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गुरुवार, 15 अक्टूबर 2015

तस्वीर से निकले एहसास ....... अंक 89

आप सभी को संजय भास्कर का नमस्कार
पांच लिंकों का आनन्द ब्लॉग पर आज मेरी पहली प्रस्तुति है इस के लिये आदरणीय यशोदा दीदी व समस्त पांच लिंकों का आनन्द परिवार का आभारी हूँ  जिन्होंने मुझे इस ब्लॉग से जुड़ने का अवसर दिया मेरा ये प्रयास रहेगा आप सभी के लिये बढ़िया प्रस्तुति करूं
आज मेरा ब्लॉग पर मेरी प्रथम प्रस्तुति है उम्मीद है सभी पसंद आये.....!!


तस्वीर से निकले एहसास :)
अपने थे
देना था  -
कुछ वक़्त, कुछ ख्याल 
लेकिन,
इस देने में मैं रह गया खाली 
हँसी भी गूँजती है खाली कमरे सी !
मैंने सबको बहुत करीब से देखा 

दाढ़ी बढ़ा लेने पर सभी साधु नहीं बन जाते हैं :)
गुलाब को कुछ भी नाम दो उससे उतनी ही सुगंध आयेगी।
शक्कर सफेद हो या भूरी उसमें उतनी ही मिठास रहेगी।।

कभी चित्रित फूलों से सुगंध नहीं आती है।
हर चमकदार वस्तु स्वर्ण नहीं होती है।।

किसी और की खुशी में :)
खुशियों को जब भी देखा मैने 
नये परिधान में 
सोचा ज़रूर ये आज 
किसी की हो जाने के लिये
 तैयार हुई हैं!

हिंदुस्तान की राजधानी :)
हुज़ूर 
कहाँ है हिन्दुस्तान की राजधानी !

क्या कहा दिल्ली !
वही दिल्ली जहाँ देश भर से बिजली काट काट कर 
पहुचाई जाती है रौशनी 

ज़िन्दगी यूँ ही बसर होती रहे :)
ज़िंदगी उनकी नजर होती रहे
खूबसूरत ये डगर होती रहे

सादगी इतनी है तेरे रूप में
बंदगी आठों पहर होती रहे !

धन्यवाद
संजय भास्कर  

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