर घटाएँ,
पावों के नीचे अंगारे,
सिर पर बरसें यदि ज्वालाएँ,
निज हाथों से हँसते–हँसते,
आग लगा कर जलना होगा।
कदम मिलाकर चलना होगा।अटल बिहारी वाजपेयी
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पुन: मिलेंगे...
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पुन: मिलेंगे...
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अब बारी है आज के विषय की
आज का विषय है
इस चित्र को देखकर जो भाव और विचार उमड़ते हैं
से शब्दों में पिरोना है।
रचना भेजने की
अंतिम तिथि : 23 मई 2020
प्रकाशन तिथि : 25 मई 2020
