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रविवार, 14 जून 2026

4773 ..गर्मी का मंदिर के अंदर लेष मात्र भी असर नहीं पड़ता और वहां ठंडक बनी रहती है !

 सादर अभिवादन 


बनारस की एक सुबह


अगले दिन सुबह, अस्सी घाट की सीढ़ियों पर अब ग्यारह विदेशी बैठे थे। पुराने सभी वैज्ञानिकों के बीच अब स्विट्जरलैंड के डॉ. लुकास भी भगवा कुर्ता पहने, हाथ में चाय का कुल्हड़ लिए बैठे थे। लुकास साहब ज़ोर से चिल्लाए: "एलन साहब! निकोलाई साहब! अपनी साइंस और लैब को यूरोप की ट्रेनों में ही छोड़ आओ... यहाँ आओ, पहले दो पत्तल आलू टिक्की चापो...
मोक्ष यहाँ चाट की दुकान पर पत्तल बिछाए खड़ा है...
संकलित रचना कभी प्रकाशित होगी

रचनाएं...




देह एक नाव है 
मुझ नदी में तैरती हुई 
जो अनंत काल से, अनंत देश के पार बह रही है 
मैं नाव नहीं हूँ,  
नदी हूँ, पर यह भुला दिया है !




औरत ईश्वर का रचा वह अक्षय पात्र है 
जिसका अवदान कभी घटता नहीं 
प्रेम, दया, करुणा
सेवा, सहानुभूति, संवेदना 
वह जितनी बाँटती है 
प्रभु उसका अक्षय पात्र फिर से भर देता है ! 





वृद्ध हो जाता है इंसान
पर जलती रहती है 
कामना की आग 
वैराग्य नहीं सधता 
अब वृद्ध जनों को 
यात्रा जगत की चलती रहती है 
जहाँ उम्र के अनुसार ही व्यवहार होता है 
उसी परिपक्व बुद्धि में प्यार होता है !






ओडिशा ! देश के पूर्वी तट पर स्थित यह हमारा आठवां सबसे बड़ा राज्य है। यह अपनी समृद्ध संस्कृति, इतिहास और प्राकृतिक सुंदरता के लिए जाना जाता है। यहां कई प्राचीन, रहस्यमय, विश्वविख्यात मंदिर हैं।देश की इस सबसे गर्म जगह का भी सबसे गर्म इलाका है टिटलागढ़ ! जहां गर्मियों में दिन का अधिकतम तापमान 55 डिग्री तक चला जाता है ! उसी टिटलागढ़ के कुम्हडा पहाड़ी की चोटी पर भगवान भोलेनाथ और माता पार्वती का एक अद्भुत मंदिर स्थित है। गर्मियों में कुम्हरा पर्वत की चट्टानें और पत्थर इतने गर्म हो जाते हैं कि वहां किसी का भी कुछ मिनटों के लिए भी ठहरना मुहाल हो जाता है ! पर आश्चर्य की बात यह है कि इस भीषण गर्मी का मंदिर के अंदर लेष मात्र भी असर नहीं पड़ता और वहां ठंडक बनी रहती है ! 




तन के अनुबंधों में ही क्या,
प्रेम सदा परिभाषित है
पूर्ण बना कर अंतर्मन को,
परिणय शुभ परिणीत लिखा।।





"अच्छा, देखूंगी कि आप अपने वादे पर कितने खरे उतरते हैं?" सोना उसकी आँखों में झाँकते हुए कुछ तलाशने की कोशिश कर रही थी।
थोड़ी देर बाद जब दोनों काफी हाउस से बाहर निकले तो  दोनों ने एक-दूसरे के हाथों में हाथ डाल रखा था। जैसे ही सुयश ने अपनी बाइक स्टार्ट की सोना अपना हाथ उसके कंधे पर अधिकारपूर्वक रखते हुए धम्म से  बैठ गई।  सुयश की बाइक बिजली की रफ़्तार से भाग रही थी।    


सादर समर्पित
सादर वंदन

2 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात! रोचक भूमिका और पठनीय रचनाओं से सजे रविवारीय अंक में 'मन पाये विश्राम जहाँ' को स्थान देने हेतु बहुत बहुत आभार आपका !

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