सादर अभिवादन
पढ़े-लिखों की तरह समझो।
-ओंकार केडिया
हवाओं का अस्फुट स्वर
बूँदों का छनकना
जल का कल-कल बहना
बैलों के गले में घंटी का
रह-रह कर हिलना,
कोयल की कुहू-कुहू
चप्पू का चलना
सायरन का बजना
टाइपराइटर का टकटकाना
कीबोर्ड का सरपट दौड़ना
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
सादर अभिवादन
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आत्मीय आभार आपका
जवाब देंहटाएंबहुत सुन्दर प्रस्तुति । बेहतरीन सूत्रों के साथ मेरे सृजन को सम्मिलित करने हेतु आपका हृदयतल से हार्दिक आभार 🙏
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