आज के हमारे सोमवारीय विशेषांक में
आप सभी का
हार्दिक अभिनन्दन
आज हमारे मंच के चर्चाकार
आदरणीय रवींंद्र जी का
जन्मदिन है।
सरल,सौम्य,सहजव्यक्तित्व और
इनकी लेखनी की प्रतिभा ब्लॉग जगत में
किसी भी परिचय का मोहताज़ नहीं;
इनकी एक ख़ास बात जिससेशायद आप परिचित न हो
रवींद्र जी एक बहुत ही उम्दा
प्रूफ रीडर भी है।
जन्मदिन पर अशेष शुभकामनाएँ।
सदा स्वस्थ रहे,प्रसन्न रहें और
अपनी लेखनी से खूब यशस्वी हों।
पढ़िए इनकी एक रचना
अश्क का रूपहला धुआँ

बीते वक़्त की
एक मौज लौट आयी,
आपकी हथेलियों पर रची
हिना फिर खिलखिलाई।
मेरे हाथ पर
अपनी हथेली रखकर
दिखाये थे
हिना के ख़ूबसूरत रंग,
बज उठा था
ह्रदय में
अरमानों का जलतरंग।
★
चलिए अब आज के विशेषांक
की ओर बढ़ते हैं।
आज हमक़दम ने एक वर्ष पूरा कर लिया है।
आप सभी के बहुमूल्य सहयोग से
देखते-देखते यह साल कैसे
उड़ गया पता ही न चला।
तो सबसे पहले अवलोकन करते हैं-
हमक़दम के पहले अंक का
★
"सब"
शब्द का ज़िक्र होते ही
सबसे पहले
स्कूल में पढ़ी एक कविता
याद आ गयी।
मुझे लगा इस कविता के बिना यह अंक
अधूरा है।
आपने भी पढ़ा होगा शायद-
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
हम सब सुमन एक उपवन के
एक हमारी धरती सबकी
जिसकी मिट्टी में जन्मे हम
मिली एक ही धूप हमें है
सींचे गए एक जल से हम।
पले हुए हैं झूल-झूल कर
पलनों में हम एक पवन के
हम सब सुमन एक उपवन के।।
★★★
"सब" पर हमारे प्रिय रचनाकारों
की लेखनी ने खूब रंग बिखेरे है।
चलिए आप भी सरस
साहित्य सुधा का पान करिये।
★★★
सर्वप्रथम पढ़िये
सब के उदाहरणार्थ रखी रचना
आदरणीय~यशवन्त यश जी
सबके बारे में
धारणा बनाने का ......
सबको हक है
अपने हिसाब से
चलने का ........
बधाई संदेश
पहली वर्षगाँठ पर बधाई
आज सब को हो आनंद बधाई
घडी हमकदम के सालगिरह की आई
कितना सुंदर साथ हमारा
प्यारा प्यारा न्यारा न्यारा
कितने नये मित्र मिले
मिली नई धाराएं
सब मिल एक सागर में
कितने रत्न समाये
आओ मिल सब करें आचमन
भोर की लाली लाई
आदित्य आगमन की बधाई
रवि लाया एक नई किरण
संजोये जो,सपने सब हो पूरण
पा जायें सच में नवजीवन
उत्साह की सुनहरी धूप का उजास
भर दे सब के जीवन में उल्लास ।
सदा स्वस्थ रहे,प्रसन्न रहें और
अपनी लेखनी से खूब यशस्वी हों।
पढ़िए इनकी एक रचना
अश्क का रूपहला धुआँ

बीते वक़्त की
एक मौज लौट आयी,
आपकी हथेलियों पर रची
हिना फिर खिलखिलाई।
मेरे हाथ पर
अपनी हथेली रखकर
दिखाये थे
हिना के ख़ूबसूरत रंग,
बज उठा था
ह्रदय में
अरमानों का जलतरंग।
★
चलिए अब आज के विशेषांक
की ओर बढ़ते हैं।
आज हमक़दम ने एक वर्ष पूरा कर लिया है।
आप सभी के बहुमूल्य सहयोग से
देखते-देखते यह साल कैसे
उड़ गया पता ही न चला।
तो सबसे पहले अवलोकन करते हैं-
हमक़दम के पहले अंक का
★
"सब"
शब्द का ज़िक्र होते ही
सबसे पहले
स्कूल में पढ़ी एक कविता
याद आ गयी।
मुझे लगा इस कविता के बिना यह अंक
अधूरा है।
आपने भी पढ़ा होगा शायद-
द्वारिका प्रसाद माहेश्वरी
हम सब सुमन एक उपवन के
एक हमारी धरती सबकी
जिसकी मिट्टी में जन्मे हम
मिली एक ही धूप हमें है
सींचे गए एक जल से हम।
पले हुए हैं झूल-झूल कर
पलनों में हम एक पवन के
हम सब सुमन एक उपवन के।।
★★★
"सब" पर हमारे प्रिय रचनाकारों
की लेखनी ने खूब रंग बिखेरे है।
चलिए आप भी सरस
साहित्य सुधा का पान करिये।
★★★
सर्वप्रथम पढ़िये
सब के उदाहरणार्थ रखी रचना
आदरणीय~यशवन्त यश जी
......................
