।।शुभ भोर वंदन।।
आज दिनांक १८अप्रैल शुक्ल पक्ष
की तृतीया तिथि जीवन की ज्ञान, इच्छा एवम् क्रियाशक्ति का बोध कराती
अक्षय तृतीया का शुभ दिन है
तो फिर क्यूँ न हम दिन की शुरूआत भी आदरणीय भवानी प्रसाद मिस्रा जी
की युक्तियों से करें..
साधारणतया मौन अच्छा है
किन्तु मनन के लिए
जब शोर हो
चारों ओर सत्य के हनन के लिए
तब तुम्हे अपनी बात ज्वलन्त शब्दों में
कहनी चाहिए.
सिर कटाना पड़े या न पड़े
तैय्यारी तो उसकी रहनी चाहिए.
~ पण्डित भवानी प्रसाद मिश्र
आज के लिंकों में जिन रचनाकारों के नाम है
उसे क्रमानुसार पढ़ें..
आदरणीया श्वेता जी
आदरणीया अपर्णा वाजपेयी जी,
आदरणीय संजय ग्रोवर जी,
आदरणीय रवीन्द्र सिंह यादव जी
आदरणीय काजल कुमार जी और
आदरणीया शिवानी मौर्य जी..✍
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महसूस होती प्रेम की अनुभूतियों को
हृदय के गोह से निकलते
उफ़नते भावों के
मुख पर रख दो
संयम का भारी पत्थर..
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कि..... प्रेम ही बचा सकेगा
तिल-तिल मरती मानवता को,
प्रेम की अंगड़ाई जब घुट रही हो सरेआम,
मौत के घाट उतार दिए जा रहे हों प्रेमी युगल,
कल्पना करो
प्रेम के राग में सड़ांध भरती सिक्कों की खनक को
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क्या उन लोगों को भी जो कहते हैं ‘भगवान की मरज़ी के बिना पत्ता भी नहीं हिलता’! क्या उन लोगों को भी जो कहते हैं ‘बच्चे ईश्वर का रुप होते हैं’ ! लेकिन वही लोग यह भी कहते है कि ‘कण-कण में भगवान है’, ‘भगवान हर जगह मौजूद है’, ‘भगवान की लाठी में आवाज़ नहीं होती’, ‘भगवान जो चाहता है वही होता है’.....
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हवाई जहाज़ में
मच्छर ने यात्री को काटा !
सनसनी-ख़ेज़ समाचार/ ब्रेकिंग न्यूज़
तब भी बनता
जब हम पढ़ते-
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असल में तो दुखते है हकीक़त के छाले बड़े
किसे कहूँ यार अपना,नहीं कोई अब दिलदार अपना
दिल को मेरे खलते हैं अपनों के ये दिखावे बड़े
लम्हा है ख़ुशी का जी भर के मुस्कुराने दो इन्हें
इसी के साथ आज की बातें यहीं तक कल मिलते है रवीन्द्र जी की प्रस्तुति के साथ..
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह..✍




