।।प्रातःवंदन।।
"जीवन की सुन्दर बगिया में आशा
की कलियाँ महकाती
रैन अँधेरे भागे भागे
सोनेवाले जागे जागे
उषा आई, उषा आई "
ज़िया फतेहाबादी
बुधवारिय प्रस्तुतिकरण को आगे बढाते हुए ✍️
एक ही मौसम हरदम नहीं रहता
हमदम हमेशा हमदम नहीं रहता।
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अफ़सोस, राम लल्ला के नाम पर सबसे बुरा डर सच होता दिख रहा है
अफ़सोस, सबसे बुरा डर सच होता दिख रहा है। राम लल्ला के नाम पर एक स्कैम हो रहा है। और यहाँ बताया गया है कि यह सिर्फ़ क्रिमिनल गड़बड़ी से कहीं ज़्यादा क्यों है।
ताज़ा खबर यह है कि SIT राम मंदिर डोनेशन चोरी की जांच में चंपत राय के सा..
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आदमी
देख नहीं सकता,
यदि आँखें न हों।
सुन नहीं सकता,
यदि कान न हों।
बोल नहीं सकता,
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मैं गीता हूँ,
बाइबल हूँ,
क़ुरान हूँ। ..
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ए ज़िंदगी,
ज़रा आहिस्ता चल।
क्यों बेतहाशा भागती है,
बदहवास दौड़े जाती है।..
।।इति शम।।
धन्यवाद
पम्मी सिंह ' तृप्ति '..✍️
बेहतरीन अंक
जवाब देंहटाएंआभार
सादर वंदे
सभी लिंक्स अच्छे.
जवाब देंहटाएंबेहतरीन अंक
जवाब देंहटाएंआपकी की यह पोस्ट कई भावों को एक साथ छूती है। कहीं उम्मीद की किरण दिखती है, कहीं समय की सच्चाई सामने आती है और कहीं आत्मचिंतन का गहरा संदेश मिलता है। बहरहाल, मेरा यहाँ आने का एक कारण और भी है। हम लोग मुंशी प्रेमचंद जी की आगामी पुण्यतिथी ३१ जुलाई २०२६ के अवसर पर प्रेमचंद महोत्सव के अंतर्गत "५० दिनों में ५० कहानियाँ" बनाने, सुनाने (और जुटाने की भी!) की ओर प्रयासरत है. अगर आपकी रूचि हो तो इस अभियान में आपका सहर्ष स्वागत है.
जवाब देंहटाएंअधिक जानकारी आपको यहाँ मिल जाएगी - HindiDiscussionForum dot com
धन्यवाद!