स्नेहिल नमस्कार
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वाद-विवाद में विष घना ,बोले बहुत उपाध
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वाद-विवाद में विष घना ,बोले बहुत उपाध
मौन रहे सबकी सहे, सुमिरै नाम अगाध
कबीरदास के इस दोहे मेंं निहित सार मौन की संपूर्ण व्याख़्या है।
मौन का सरल अर्थ शांति।
वह अवस्था जहाँ भावों को वाणी से प्रकट नहीं किया जाता है।
विराट सृष्टि के कण-कण में व्याप्त शब्दहीन अनुभूति मौन को परिभाषित करती है।
मौन की असीम ऊर्जा और शक्ति अंतर्मन से
सकारात्मकता उत्सर्जित करती है।
सकारात्मकता उत्सर्जित करती है।
वैचारिक द्वंद्व,द्वेष मौन से सहजतापूर्वक शांत हो जाते हैं।
मौन से सहनशीलता और आत्ममंथन के भाव जागृत होते हैं।
मौन भाषा के सुसंकार को जन्म देता है एकाग्रता और कल्पनाशीलता की कोमलता संचित कर जीवन में अविचल शांति प्रदान करता है।
आइये सर्वप्रथम आस्वादन करते हैं
दो कालजयी रचना का-
★★★★
स्मृतिशेष हरिवंशराय बच्चन
मौन और पीड़ा
एक दिन मैंने
मौन में शब्द को धँसाया था
और एक गहरी पीड़ा,
एक गहरे आनंद में,
सन्निपात-ग्रस्त सा,
विवश कुछ बोला था;
सुना, मेरा वह बोलना
दुनिया में काव्य कहलाया था।
★★★★
स्मृतिशेष सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
मौन
मौन मधु हो जाए
भाषा मूकता की आड़ में,
मन सरलता की बाढ़ में,
जल-बिन्दु सा बह जाए।
★★★★
उदाहरण में दी गई रचना

आदरणीया साधना वैद
मौन ...

मेरे मौन को तुम मत कुरेदो !
यह मौन जिसे मैंने धारण किया है
दरअसल मेरा कम और
तुम्हारा ही रक्षा कवच अधिक है !
इसे ऐसे ही अछूता रहने दो
आदरणीय आशा सक्सेना
है मौन का अर्थ क्या ?

तुम मौन हो
निगाहें झुकी हैं
थरथराते अधर
कुछ कहना चाहते हैं |
प्रयत्न इतना किस लिए
मैं गैर तो नहीं
सुख दुःख का साथी हूँ
हम सफर हूँ |
आदरणीय अनुराधा चौहान
मौन(गीत)

मेरे इस मौन निमंत्रण को,
नहीं ठुकरा देना तुम।
कहीं लोगों की बातों में,
न मुझको भूल जाना तुम।
चले आना ना रुकना तुम,
न कहना कि बंदिशें हैं।।
आदरणीय सुजाता प्रिय
मौन भाषा....
भाषा तो
बहुत है दुनियाँ में,
मौन भाषा की महिमा ही अलग।
न अक्षर
इसके ना मात्राएँ,
फिर भी इसकी गरिमा ही अलग।
आदरणीय मीना शर्मा
लावारिस लाश ....
मौन की सड़क पर
पड़ी रही एक रिश्ते की
लावारिस लाश रात भर !!!
आँसुओं ने तहकीकात की,
राज खुला !
किसी ने जिद और अहं का
छुरा भोंककर
किया था कत्ल उस रिश्ते का !
आदरणीय अभिलाषा चौहान
मौन-मनन

मौन
श्रेयस्कर हो सदा
यह उचित कैसे भला
मौन में समाहित
अथाह वेदना
भीरूता का अंश घुला
मौन की भाषा
कौन पढ़ सकता भला
आदरणीय अनीता सैनी
मौन में फिर धँसाया था मैंने उन शब्दों को

पूनम की साँझ में
मृदुल मौन बनकर वे
पराजय का
दुखड़ा भी न रो पाये
तीक्ष्ण असह वेदना
से लबालब
अनुभूति का जीवन
जीकर
पल प्रणय में भी नहीं खो पाये
आइये सर्वप्रथम आस्वादन करते हैं
दो कालजयी रचना का-
★★★★
स्मृतिशेष हरिवंशराय बच्चन
मौन और पीड़ा
एक दिन मैंने
मौन में शब्द को धँसाया था
और एक गहरी पीड़ा,
एक गहरे आनंद में,
सन्निपात-ग्रस्त सा,
विवश कुछ बोला था;
सुना, मेरा वह बोलना
दुनिया में काव्य कहलाया था।
★★★★
स्मृतिशेष सूर्यकांत त्रिपाठी निराला
मौन
मौन मधु हो जाए
भाषा मूकता की आड़ में,
मन सरलता की बाढ़ में,
जल-बिन्दु सा बह जाए।
★★★★
उदाहरण में दी गई रचना

हिलता
रहता मौन
अंदर से
सिमटते
सिमटते
अपने
को ठोस
बना देता है
मजबूत
बना देता है
ऎसे
मौन की
आवाज
कोई
ऎसे ही
कैसे
सुन सकता है
रचनाकार आदरणीय डॉ. सुशील कुमार जोशी
......
अब आई हुई रचनाएँ..
......
अब आई हुई रचनाएँ..
मौन ...

