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गुरुवार, 18 जून 2026

4777 ..अटका पड़ा है मॉनसून कहीं.. ..नज़र ही नहीं आता

 सादर अभिवादन 




शायद बेहतर हो कि
हम एक-दूसरे से बात तो करें,
मगर अपने मन की भी सुने,
और उस शोर से दूर रहें
जो केवल भ्रम पैदा करता है ।




दो सुखों के बीच था इक दुख पिरोया 
दुख की तुम गाथा सुनाते 
सुख तुम्हारे पास था 
सुख कभी गाया नहीं !




किसी के इंतज़ार में, उमर गुज़ार देना आसान नहीं साकी,
पर खुद को भी वक़्त देना, ये कोई गुनाह नहीं साकी,
जो तुम्हारे बिना चल सके, उसे चलने दो ख़ुशी से,
तुम्हारा वजूद किसी के जाने से, कम नहीं साकी।





वो एक जोड़ी नयन
समाया जिनमें संसार
अथाह करुणा अपार ।
अश्रु जल बिंदु साकार
घुल गया मानो काजल
सुदर्शन विस्तार सजल
वो एक जोड़ी नयन ।





देखो पी-एम
गए विदेश 
लेकर के साथ मेलोडी
देखेगा कौन
पूछेगा कौन
जनता के दुख दर्द की
मरती है रोज़ थोक में 
मरती ही जा रही है

सादर समर्पित
सादर वंदन
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