निवेदन।


फ़ॉलोअर

बुधवार, 22 जुलाई 2026

4811..अपना ख़्याल रखा करो

 ।।भोर वंदन।।

सबसे ख़तरनाक वह दिशा होती है 

जिसमें आत्‍मा का सूरज डूब जाए 

और उसकी मुर्दा धूप का कोई टुकड़ा 

आपके जिस्‍म के पूरब में चुभ जाए 

मेहनत की लूट सबसे ख़तरनाक नहीं होती 

पुलिस की मार सबसे ख़तरनाक नहीं होती 

ग़द्दारी-लोभ की मुट्ठी सबसे ख़तरनाक नहीं होती।

अवतार सिंह संधु ‘पाश’

सारगर्भित  विचारो के साथ नजर डाले ..✍️

कम शब्दों में .. बड़ी बात कह डालने का अवसर ..

एक अलक (अति लघु कथा ) लिख डालिए झटपट-- 

शब्द विशेष है "कल्पना" 

तो आइए अपनी कल्पना को साकार कीजिए 

हमें प्रेषित करें, माध्यम है ब्लॉग संपर्क फार्म 

आपके द्वारा लिखी रचनाएं प्रकाशित की जाएगी 

साथ ही आदरणीय विभा दीदी के द्वारा प्रकाशित होने वाली
त्रैमासिक पत्रिक में स्थान पाने का भी अवसर मिलेगा


प्रीतम एंड पेद्रो

 कभी किसी से माफ़ी मांग लो,कभी किसी को माफ़ कर भी दो...


यही शायद प्रीतम एंड पेद्रो की सबसे बड़ी सीख है।

यह फिल्म सिर्फ़ एक कहानी नहीं सुनाती, बल्कि उन छोटी-छोटी चूकों का आईना दिखाती है जिन्हें हम अपने अहंकार, जल्दबाज़ी और पूर्वाग्रह से इतना बड़ा बना देते हैं कि रिश्ते दम तोड़ने लगते हैं।

जीवन में गलतियां होना अस्वाभाविक नहीं है। अस्वाभाविक तब होता है, जब हम उन गलतियों को इलास्टिक की तरह खींचते चले जाते हैं, इतना कि वे केवल भूल नहीं रहतीं, किसी के सम्मान पर चोट बन जाती हैं। क्योंकि हर गलती अपराध नहीं होती, और हर चुप्पी दोष स्वीकार..

✨️

धूप

जलते रहे



ज़िंदगी की धूप में

पाँव के छालों की

परवाह किये बगैर

बिना रुके बिना थमे

✨️

अपना ख़्याल रखा करो

मेरी ज़रूरतों पर ज़रा

नीयत-ए-हलाल रखा करो,

कि बेशकीमती हो तुम

मेरी जां, तुम अपना ख्याल रखा करो.......

✨️

चेहरे को धोना चाहिए था

 ग़ज़ल

मुझे चाँदी न सोना चाहिए था

फकत सपना सलोना चाहिए था

अगर देना था भाषण मुफ़लिसी पे

तुम्हें कंकड़ पे सोना चाहिए था..

✨️

भीतर दीपक एक जला है 

बना रहे जागरण ह्रदय में 

धरा-गगन पावन बन जाते, 

दें दृष्टि सम्मान की भीतर 

ख़ुद ही सम्मुख नव पथ आते ! 

ध्यान जहाँ भी जाकर टिकता 

ऊर्जा उधर प्रवाहित होती,

धैर्य-शांति के संग रह प्रज्ञा ..

।।इति शम।।

धन्यवाद 

पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️







1 टिप्पणी:

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...