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शुक्रवार, 20 मार्च 2026

4687.... चुनौतियों से डिगता नहीं ध्रुव तारा

शुक्रवारीय अंक में 
आप सभी का हार्दिक अभिनंदन।
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आदमी,आदमी में फर्क होता है। 
आदमी-आदमी में तर्क होता है।
आदमी जब आदमी को समझे न
आदमी, आदमियत के लिए नर्क होता है।

आज की रचनाऍं- 
 
यदि उस शुभ्र पुष्प पर मन अटका
तो बदल जाएगी सोच की धारा
हर नाव ढूँढती है सुरक्षित किनारा
चुनौतियों से डिगता नहीं ध्रुव तारा



दूर सघन वन अरुणाचल के 
जब मेहमानों को दिखाता, 
उनकी आँखों के विस्मय में 
मेरा अंतर भी मुस्काता !

हिमशिखरों पर रवि किरणों को 
अठखेली करते जब देखा,  
जमी हुई गहरी झीलों को 
निमिष भर में पिघलते देखा !



साँसें अब गहरी हो चली हैं,
उनकी आवाज़
छाती के भीतर से गूंजती है,
मानो कोई लहर
रीढ़ की हड्डी तक उतर रही हो।
हर कंपन, हर हलचल
अब ध्यान का विषय है
अंग-अंग अपनी ही गति में बोल रहा है।


हासिल


सूरज प्रकाश के घर में आज अंधकार छाया था ! रात को चूल्हा भी न जला था ! बच्चों को मन मसोस कर सुबह के बचे खाने से कुछ निवाले खिला दिए घरवाली ने और दोनों पति पत्नी दो घूँट पानी पीकर सोने का उपक्रम करते रहे ! बड़े भाई के घर के जश्न की आवाजें मन पर घन की सी टंकार करती रहीं !


जिस तस्वीर को लेकर भारत जाते हैं वो कभी नहीं मिलती, वो पुरानी हो चुकी होती है। नई तस्वीर अक्सर बेहतर ही होती है। शहर बदल चुके होते हैं। वो गालियां वो सड़कें जो याद में थी सब बदल चुकी होती हैं। उस तस्वीर में मौजूद बहुत से दोस्त और जानने वाले या तो खुद तस्वीर हो चुकते हैं या उम्र की चाल के चलते अब पुरानी तस्वीर से अलग से दिखने लगे होते हैं। पुरानी तस्वीर नई तस्वीर से बदल जाती है जिसे लेकर अगली बार जाएंगे। वो भी बदल जाएगी -जानते हुए भी तस्वीर तो सजा ही लेते हैं। मानव स्वभाव है।


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आज के लिए इतना ही
मिलते है अगले अंक में।
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4 टिप्‍पणियां:

  1. आदमी,आदमी में फर्क होता है।
    आदमी-आदमी में तर्क होता है।
    आदमी जब आदमी को समझे न
    आदमी, आदमियत के लिए नर्क होता है।
    सुंदर अंक
    सादर वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात! आज चित्र नहीं खुल रहे हैं, वाक़ई आदमी ही आदमियत को तार-तार करता है, पठनीय रचनाओं का सुंदर संयोजन, आभार!

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. चित्र तो सारे खुल रहे हैं
      फिर से कोशिश करें
      सादर
      दिग्विजय

      हटाएं

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