मंगलवारीय अंक
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प्रश्नों के कटघरे में है अबतक
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रचनाएँ
यदि रचना में
कोई त्रुटी हो तो
निर्भीक होकर कहो
पर नि:सृत रसधार में
रससिक्त होकर बहो
और यदि
स्वाग्रह वश
बहना नहीं चाहते
तो बस दूर रहो
मन माने तो
रचना को मानो
आज बस इतना ही
सादर
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
भारत की पहचान बनी अब,दिव्य ललाट सुशोभित हिंदी।
विस्तृत रूप लिए चलती नित, देश विदेश प्रचारित हिंदी।।
पोस रही इसको जब संस्कृत,है इतिहास प्रमाणित हिंदी।
मान बढ़ा नित उन्नत होकर,उत्तम भाष्य सुभाषित हिंदी।।
परम अनंत अपार प्रेम वह
गुरु की महिमा कही न जाए,
कब कैसे जीवन में आकर
बिछुड़े हुए सुमीत मिलाए !
सभी दिवस हिंदी रहे,भाषा की सरताज।
सारा हिन्दुस्तान ही, करता इस पर नाज।।
हिंदी मेरा मान है, हिंदी ही शृंगार ।
भाषा के तन पर सजा, सुंदर मुक्ता हार।।