निवेदन।

*हम अपने पाठकों का हर्षित हृदय से सूचित कर रहे हैं कि शनिवार दिनांक 14 जुलाई, रथयात्रा के दिन हमारे ब्लॉग का तीसरा वर्ष पूर्ण हो रहा है, साथ ही यह ब्लौग अपने 11 शतक भी पूरे कर रहा है, इस अवसर पर आपसे
आपकी पसंद की एक रचना की गुज़ारिश है, रचना किसी भी विषय पर हो सकती है, जिससे हमारा तीसरी वर्ष यादगार वर्ष बन जाएगा* रचना दिनांक 13 जुलाई 2018 सुबह 10 बजे तक हमे इस ब्लौग के संपर्क प्रारूप द्वारा भेजे।
सादर


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सोमवार, 18 जुलाई 2016

367..अंत में हमारी बारी हम औरत दोयम दर्जे की हैं

आनन्द ही आनन्द
हर्षित हूँ...पुलकित भी हूँ 'पाँच लिंको का आनन्द' ने
तीन बार साल पूर्ण होने की खुशियाँ मनाई
शुभकामनाएँ बटोरी
सच तो ये है कि वर्ष पूरा हुआ रथयात्रा के दिन

प्रस्तुति के अंकों के आधार पर

कल शनिवार 362 वे दिन 365 वाँ अंक प्रकाशित हुआ
आदरणीय विभा दीदी ने भी इस ब्लॉग का
जन्म दिन मनाया...

और दिनांक के हिसाब से आज वर्ष का 364 वाँ दिन है
सो आज 'पाँच लिंकों का आनन्द' की
364 वें दिन की प्रस्तुति पर एक नज़र..

नये साल आना ही है तुझको 
मुझसे बुलाया नहीं जा रहा है..डॉ. सुशील जोशी
लिखना भी 
चाह कर 
नहीं लिखा 
जा रहा है 
नये साल में 
नया एक 
करिश्मा 
दिखे कुछ 
कहीं पर 
सोचना चाह
कर भी 
नहीं सोच 
पा रहा है 
साल के 
अंतिम दिन
'उलूक' 





इक खूबसूरत शाम...सुषमा वर्मा
इक खूबसूरत शाम...
तुम्हारे साथ इक कप कॉफ़ी, 
जगजीत जी की वही गजल..."बात निकलेगी तो दूर तलक जायेगी"...कुछ ना कह कर भी इक-दूसरे को देख कर मुस्कराती हमारी आँखे....





याद दे कर न तू गया होता....कैलाश शर्मा 
ज़िंदगी कट रही बिना तेरे,
याद दे कर न तू गया होता। 

नींद से टूटता नहीं नाता,
खाब तेरा न गर पला होता।




हाँ..हम.. काश्मीर हैं.....श्याम कोरी 'उदय'
क्यों .... क्यों करें ... हम शर्म ?
जाओ ... नहीं करना
तुम्हें ... जो सोचना है सोचो ...
जो करना है करो
जो कर सकते हो .. वो करो ..




उत्सव.. ओंकार केडिया
आज सुबह बारिश हुई -
मूसलाधार बारिश,
भर गए सब खड्डे-नाले,
घुस गया पानी घरों में,
छिप गईं सड़कें,पगडंडियाँ,
रुक गया जैसे जीवन.



हर कदम पर
ज़िन्दगी मुझसे
और मैं भी
ज़िन्दगी से
सवाल पूछ्तें हैं
इन सवालों के
जवाब तलाशती
जिन्दगी मुझे चाय सी ही लगती है
जिस रंग में हो
जिस रूप में हो मुझे बहुत भाती है


काश...मैं भी वास्कोडिगामा हो जाऊं 
एक नितांत छोटे से भूखंड का
फिर भले ही वो हो मेरी कब्र
जहां का मैं ही होऊं 'पहला' बाशिंदा
काश..

क्या तुम जानते हो ,
लिखने में
जो स्याही
लगती है,
वह कहाँ से आती है !

और अंत में हमारी बारी
हम औरत
दोयम दर्जे की हैं

बाहर कितनी भी उछल-कूद कर लें
घर के अन्दर हम अपनी
दोयम वाली खाल पहन लेती हैं
बकौल मंजू दीदी
कितना कड़ुआ सच


आज्ञा दें यशोदा को..
कल मिलेंगे भाई कुलदीप जी
नए वर्ष का पहले अंक के साथ
सादर...

8 टिप्‍पणियां:

  1. सुप्रभात दीदी
    सादर प्रणाम
    बहुत खुबसूरत हलचल की प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत सुन्दर प्रस्तुति । हलचल को उसके जन्मदिन के लिये ढेर सारी शुभकामनाएं। बिना नागा लगातार प्रस्तुति के लिये सभी चर्चाकारों की मेहनत और लगन के लिये साधुवाद और दिल से आभार 'उलूक' का उसके अखबार की एक पुरानी प्रस्तुति को सम्म्मान देने के लिये ।

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत खुबसूरत और उम्दा :)
    पाँच लिंको का आनन्द के जन्मदिन के लिये ढेर सारी शुभकामनाएं ये सभी चर्चाकारों की मेहनत का फल है तो हम इस मुकाम तक पहुंचे ।

    आभार
    संजय भास्कर

    उत्तर देंहटाएं
  4. 'पाँच लिंकों का आनन्द' की 364 वें दिन की सुन्दर प्रस्तुति पर हार्दिक बधाई!

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत उम्दा लिंक्स...हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं!

    उत्तर देंहटाएं
  6. आज काफी देर बाद...
    आया हूं... आनंद आ गया....

    उत्तर देंहटाएं

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