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रविवार, 8 अगस्त 2021

3114 ...एक सोंधा सा एहसास बना रहता है देर तक वर्षा थम जाने के बाद

सादर अभिवादन..
यह आज की हमारी नियमित प्रस्तुति है
इसमे छेड़-छाड़ को अपराध की संज्ञा दी जाएगी
सजा के रूप में सारी प्रस्तुतियां पढ़कर सभी रचनाओं पर
चिप्पणिया आप ज़रूर चिपकाएँ..
अब पढ़िए रचनाएँ..

सावन बरसता था
जब
लगता था जैसे
मन
और
घर
मनाने को उत्सुक हैं
रक्षा का कोई पर्व।
संदेश के साथ
चिठिया में भेज दिया जाता था


धूप-छाँह
बारिश
हर मौसम में खिलते हैं ।
जंगल के
फूल कहाँ
जूड़े में मिलते हैं ।


”लाडो! मेरी ओढ़नी की बूँदी है तू
लहरिये की लहर
बिंदी की चमक
पायल की खनक है
देख!मेरे पोमचे का गोटा है तू
मान-सम्मान-स्वाभिमान है तू।”


बहुत कुछ कहने को रहता है
सब कुछ भीग जाने के बाद,
एक सोंधा सा एहसास बना रहता है
देर तक वर्षा थम जाने के बाद।


बांधे, अपनेपन के धागे,
संग, पीछे ही भागे,
वही खुश्बू, वही यादें, लिए चली आई,
भरमाए पुरवाई!



बैठक विसर्जित होने से पहले
सभी के उठ के चलते-चलते,
मन्दिरों में प्रभु के भोग-समय,
भोग-कक्ष संग कई दफ़ा,
कई जगह शयन-समय, शयन-कक्ष की
तरह ही क्यों ना भक्तों के भोगों को
जम कर जीमने वाले भगवानों के लिए भी,
स्वच्छ भारत अभियान के तहत,
मंदिरों में भी आधुनिकतम एक अदद ..
सुलभ शौचालय बनवाने का भी निर्णय लिया जाता .. बस यूँ ही ...


14 टिप्‍पणियां:

  1. जी ! अलसायी-सी रविवारीय सुबह की सुप्रभातम् वाले नमन संग आभार आपका .. मेरी बतकही को अपने साहित्यिक मंच की आज की इंद्रधनुषी प्रस्तुति में जगह देने के लिए ...
    आपकी आज की भूमिका के "अपराध की संज्ञा" के संज्ञान लेने के पहले पाठकवृंद निश्चित रूप से "छेड़-छाड़ की परिभाषा" भी आप से जानना चाहेंगे .. अगर वह भी स्पष्ट होता तो .. अपराध-बोध के साथ "चिप्पणिया" चिपकाने में कतई गुरेज़ ना होता .. बस यूँ ही ...😴😴🥱🥱

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. सर ये चिप्पणिया क्या होती है?
      मुझे तो लगता है कि गलती से टिप्पणियां के जगह चिप्पणिया लिख गया है सायद! 🤔

      हटाएं
    2. जी नहीं ! यशोदा जी ने चुहलबाजी करते हुए .. "चिपकाने" के साथ "चिप्पणियां" की तुकबन्दी की हैं .. शायद ...
      पर ये सब तो ठीक है, लेकिन तुम्हारे शहर के बाज़ार में इन दिनों "बधाई" बहुत ही मंहगी हो गई है क्या ? .. जो तुम केवल जिन लोगों की रचना दोनों मंचों (वैसे तो, मालूम नहीं, तुम "दोनों" किस-किस को कह रही हो, यह स्पष्ट नहीं है।) पर शामिल की गई है, उन्हें ही "बधाई का पात्र" बतला कर "बधाई" बाँट रही हो .. एक ही मंच पर वाले को क्यों नहीं ???😂😂😂😂😂
      तुम्हारे अनुसार दो (दूसरे का पता नही) मंचों पर चिपकना क्या बधाई की पात्रता है 🤔🤔
      अगर मंहगाई की वजह से सब को (एक मंच वाले को भी) नहीं बाँट पा रही "बधाई" तो, यशोदा जी या दिग्विजय जी से नगद या चेक या MT ले लेती "रुपइया" ...
      ( इसको seriously मत लेना, बस ठिठोली सूझी, तो कर लिए .. बस यूँ ही ...)😃😃😃

      हटाएं
  2. वर्षा ऋतु अपनी ढलान पर उतरती हुई छोड़ जाती है दुःख सुख के अगिनत पल - - ख़ूबसूरत अंक, मुझे शामिल करने हेतु असंख्य आभार - - नमन सह आदरणीया।

    जवाब देंहटाएं
  3. शुभप्रभात सभी को 🙏🙏
    बेहतरीन प्रस्तुति दोनों चर्चामंच की प्रस्तुति लगभग एक जैसी ही है आज! सभी को बहुत बहुत बधाई !जिनकी रचनाएँ दोनों जगह शामिल की गयीं हैं ! बहुत बहुत बहुत बधाई🎉💐💐🎊 वाकई ये लोग बधाई के पात्र है! 👍🤗

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. किस विश्वविद्यालय के, किस महाविद्यालय के, किस विषय के अन्तर्गत ये "बधाई के पात्रता" की परिभाषा पढ़ी हो , बतलाना, हम की भी पढ़ना है ...😅😅😅

      हटाएं
  4. बहुत बहुत आभार आपका...। मेरी रचना को शामिल करने के लिए साधुवाद

    जवाब देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर संकलन, सामयिक विषय के साथ साथ विचारणीय भी हैं,सभी रचनाओं पर गई,सभी रचनाएँ अपनी जगह मुकम्मल हैं,और संदेशपूर्ण भी । शुभकामनाओं सहित जिज्ञासा सिंह 🙏💐

    जवाब देंहटाएं
  6. हरियाली अमावस्या की शुभकामनाएं..
    धौल-मखौल यहीं संभव हैं,
    बेहतरोत्तर अंक
    सादर..

    जवाब देंहटाएं
  7. यूँ कि बाकी अनियमित प्रस्तुति होती हैं ? जिसमें छेड़ छाड़ करने की अनुमति होती है ? खैर .... हम तो बस पूछ रहे ,वैसे छेड़ छाड़ का भी अपना आनंद है ।
    आपके आदेशानुसार सब जगह चिप्पड़ियाँ बनाम टिप्पणियाँ चिपका आये हैं , एक जगह छोड़ कर । वहाँ भी जाएँगे थोड़ा वक्त तो लगता है ।
    शानदार प्रस्तुति

    जवाब देंहटाएं
    उत्तर
    1. क्षमा किजिएगा .. आपके "यूँ कि" से शुरुआत हुई आज की प्रतिक्रिया से, शोले फ़िल्म की नायिका (नाम तो पता ही होगा) के तकिया क़लाम की याद ताज़ा हो गयी .. अनायास ... ..😀😀
      अब ये जानकर रोना 😢😢 आ रहा कि आप अपने मन से ज़ालिम लोशन की शीशी पर "चिप्पणियाँ" नहीं चिपकायीं, बल्कि यशोदा जी आदेशनुसार चिपकायीं हैं .. और "एक जगह छोड़ कर" वाले भी , हम ही थे .. शायद ...😂😂😂

      हटाएं
  8. आभारी हूँ दी मंच पर स्थान देने हेतु।
    सभी रचनाएँ बेहतरीन हैं।
    सादर

    जवाब देंहटाएं

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