निवेदन।


फ़ॉलोअर

बुधवार, 17 जून 2026

4776..भावों का दरिया..

।।भोर वंदन।।

 सूरज के उगते ही देखो

चिडिय़ा चहके गीत सुनाए
ओस की बूँदों से टकरा कर
कण-कण को रश्मि चमकाए
मदमाती जब चली पवन तो
महक उठी है क्यारी-क्यारी ।
शास्त्री नित्य गोपाल कटारे

उनींदे सूर्य से गिरती कोमल किरणे ,शीतल बयार संग बुधवारिय प्रस्तुति पर नजर डालें..✍️

दिखती बंद भले ही हों,

मन की आँखें कब बंद हुई हैं ?

भावों का दरिया, 

अंर्त में निर्बाध बहा 
✨️

         वर्तमान परिवेश में बच्चों को काउंसलिंग की जरूरत है। बचपन से स्कूल जाने तक बच्चे का स्वभाव स्पष्ट हो जाता है। वैसे तो इस स्तर पर माता-पिता ही सबसे बड़े काउंसलर हो सकते हैं और कहा गया है कि बच्चों को जो बातें सिखाई जाती हैं, वे कोरी स्लेट की तरह उनके मन-मस्तिष्क पर हमेशा के लिए अंकित हो जाती हैं। यह तो है उन बच्चों के लिए जो घर में रहते हैं और ..
✨️

भरी गगरिया पूछ रही है, क्या होगा भगवान !!
(1)

काँव काँव का शोर मचाते, दरबारों में काग।

बहरे राजा जी का उन पर, उमड़ रहा अनुराग।।

अवसर पाकर उल्लू भी अब, छेड़ रहे हैं तान..
✨️
कलम पड़ी है सुस्त मेरी
कागज हो गये हैं बेजान 
भाव न जाने हो गये लोप कहॉं 
कैसे लिखूं अन्तर्द्वन्दों का आख्यान 

उमड़ घुमड़ रहे भीतर भीतर ..
✨️
।।इति शम।।
धन्यवाद 
पम्मी सिंह ' तृप्‍ति '..✍️

3 टिप्‍पणियां:

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...