निवेदन।


फ़ॉलोअर

1099 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
1099 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

शुक्रवार, 20 जुलाई 2018

1099....सच है दुनिया वालों कि हम है अनाड़ी

सादर नमस्कार
महाकवि डॉ. गोपालदास नीरज को भावभीनी विनम्र श्रद्धांजलि।

4 जनवरी 1925 को उदित साहित्य का जाज्वल्यमान सितारा 19 जुलाई 2018 को हमेशा के लिए धरती को छोड़कर आसमान में अनोखी चमक बिखेरता हुआ स्थिर हो गया।
महाकवि गोपालदास नीरज का जन्म उत्तरप्रदेश के इटावा में हुआ था। पद्म श्री और पद्मभूषण पुरस्कार से सम्मानित बेहद प्रभावशाली कवि का सफ़र टाईपिस्ट से शुरु होकर हिंदी के प्रवक्ता और फिर  फिल्मों तक जा पहुँचा। देश विदेश में कवि-सम्मेलनों में इनकी दमदार और जीवंत उपस्थिति इनकी लोकप्रियता का प्रमाण रही।
गीत,ग़ज़ल, कविताएँ,हायकु एवं
 विधाओं में माहिर नीरज जी एक विशिष्ट शख़्सियत थे।

एक इंटरव्यू में उन्होंने कहा था-
"कवि आज हज़ारों हो गये है परंतु कविता को उन्होंने अलोकप्रिय कर दिया है।"

"हिंदुस्तान में आज जितने कवि है पहले कभी नहीं थे क्योंकि सब कविता लिखते है, लय-ताल युक्त गीत बहुत कम ही लोग लिख पाते हैं।"

"कविता तो वो है जो आपके हृदय को छुये,आपके संस्कार को छुये, सिर्फ बौद्धिक व्यायाम से कविता नहीं बनती।" 

इनका एक शेर जो मुशायरों में अक्सर सुना जाता है-

इतने बदनाम हुए हम तो इस ज़माने में,
लगेंगी आपको सदियाँ हमें भुलाने में।
न पीने का सलीका न पिलाने का शऊर,
ऐसे भी लोग चले आये हैं मयखाने में॥

उनकी लिखी एक कविता की चंद पंक्तियाँ-

आँसू जब सम्मानित होंगे, मुझको याद किया जाएगा
जहाँ प्रेम का चर्चा होगा, मेरा नाम लिया जाएगा
मान-पत्र मैं नहीं लिख सका, राजभवन के सम्मानों का
मैं तो आशिक़ रहा जन्म से, सुंदरता के दीवानों का
लेकिन था मालूम नहीं ये, केवल इस ग़लती के कारण
सारी उम्र भटकने वाला, मुझको शाप दिया जाएगा

खिलने को तैयार नहीं थी, तुलसी भी जिनके आँगन में
मैंने भर-भर दिए सितारे, उनके मटमैले दामन में
पीड़ा के संग रास रचाया, आँख भरी तो झूम के गाया
जैसे मैं जी लिया किसी से, क्या इस तरह जिया जाएगा

आइए आज की रचनाएँ  पढ़ते है-
 ★
आदरणीय विश्वमोहन जी की कचरे में सपने बीनते बच्चों के लिए की गयी अद्भुत काव्यात्मक मर्मस्पर्शी अभिव्यक्ति

लेकर कर, कुत्तों के कौर,
दाने अन्न के बीनता है.
भाग्यहीन है, भरत वीर यह!
दांत, शेर की गिनता है
◆★◆

आदरणीया कुसुम जी की लेखनी से निसृत व्यंग्यात्मक  रचना

चले तो  सिक्का भी चल पड़ता खोटा
नही तो रूपये का भाग भी खोटा ।



चमचागिरी से पैसा बन जाता मोटा

ईमान के घर दाल रोटी का टोटा ।
◆★◆

आदरणीया मीना भारद्वाज जी की लिखी सुंदर
सेदोका
तुम्हारा मौन
आवरण की ओट
कहानी कहता है
एक लक्ष्य है
अर्जुन के तीर सा
चिड़िया के चक्षु सा
◆★◆

आदरणीया जैन्नी शबनम जी की पिता के लिखी गयी
भावपूर्ण अभिव्यक्ति

कुछ चिट्ठियाँ भी हैं  

जिनमें रिश्तों की लड़ी है  

जीवन-मृत्यु की छटपटाहट है  

संवेदनशीलता है  

रूदन है  

क्रंदन है  

जीवन का बंधन है  



आदरणीया पूर्णिमा जी की एक शानदार रचना


कोई अस्तित्व न हो शब्दों का, यदि हो न वहाँ मौन का लक्ष्य |कोई अर्थ न हो मौन का, यदि निश्चित न न हो वहाँ कोई ध्येय |मौन का लक्ष्य है प्रेम, मौन मौन का लक्ष्य है दयामौन का लक्ष्य है आनन्द, और मौन मौन का है

★◆★
और चलते-चलते आदरणीय शशि जी  बेबाक लेखनी से
उजागर किया गया पत्रकारिता का सच

अमन बेच देंगे,कफ़न बेच देंगे
जमीं बेच देंगे, गगन बेच देंगे
कलम के सिपाही अगर सो गये तो,
वतन के मसीहा,वतन बेच देंगे"
◆★◆
हम कल ग्यारह सौंवा मील का पत्थर छुएँगे...
इस अवसर पर आदरणीय राजा कुमारेन्द्र सिंह सेंगर साहब 
की ग्यारहसौंवी प्रस्तुति की एक झलक....
रोज सबेरे आता सूरज - 1100वीं पोस्ट
रोज सबेरे आता सूरज, 
हमको रोज जगाता सूरज.

पर्वत के पीछे से आकर,

अँधियारा दूर भगाता सूरज.
◆★◆
सुनिये नीरज जी की आवाज़ में उनकी प्रसिद्ध कविता

आज के लिए इतना ही
हमक़दम के इस सप्ताह के विषय के लिए


Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...