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शनिवार, 21 मार्च 2026

4688 इतिहास केवल मंच को नहीं देखता, वह बंकरों के अंधेरे में छिपी कायरता को भी पढ़ना जानता है

 सादर अभिवादन 


ईद उल-फ़ित्र या ईद उल-फितर 
मुस्लमान रमज़ान उल-मुबारक के 
एक महीने के बाद एक 
मज़हबी ख़ुशी का त्यौहार मनाते हैं। 
जिसे ईद उल-फ़ित्र कहा जाता है। 
ये यक्म शवाल अल-मुकर्रम्म को मनाया जाता है।

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करथे अलकरहा बात कभू
दिन ला वो कहिथे रात कभू

जिनगी के पोनी उरकत हे
तँय सूत करम के कात कभू

जिनगी मा तुम पानी राखव
बिन पानी चुरथे भात कभू



चोंच में तिनके सुतली,टहनी 
काग़ज़, पत्ते बटोर ले जाती,
घोंसला बना कर घर बसाती ।
सीधी-सादी सी मनभाती गौरैया 
मिलनसार किरायेदार बन जाती ।



"वीरता भी देखेगी जनता, पहले सुरक्षा आवश्यक है.
"महाराज एक वातानुकूलित अभेद्य बंकर की ओर भागे. जाते-जाते उन्होंने
चिल्लाकर वह अंतिम पाखंड किया, "मैं ध्यान मुद्रा में हूँ! सैनिकों की बलवृद्धि और
उनकी विजय के लिए साधना-रत हूँ."

भीड़ ने देखा कि उनका 'शेर' बंकर के लोहे के पीछे लुप्त हो गया है. सन्नाटा पसर गया. अब वहाँ केवल धूल थी, धुआँ था और था कोयलों का ढेर, जिसकी कालिख अब सबके चेहरों पर साफ दिखने लगी थी.

वृद्ध शिक्षक ने अपनी पुरानी डायरी निकाली और लिखा: "यह कोयला युग है. यहाँ नायक के वेश में सियार और लोमड़ विचर रहे हैं. पर याद रहे, इतिहास केवल मंच को नहीं देखता, वह बंकरों के अंधेरे में छिपी कायरता को भी पढ़ना जानता है."



शादी को तैयार न हों अब
बिन फेरों  के साथ रहें अब
रिश्ता चलता पर कुछ ही दिन
का सखि साजन? नहिं सखि ‘लिवइन’

*
पढ़- लिखकर बोलें  अंग्रेजी
मात- पिता पर रखते तेजी
भूल गए  सब अपनी  संस्कृति
का सखि साजन? नहिं सखि संतति




ये कैसा है मंजर 
के ग़ायब सिलेंडर 

सब कुछ है बाहर 
कुछ भी न अंदर
कब से खड़े हैं 
आया न नम्बर
*****
नम्बर वन के आतंकवादी हैे
संयुक्त राष्ट्र संघ (UNO) अब सोते से जाग जाओ और
अमेरिका-इज़राइल बनाम ईरान युद्ध को रोकने के यत्न करो.
बहुत हो चुका विनाश,तबाही! अब दुनिया को चैन की सांस लेने दो दुष्टों!
हथियार टेस्टिंग के लिये युद्ध ज़बरन थोपे जाते हैं.
युद्ध भूख के साम्राज्य का विस्तार करते हैं और गिद्धों के लिये भोजन!
अफ़सोस!

सादर समर्पित
सादर वंदन

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