आइए आज की रचनाएँ पढ़ते है-
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आदरणीय विश्वमोहन जी की कचरे में सपने बीनते बच्चों के लिए की गयी अद्भुत काव्यात्मक मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति
लेकर कर, कुत्तों के कौर,
दाने अन्न के बीनता है.
भाग्यहीन है, भरत वीर यह!
दांत, शेर की गिनता है
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आदरणीया कुसुम जी की लेखनी से निसृत व्यंग्यात्मक रचना
चले तो सिक्का भी चल पड़ता खोटा
नही तो रूपये का भाग भी खोटा ।
चमचागिरी से पैसा बन जाता मोटा
ईमान के घर दाल रोटी का टोटा ।
◆★◆आदरणीया मीना भारद्वाज जी की लिखी सुंदर
सेदोका
तुम्हारा मौन
आवरण की ओट
कहानी कहता है
एक लक्ष्य है
अर्जुन के तीर सा
चिड़िया के चक्षु सा
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कुछ चिट्ठियाँ भी हैं
जिनमें रिश्तों की लड़ी है
जीवन-मृत्यु की छटपटाहट है
संवेदनशीलता है
रूदन है
क्रंदन है
जीवन का बंधन है
आदरणीया पूर्णिमा जी की एक शानदार रचना

कोई अस्तित्व न हो शब्दों का, यदि हो न वहाँ मौन का लक्ष्य |कोई अर्थ न हो मौन का, यदि निश्चित न न हो वहाँ कोई ध्येय |मौन का लक्ष्य है प्रेम, मौन मौन का लक्ष्य है दयामौन का लक्ष्य है आनन्द, और मौन मौन का है
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और चलते-चलते आदरणीय शशि जी बेबाक लेखनी से
उजागर किया गया पत्रकारिता का सच
उजागर किया गया पत्रकारिता का सच
जमीं बेच देंगे, गगन बेच देंगे
कलम के सिपाही अगर सो गये तो,
वतन के मसीहा,वतन बेच देंगे"
कलम के सिपाही अगर सो गये तो,
वतन के मसीहा,वतन बेच देंगे"
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हम कल ग्यारह सौंवा मील का पत्थर छुएँगे...
इस अवसर पर आदरणीय राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर साहब
इस अवसर पर आदरणीय राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर साहब
की ग्यारहसौंवी प्रस्तुति की एक झलक....
रोज सबेरे आता सूरज - 1100वीं पोस्टरोज सबेरे आता सूरज,
हमको रोज जगाता सूरज.
पर्वत के पीछे से आकर,
अँधियारा दूर भगाता सूरज.
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सुनिये नीरज जी की आवाज़ में उनकी प्रसिद्ध कविता
आज के लिए इतना ही
हमक़दम के इस सप्ताह के विषय के लिए






