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रविवार, 29 मार्च 2026

4696..यादों की महफ़िल में फिर कहीं सितार बजे

 सादर अभिवादन 


29th March Special Day
29 मार्च को चैत्र मास के कृष्ण की अमावस्या तिथि है और इस दिन यह
एक नहीं बल्कि 6 महाघटनाओं का साक्षी बनने जा रहा है
क्योंकि एक दिन में इतनी बड़ी घटनाएं होना बहुत दुर्लभ होता है.
इस घटनाओं का प्रभाव केवल भारतीय उपमहाद्वीप पर नहीं
बल्कि पूरे विश्व पर पड़ने वाला है. जीव-जंतु से लेकर मनुष्य तक,
हर कोई इसके प्रभाव में आने वाला है. 

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वे तो सर्वदा
तुम्हारे नियम के
प्रतिगामी रहे,
वे तो सर्वदा
ऊर्ध्वगामी रहे।

काश, तुम उस दिन
सेब की बगिया में नहीं,
प्रेम की बगिया में होते।



रामजी कहने लगे, “मुम्बई पुलिस जब काम करती है तो तेजी से करती है. फिर प्रशांत बाबू जाएँ तो पुलिस को फौरन एक्शन में आना पड़ता है. बिटिया, तुम्हें मेरे रहते मुंबई में किसी तरह की फिक्र करने की कोई जरूरत नहीं है.” रामजी का स्नेह उसे अपनी पुरानी ज़मीन से जोड़ता था.

तभी आकाश का कॉल आया. "प्रिया, मैंने साइबर विंग के उच्च अधिकारियों से बात की थी. सभी फेक आईडी ब्लॉक कर दी गई हैं. वे जल्दी ही विक्रांत का आईपी एड्रेस ट्रैक करके कोटा पुलिस को सूचित करेंगे. जिससे उसे मुंबई लाया जा सके. तुम अपने काम पर ध्यान दो."



किसी वायरस को हमारे शरीर में प्रवेश करने के लिए किसी पासपोर्ट और वीजा की तो आवश्यकता नहीं होती न! यह वैक्सीनेशन की एक प्राकृतिक प्रक्रिया है, तब इंड्यूस्ड इम्यूनाइजेशन का क्या औचित्य? प्रचार किया जाता है कि टीकों में एटेनुएटेड वायरस या एंटीजेन सीरम का प्रयोग किया जाता है।
यही प्रक्रिया तो प्रकृति की भी है, तब इंड्यूस्ड क्यों?
यह पाया जाता रहा है कि निर्धन परिवारों के मिट्टी में खेलने वाले बच्चों की रोगप्रतिकारक
क्षमता उन बच्चों से अधिक होती है जो हाइजीन का बहुत अधिक पालन करते हैं।
यह निर्धन देशों के लिए प्रकृति की निःशुल्क व्यवस्था है।

चिंता का विषय यही है कि कैंसर रोकथाम के नाम पर कहीं
यह बिल गेट्स प्रायोजित जैविक युद्ध तो नहीं?




होठों पर 
मधुर हँसी 
आँखों में स्वप्न सजे,
यादों की 
महफ़िल में 
फिर कहीं सितार बजे,
बचपन फिर 
खो जाए 
परियों की रानी में.




यमुना के इसी पाट पर
कालिन्दी के इसी घाट पर
कन्हैया ने की थी लीला,
यहीं शीश नवाते हैं हम 
लीला स्मरण कर अब तक ।
यमुना की लहरों पर लिखा
अब भी साकार लीला सार ।




सादर समर्पित
सादर वंदन

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