सादर अभिवादन।
आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें-

जो मन ने कहा
जो मन में पला
वह लिखा बस वही लिखा
कब कौन सी विधा हुई
किस तराजू पे परखी गई
किस नियम में सजी लेखनी
वो त्रिभुज हुई या वृत्ताकार बनी
समीप रही या समानांतर चली
नहीं मालूम यह क्या हुआ

सांसों की फिसलती हुई ये डोर थामकर
बेताब दिल की धड़कनों का शोर थामकर
करता हूँ इन्तज़ार इसी आस में कि तुम
आओगी कभी तीरगी* में भोर थामकर
रहते हैं ख़ार ज्यूँ गुलाबों के हमनशीं हो कर
दिल में दर्दों को वैसे ही छुपाया करना !!
तिनके-तिनके में छुपी है मोहब्बत राही
बुलबुल के घरौंदे को न मिटाया करना !!


"
हैप्पी न्यू इयर भाई "
"अरे .. अंग्रेजी में क्यों बोल रहे हैं, अरे भाई .. हिन्दी में नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं बोलिए ना .. "
" क्यों भला !? ये तो वही बात हो गई कि .. गुड़ खाए और गुलगुल्ला से परहेज़ .. "
" वो कैसे भाई ? "
" वो ऐसे कि आप ... "
इस वर्ष का नया विषय
यहां देखिए
यहां देखिए
आज बस यहीं तक
फिर मिलेंगे अगली प्रस्तुति में।
रवीन्द्र सिंह यादव