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शुक्रवार, 13 मार्च 2026

4680... स्वतंत्रता का अर्थ...

शुक्रवारीय अंक में 
आप सभी का हार्दिक अभिनंदन।
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पंछी, 
तुम्हारे परों में ताक़त है, 
आसानी से जा सकते हो तुम 
हज़ारों किलोमीटर दूर,   
मगर पंख उड़ने के लिए होते हैं,
भागने के लिए नहीं। 


दबा-दबा के गए जो सारे पाँव, वह अपने ही थे।
दोष क्या तुम्हारा नहीं था, जो तुम दबते ही गए।
​हर किसी पर कर्ज उसका खुद का भी होता है।
फिर क्यों मौन का पर्दा उसको ढकता रहता है।
​फूल खिलाना है तो उठो चीत्कार करो।



जिसके हर कोना ,अलग -अलग रंगों से सजा हो 
  खुशी देते थे ये रंग ....
    रंगीन चादरें करीनें से लगी हुई 
       बडी सुकून भरी नींदें दे जाती थी ..
     अब ,ये सफेद दीवारें , अलमारी ,चादर 
       भाती नहीं मन को ..





जब सबको प्यार चाहिए तो ये नफ़रत कौन परोस रहा है। इतनी नफ़रत कि इंसान को इंसान ही न समझें। दुनिया की नफ़रत के बारे में ड्राइंगरूम या सोशल मीडिया पर मोर्चा खोलने या ज्ञान देने के बाद वक़्त मिले तो यह ज़रूर सोचना चाहिए कि एक व्यक्ति के रूप में हमारे भीतर कितनी हिंसा है। हमने कितनी बार हिंसक व्यवहार किया। किसके साथ किया। हिंसा को किस तरह समझा।



"स्वतंत्रता का अर्थ रिश्तों को तोड़ना नहींबल्कि रिश्तों में अपनी पहचान को ढूँढना है. संबल केवल सहारा नहीं, बल्कि वह विश्वास है जो आपको तब भी उड़ने की शक्ति देता है जब हवाएँ खिलाफ बह रही हों.


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आज के लिए इतना ही
मिलते है अगले अंक में।
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5 टिप्‍पणियां:

  1. मुझे नींद नही आती
    पता नही क्यूं
    वताइएगा
    वंदन

    जवाब देंहटाएं
  2. सुप्रभात! रात्रि में नींद न आने के कई कारण हो सकते हैं, सबसे बड़ा है दिन में सोना।
    अत्यंत सुंदर प्रस्तुति श्वेता जी,

    जवाब देंहटाएं
  3. अत्यंत सुंदर प्रस्तुति श्वेता जी। प्रस्तुति में रचना को स्थान देने के लिए सादर आभार।

    जवाब देंहटाएं
  4. मेरी रचना को शामिल करनें के लिए बहुत -बहुत धन्यवाद प्रिय श्वेता 🌷

    जवाब देंहटाएं

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