निवेदन।


फ़ॉलोअर

गुरुवार, 18 जून 2026

4777 ..अटका पड़ा है मॉनसून कहीं.. ..नज़र ही नहीं आता

 सादर अभिवादन 




शायद बेहतर हो कि
हम एक-दूसरे से बात तो करें,
मगर अपने मन की भी सुने,
और उस शोर से दूर रहें
जो केवल भ्रम पैदा करता है ।




दो सुखों के बीच था इक दुख पिरोया 
दुख की तुम गाथा सुनाते 
सुख तुम्हारे पास था 
सुख कभी गाया नहीं !




किसी के इंतज़ार में, उमर गुज़ार देना आसान नहीं साकी,
पर खुद को भी वक़्त देना, ये कोई गुनाह नहीं साकी,
जो तुम्हारे बिना चल सके, उसे चलने दो ख़ुशी से,
तुम्हारा वजूद किसी के जाने से, कम नहीं साकी।





वो एक जोड़ी नयन
समाया जिनमें संसार
अथाह करुणा अपार ।
अश्रु जल बिंदु साकार
घुल गया मानो काजल
सुदर्शन विस्तार सजल
वो एक जोड़ी नयन ।





देखो पी-एम
गए विदेश 
लेकर के साथ मेलोडी
देखेगा कौन
पूछेगा कौन
जनता के दुख दर्द की
मरती है रोज़ थोक में 
मरती ही जा रही है

सादर समर्पित
सादर वंदन

4 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात!! मानसून बैंगलोर में तो आ गया है, आज के सुंदर अंक में 'मन पाये विश्राम जहाँ' को स्थान देने हेतु आभार आपका!

    जवाब देंहटाएं
  2. मन के उद्गार से सुसज्जित, इस अंक में स्थान देने के लिए धन्यवाद। मॉनसून की मेहरबानी का इंतज़ार है ।

    जवाब देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर सूत्रों सें सजा संकलन । सृजन को संकलन में सम्मिलित करने हेतु आपका सादर आभार ।

    जवाब देंहटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...