मंगलवारीय अंक में
नौ महीने हो गए गर्भ में,
पर छटपटाओ मत,
हो सके, तो अंदर ही रहो,
बाहर हवा ज़हरीली है,
ड्रोन, बम और मिसाइलें
तुम्हारे इंतज़ार में हैं।
दिन भर ब्लॉगों पर लिखी पढ़ी जा रही 5 श्रेष्ठ रचनाओं का संगम[5 लिंकों का आनंद] ब्लॉग पर आप का ह्रदयतल से स्वागत एवं अभिनन्दन...
मंगलवारीय अंक में
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क्यों न कुछ दर्द
जवाब देंहटाएंउम्मीद की दरिया में
धोया जाय
बेहतरीन अंक
आभार
वंदन
जी ! .. सुप्रभातम् सह मन से नमन संग हार्दिक आभार .. हमारी बतकही को उपरोक्त तमाम बेहतरीन रचनाओं के साथ इस मंच तक ले आने के लिए ...
जवाब देंहटाएंआपकी आज की भूमिका की दो पंक्तियां पीड़ा के ओत-प्रोत हैं। उसी भाव को विस्तार देते हुए अग्रिम क्षमाप्रार्थी ...
सपने तो उग ही जाते हैं कहीं भी, यूँ आशाओं की नमी पाकर,
ये बात और है कि प्रायः अमीरों के बरगद की तरह सच होते हैं,
और गरीबों के सपने रास्ते की उगी काई की तरह रौंदे जाते हैं .. शायद ...
जी ! .. सुप्रभातम् सह मन से नमन संग हार्दिक आभार .. हमारी बतकही को उपरोक्त तमाम बेहतरीन रचनाओं के साथ इस मंच तक ले आने के लिए ...
जवाब देंहटाएंआपकी आज की भूमिका की दो पंक्तियां पीड़ा के ओत-प्रोत हैं। उसी भाव को विस्तार देते हुए अग्रिम क्षमाप्रार्थी ...
सपने तो उग ही जाते हैं कहीं भी, यूँ आशाओं की नमी पाकर,
ये बात और है कि प्रायः अमीरों के बरगद की तरह सच होते हैं,
और गरीबों के सपने रास्ते की उगी काई की तरह रौंदे जाते हैं .. शायद ...