सबको हक हैसबके बारे में
धारणा बनाने का ......
सबको हक है
अपने हिसाब से
चलने का ........
★★★★★
आदरणीय कुसुम जी द्वारा प्रेषितबधाई संदेश
पहली वर्षगाँठ पर बधाई
आज सब को हो आनंद बधाई
घडी हमकदम के सालगिरह की आई
कितना सुंदर साथ हमारा
प्यारा प्यारा न्यारा न्यारा
कितने नये मित्र मिले
मिली नई धाराएं
सब मिल एक सागर में
कितने रत्न समाये
★
आदरणीया कुसुम जी की रचनाआओ मिल सब करें आचमन
भोर की लाली लाई
आदित्य आगमन की बधाई
रवि लाया एक नई किरण
संजोये जो,सपने सब हो पूरण
पा जायें सच में नवजीवन
उत्साह की सुनहरी धूप का उजास
भर दे सब के जीवन में उल्लास ।
★★★★★
आदरणीया मीना भारद्वाज
सब के साथ
कहाँ आने देती है ।
सर्वेसर्वा बनने की चाह
अपनों से दूर कर
सद्गुणों को ही लीलती है ।
अगर आदमी की ‘मैं’ मिट कर
‘हम सब’ बन जाए तो
संभव है कि एक दिन
धरा पर स्वर्ग उतर आए ।
★★★★★
अनिता सैनी
सब
दिशा दीप्त, किये दीप दान,
पूर्णय प्रकाश, रहा अनादि तम
सृष्टि सृजन शिशिकिरण ,सुख - इंगित
वृक्ष लता में गूँथे प्रीत दृश्य यही सब ओर.. . ...
पूर्णय प्रकाश, रहा अनादि तम
सृष्टि सृजन शिशिकिरण ,सुख - इंगित
वृक्ष लता में गूँथे प्रीत दृश्य यही सब ओर.. . ...
★★★★★★
आदरणीया आशा सक्सेना जी
अति आवश्यक हो गई
जब रहें सब
एक जुट हो कर
सब सिमट कर|
सब में है इतनी शक्ति
सभी भय खाते उससे
अकेले यदि होते
चक्रव्यूह में फँस निकल नहीं पाते
जब रहें सब
एक जुट हो कर
सब सिमट कर|
सब में है इतनी शक्ति
सभी भय खाते उससे
अकेले यदि होते
चक्रव्यूह में फँस निकल नहीं पाते
★
आदरणीया आशा सक्सेना जी
कुछ गलत नहीं करेंगे हमदुनिया से नहीं डरेंगे हम
अगर कोई व्यवधान आया
सामना डट कर करेंगे हम |
अपनी बातें सही ढंग से
सबके सामने रखेंगे हम
हमारी गलती यदि हुई
स्वीकार करेंगे हम |
सामना डट कर करेंगे हम |
अपनी बातें सही ढंग से
सबके सामने रखेंगे हम
हमारी गलती यदि हुई
स्वीकार करेंगे हम |
चुनाव प्रचार के लिये
चार पाँच शहरों का दौरा हुआ
चार पाँच शहरों के
थोड़े-थोड़े हिस्से चमक गए
समझ लीजिये कि समूचे प्रदेश के
सब हिस्से चमक गए और
स्वच्छ भारत का सपना भी
जैसे पूर्णत: साकार हो गया !
सिर्फ समझना ही तो है
समझ लीजिये ना
इसमें हर्ज़ ही क्या है
चार पाँच शहरों का दौरा हुआ
चार पाँच शहरों के
थोड़े-थोड़े हिस्से चमक गए
समझ लीजिये कि समूचे प्रदेश के
सब हिस्से चमक गए और
स्वच्छ भारत का सपना भी
जैसे पूर्णत: साकार हो गया !