मेरे मौन को तुम मत कुरेदो !
यह मौन जिसे मैंने धारण किया है
दरअसल मेरा कम और
तुम्हारा ही रक्षा कवच अधिक है !
इसे ऐसे ही अछूता रहने दो
आदरणीय आशा सक्सेना
है मौन का अर्थ क्या ?
तुम मौन हो
निगाहें झुकी हैं
थरथराते अधर
कुछ कहना चाहते हैं |
प्रयत्न इतना किस लिए
मैं गैर तो नहीं
सुख दुःख का साथी हूँ
हम सफर हूँ |
आदरणीय अनुराधा चौहान
मौन(गीत)

मेरे इस मौन निमंत्रण को,
नहीं ठुकरा देना तुम।
कहीं लोगों की बातों में,
न मुझको भूल जाना तुम।
चले आना ना रुकना तुम,
न कहना कि बंदिशें हैं।।
आदरणीय सुजाता प्रिय
मौन भाषा....
भाषा तो
बहुत है दुनियाँ में,
मौन भाषा की महिमा ही अलग।
न अक्षर
इसके ना मात्राएँ,
फिर भी इसकी गरिमा ही अलग।
आदरणीय मीना शर्मा
लावारिस लाश ....
मौन की सड़क पर
पड़ी रही एक रिश्ते की
लावारिस लाश रात भर !!!
आँसुओं ने तहकीकात की,
राज खुला !
किसी ने जिद और अहं का
छुरा भोंककर
किया था कत्ल उस रिश्ते का !
आदरणीय अभिलाषा चौहान
मौन-मनन

मौन
श्रेयस्कर हो सदा
यह उचित कैसे भला
मौन में समाहित
अथाह वेदना
भीरूता का अंश घुला
मौन की भाषा
कौन पढ़ सकता भला
आदरणीय अनीता सैनी
मौन में फिर धँसाया था मैंने उन शब्दों को

पूनम की साँझ में
मृदुल मौन बनकर वे
पराजय का
दुखड़ा भी न रो पाये
तीक्ष्ण असह वेदना
से लबालब
अनुभूति का जीवन
जीकर
पल प्रणय में भी नहीं खो पाये
★★★★★
आज का हमक़दम आपको कैसा लगा?
आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहती है।
हमक़दम का नया विषय जानने के लिए
कल का अंक पढ़ना न भूलें।
★★★★★
एक प्रश्न
----
बस शब्दों के मौन हो जाने से
न बोलने की कसम खाने से
भाव भी क्या मौन हो जाते है??
नहीं होते स्पंदन तारों में हिय के
एहसास भी क्या मौन हो जाते है??
एक प्रतिज्ञा भीष्म सी उठा लेने से
अपने हाथों से स्वयं को जला लेने से
बहते मन सरित की धारा मोड़ने से
उड़ते इच्छा खग के परों को तोड़ने से
नहीं महकते होगे गुलाब शाखों पर
चुभते काँटे मन के क्या मौन हो जाते है??
ख्वाबों के डर से न सोने से रात को
न कहने से अधरों पे आयी बात को
पलट देने से ज़िदगी किताब से पन्ने
न जीने से हाथ में आये थोड़े से लम्हें
वेदना पी त्याग का कवच ओढकर
अकुलाहट भी क्या मौन हो जाते है??
#श्वेता सिन्हा
आज का हमक़दम आपको कैसा लगा?
आपकी बहुमूल्य प्रतिक्रियाओं की प्रतीक्षा रहती है।
हमक़दम का नया विषय जानने के लिए
कल का अंक पढ़ना न भूलें।
★★★★★
एक प्रश्न
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बस शब्दों के मौन हो जाने से
न बोलने की कसम खाने से
भाव भी क्या मौन हो जाते है??
नहीं होते स्पंदन तारों में हिय के
एहसास भी क्या मौन हो जाते है??
एक प्रतिज्ञा भीष्म सी उठा लेने से
अपने हाथों से स्वयं को जला लेने से
बहते मन सरित की धारा मोड़ने से
उड़ते इच्छा खग के परों को तोड़ने से
नहीं महकते होगे गुलाब शाखों पर
चुभते काँटे मन के क्या मौन हो जाते है??
ख्वाबों के डर से न सोने से रात को
न कहने से अधरों पे आयी बात को
पलट देने से ज़िदगी किताब से पन्ने
न जीने से हाथ में आये थोड़े से लम्हें
वेदना पी त्याग का कवच ओढकर
अकुलाहट भी क्या मौन हो जाते है??
#श्वेता सिन्हा



