स्नेहिल नमस्कार
जलती धरती ,जलता आसमान,सूखते कंठ,पसीने से लथ-पथ आकुल तन,गर्म थपेड़ों से बेहाल जीव-जन्तु, मुट्ठीभर घने पेड़ों की सिकुड़ी छाया में सुस्ताते परिंदें, पीने की पानी के लिए लंबी कतारें,
उफ़ गर्मी,हाय गर्मी
जल संकट इन दिनों सबसे भयावह दृश्य उत्पन्न कर रहे हैंं।
देशभर से मिलने वाले समाचार और तस्वीरों की माने तो आने वाले सालों में पेयजल की समस्या का कोई हल न निकला तो बूँद-बूँद पानी के लिए हमें जूझना होगा।
जेठ के महीने में मानसून दस्तक दे जाती है।
सबकी आँखें सूखे आसमान पर लगी है।
जलती धरती ,जलता आसमान,सूखते कंठ,पसीने से लथ-पथ आकुल तन,गर्म थपेड़ों से बेहाल जीव-जन्तु, मुट्ठीभर घने पेड़ों की सिकुड़ी छाया में सुस्ताते परिंदें, पीने की पानी के लिए लंबी कतारें,
उफ़ गर्मी,हाय गर्मी
जल संकट इन दिनों सबसे भयावह दृश्य उत्पन्न कर रहे हैंं।
देशभर से मिलने वाले समाचार और तस्वीरों की माने तो आने वाले सालों में पेयजल की समस्या का कोई हल न निकला तो बूँद-बूँद पानी के लिए हमें जूझना होगा।
जेठ के महीने में मानसून दस्तक दे जाती है।
सबकी आँखें सूखे आसमान पर लगी है।
★
उसिन-उसिन कर पछिम से जब
धनक धरित्री जलती है
कनक कुरिल कंटक किरणों से
हिम की चादर गलती है
द्रूम लता झुलसाती है
तब तपिश जेठ जलाती है।
★★★★★
चलिए आज की रचनाएँ पढ़ते है -
रचनाकारों के नाम हैं क्रमशः-
आदरणीय जयकृष्ण राय तुषार जी
आदरणीय अमित निश्छल जी
आदरणीय मनीष के.सिंह जी
आदरणीय कैलाश शर्मा जी
आदरणीय राजकुमार जी
आदरणीय गगन शर्मा जी
★
खेत -वन
आँगन
हवा में भी उदासी है ,
कृष्ण का
उत्तंग -
बादल भी प्रवासी है ,
प्यास
चातक चलो
अपने होंठ को सी लें |
★★★★★
कुतरने के पड़ा सूरज,
विकल हो, आसमानों से
शिकायत क्या करे नीरज?
अगर शिकवे करे दिनभर, कुदरती माननीयों से
सुबह खिलना उसे पड़ता, बला यह जानकर देखो।।
★★★★★
★★★★★
गाँव की चौपाल
शहरों का कारोबार
आदमी की हंसी
आंखो की नमी
रिश्तों का अपनापन
प्रेम का समर्पण
शहरों का कारोबार
आदमी की हंसी
आंखो की नमी
रिश्तों का अपनापन
प्रेम का समर्पण
★★★★
इक जैसा ज़ब रहता हर दिन,
नीरस कितना सब रहता है।
मन के अंदर है जब झांका,
तेरा ही चेहरा दिखता है।
★★★★★★
प्यासे मवेशियों के पास इक बार जाइए
दिल न पसीज जाए तो फिर बताइए
अजी तालाबों थोडा तो पानी रहने दिया करिए
थोडी फिकर तो बेजुबानों की भी किया करिए
इनके पास सिर्फ दूसरों के लिए सलाहें और निर्देश होते हैं ! उनसे कोई पूछने वाला नहीं होता कि जनाब आपने इस मुसीबत से पार पाने के लिए व्यक्तिगत तौर पर क्या-क्या किया है ? जैसे अभी भयंकर गर्मी पड़ रही है, तो आपने अपने निजी तौर पर उसे काम करने में क्या सहयोग या उपाय किया है ? क्या आपने अपने लॉन-बागीचे की सिंचाई के लिए प्रयुक्त होते पानी में कुछ कटौती की है ? आप के घर से निकलने वाले कूड़े में अब तक कितनी कमी आई है ? क्या आप शॉवर से नहाते हैं या बाल्टी से ? आपके 'पेट्स' की साफ़-सफाई में कितना पानी जाया किया जाता है ? क्या आपके घर के AC या TV के चलने का समय कुछ कम हुआ है ? क्या आप यहां जब आए तो संयोजक से AC बंद कर पंखे की हवा में ही बात करने की सलाह दी ? क्या आप कभी पब्लिक वाहन का उपयोग करते हैं ? ऐसे सवाल उन महानुभावों से कोई नहीं पूछेगा ! क्योंकि वे ''कैटल क्लास'' से नहीं आते ! और यह सब करने की जिम्मेदारी तो सिर्फ मध्यम वर्ग की है !
★★★★★
आज का यह अंक आपको कैसा लगा?
कृपया अपनी बहुमूल्य प्रतिक्रिया अवश्य दें।
हमक़दम के विषय के लिए
यहाँ देखिए
कल का अंक पढ़ना न भूलेंं कल आ रहीं हैं विभा दी
अपनी विशेष प्रस्तुति के साथ।
#श्वेता सिन्हा
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#श्वेता सिन्हा





