निवेदन।


फ़ॉलोअर

1630 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
1630 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

गुरुवार, 2 जनवरी 2020

1630...कुछ ऊबड़-खाबड़ लिखा जाता है सामाजिक विषमताओं के घने अंधेरों पर...

सादर अभिवादन। 
सन 2020 के द्वितीय दिवस में आपका स्वागत है। 

रंग-ख़ुशबू, 
फूल-ओ-फ़ज़ाएँ, 
हुस्न-ओ-शबाब, 
प्यार-मुहब्बत 
से इतर भी 
कुछ ऊबड़-खाबड़ 
लिखा जाता है 
सामाजिक विषमताओं के 
घने अंधेरों पर!

-रवीन्द्र सिंह यादव   

आइए अब आपको आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर ले चलें- 

मेरी फ़ोटो 
जो मन ने कहा   
जो मन में पला   
वह लिखा बस वही लिखा   
कब कौन सी विधा हुई   
किस तराजू पे परखी गई   
किस नियम में सजी लेखनी   
वो त्रिभुज हुई या वृत्ताकार बनी   
समीप रही या समानांतर चली   
नहीं मालूम यह क्या हुआ    

 

सांसों की फिसलती हुई ये डोर थामकर
बेताब दिल की धड़कनों का शोर थामकर
करता हूँ इन्तज़ार इसी आस में कि तुम
आओगी कभी तीरगी* में भोर थामकर


रहते हैं ख़ार ज्यूँ गुलाबों के हमनशीं हो कर
दिल में दर्दों को वैसे ही छुपाया करना !!

तिनके-तिनके में छुपी है मोहब्बत राही
बुलबुल के घरौंदे को मिटाया करना !!



 
  परमात्मा से प्रार्थना तो हम रोज ही करते हैं ,परन्तु उस प्रार्थना में हम ईश्वर से कुछ ना कुछ माँगते ही रहते हैं ,सुख -समृद्धि ,यश -कृति ,संतान-परिवार ,खुशियाँ-स्वस्थ और भी बहुत कुछ लेना या माँगना ही हमारी प्रवृति हैं ,कभी कुछ देने की चाह ही नहीं होती। ये सच हैं कि - माँगना ही हमारी प्रवृति हैं और ईश्वर से नहीं माँगेगें तो और किससे माँगेगेंपरन्तु माँगने के साथ साथ देने की प्रवृति भी होनी ही चाहिए   


 

" हैप्पी न्यू इयर भाई "
"अरे .. अंग्रेजी में क्यों बोल रहे हैं, अरे भाई .. हिन्दी में नव वर्ष की हार्दिक शुभकामनाएं बोलिए ना .. "
" क्यों भला !? ये तो वही बात हो गई कि .. गुड़ खाए और गुलगुल्ला से परहेज़ .. "
" वो कैसे भाई ? "
" वो ऐसे कि आप ... "



इस वर्ष का नया विषय
यहां देखिए

आज बस यहीं तक 
फिर मिलेंगे अगली प्रस्तुति में। 

रवीन्द्र सिंह यादव 

Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...