सिर्फ समझना ही तो है
समझ लीजिये ना
इसमें हर्ज़ ही क्या है
★★★★★
सबका साथ ,सबका विकास,कितना दुष्कर है ये प्रयास।
कहां पूरी होती है सबकी आस,
लगाते रहते हैं बस कयास।
'सब' में निहित 'विश्वबंधुत्व' का भाव,
जिसका दिखता है सदा अभाव।
सर्वत्र व्याप्त है भेदभाव,
★
ये संगदिली बेरहमी सब मेरी मज़बूरी हैं,
आग जिन्दा रखने को चिंगारी जरुरी हैं,
एक रोज़ पत्थर पिघलेगे सितारे बरसेगे
रुखसार मेरा बेरंग सही हलक बहुत कस्तूरी हैं,
★★★★★
आदरणीय पुरुषोत्तम जी
कह दे उनसे जाकर ए मन,
उम्मीद ना जगाए इस तरह आँखों में कोई,
टूटते हैं उम्मीद जब, टूटती हैं साँसे कई,
आस टूटते हैं हृदय के, आवाज होती नहीं,
चीखते है सन्नाटे, बुझ रहे हैं अब आस के दिए,
★★★★
आदरणीया सुधा जी
तारे कहते ; गीत सुनाओ सबको मस्ती वाला।
देना सीखो ये ही तो है प्रकृति का सन्देश !
हवा महक कर बोली;"मैं तो घूमी सब देश"।।
★★★★★
आदरणीया रेणु जी
अनुराग बन्ध में सिमटी मैं
यूँ ही पल- पल जीना चाहूं ,
सपन- वपन कर डगर पे साथी -
संग तुम्हारे चलना चाहूं ;
तेरे प्यार से हुए हैं जगमग -
ये नैनों के दीप मेरे !!
नाम तुम्हारे हर शब्द मेरे
तुम्हे समर्पित सब गीत मेरे !!!!!!!!!
उलूक के पन्ने से
सब कुछ
लिख देने
की कोशिश
करने में
आपदा भी
आ सकती है
लिख देने
की कोशिश
करने में
आपदा भी
आ सकती है
★★★★★
और चलते-चलते पढ़िये
राजतंत्र को इसीलिए नष्ट होना पड़ा, क्यों कि उसमें
"सब" के स्थान "स्वयं" को प्रमुखता दिया गया। लोकतंत्र में एक नहीं
सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।अपने यहाँ तो एक राजनैतिक दल का यह जुमला भी बीते चुनाव में खूब सुर्खियों में रहा कि सबका साथ , सबका विकास। लेकिन यदि हम अपनी बातों पर खरे नहीं उतरेंगे , किन्हीं कारणों से अपने विकास को महत्व देंगे , तो सबका साथ छुटने लगता है। गत माह कुछ राज्यों में सम्पन्न विधान सभा चुनाव परिणाम
एक बार फिर से हमें यह संदेश दे गया। देश, समाज और परिवार का
जो भी मुखिया है, वह अपने पद पर तभी तक है, जब तक सबको
साथ रखता है, सबके लिये सोचता है।
"सब" के स्थान "स्वयं" को प्रमुखता दिया गया। लोकतंत्र में एक नहीं
सभी को अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता है।अपने यहाँ तो एक राजनैतिक दल का यह जुमला भी बीते चुनाव में खूब सुर्खियों में रहा कि सबका साथ , सबका विकास। लेकिन यदि हम अपनी बातों पर खरे नहीं उतरेंगे , किन्हीं कारणों से अपने विकास को महत्व देंगे , तो सबका साथ छुटने लगता है। गत माह कुछ राज्यों में सम्पन्न विधान सभा चुनाव परिणाम
एक बार फिर से हमें यह संदेश दे गया। देश, समाज और परिवार का
जो भी मुखिया है, वह अपने पद पर तभी तक है, जब तक सबको
साथ रखता है, सबके लिये सोचता है।
★★★★★
आप सभी रचनाकारों एवं
पाठकों का हार्दिक धन्यवाद।
हमक़दम के हर क़दम में
आपका साथ और सहयोग रहा।
आपके बहुमूल्य साथ आगे भी ज़ारी रहेगा
ऐसी आशा करते हैं।
★
आप सभी के द्वारा सृजित
आज यह विशेषांक कैसा लगा?
आपकी बहुमूल्य शुभकामनाएँ और सुझावों
की प्रतीक्षा रहती है।
हमक़दम के अगले अंक के विषय में
जानने के लिए
कल का अंक पढ़ना न भूलें।
-श्वेता सिन्हा
पाठकों का हार्दिक धन्यवाद।
हमक़दम के हर क़दम में
आपका साथ और सहयोग रहा।
आपके बहुमूल्य साथ आगे भी ज़ारी रहेगा
ऐसी आशा करते हैं।
★
आप सभी के द्वारा सृजित
आज यह विशेषांक कैसा लगा?
आपकी बहुमूल्य शुभकामनाएँ और सुझावों
की प्रतीक्षा रहती है।
हमक़दम के अगले अंक के विषय में
जानने के लिए
कल का अंक पढ़ना न भूलें।
-श्वेता सिन्हा















