पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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शुक्रवार, 8 जुलाई 2016

357....चिंतन करो चिंता नहीं


जय मां हाटेशवरी....

आज की प्रस्तुति के  आरंभ में...
शिव कुमार झा 'टिल्लू' द्वारा रचित ये रचना...
बीता हुआ कल था एक सपना
दुखदायी हो या हो सुनहरा
आज की सोच! यही तो है अपना
आनेवाला कल मात्र एक कल्पना
सुनते सुनते मन ऊब गया
खोये कल में डूब गया
कैसे भूल सकता हूँ मैं?
उन अंतर -अर्बुद पीड़ा को
अर्णव तरंग की तरह आई
सुखद अनुभूतियों को भी
याद रखा है मैंने
जिसने स्नेह दिया उसे भूलकर
क्या वफ़ा का अपमान करूँ?
जिसने लिया आत्मा को खंगाल
खींचा दारुण संवदेना का खाल
क्या उन्हें भूलकर
कर दूँ घ्राणशक्ति का अपमान
श्वान का घ्राणशक्ति नहीं
यह है एक मानव द्वारा
व्यथा दिए दानव और स्नेहिल मानव
को परखने का तादात्म्य!
विश्वास में जहाँ खाया था
एक बार ठोकर
क्या उसी राह में वापस जाऊं
फिर उसी दर पर भटककर
बेदर्दी से ठोकर खाऊँ?
अरे तब भूलूँ कैसे
तब क्यों कहते हो यह
बढ़ता ही है ठोकर से ज्ञान
होती सत्यकर्म संज्ञान
भूतकाल को भूलने
अब तो नहीं कहोगे ना
क्या है ,आज वर्त्तमान कैसा?
सोचोगे जैसा पाओगे वैसा
क्षण में ही पलट जाती है दुनियाँ
सारे रंग हो जाते बेरंग
किसी को दे देती सप्तरंगी आयाम
नव जीवन का विहान
जैसे हुआ हो तत्क्षण पावस का अवसान
चहक उठी है यौवन
इंद्रधनुषी आकाश की तरह
मेघ की घनघोर छटा से उन्मुक्त
शीतल शीतल पवन विहंगम
रवि अर्चिस का मादक संगम
लिटा देती है किसी नवयौवन को
अकाल! सफ़ेद लिवाश में
ओह! उसकी नवल सहधर्मिता
पल भर पहले थी सबला
सूर्य चढ़ते ही हो गयी अवला
चूड़ी बचने वाले को कल ही तो
हँसकर कहा था उसने
आज आने के लिए
क्योंकि उसके उबडुब यौवन रथ के
सारथी जो आने वाले थे
निरीह व्यापारी चूड़ीवाला आया भी
लेकिन उस अभागिन के दर से
फूटी बिखरी चूड़ियाँ ले गया
साजन नहीं उनका आया मृत तन
अरे समय की गति का
गणन करने वाले शिल्पकारों!
यही है वर्तमान
जिसकी परिभाषा गढ़ते गढ़ते
दर्शन का हो जाएगा मर्दन
भविष्य तो भविष्य है
उसे जब नहीं परख पाया बनाने वाले ने
हम तुम ख़ाक चिंतन करोगे उसपर
ख़ाक छानते रह जाओगे
सोचते -सोचते पछताओगे
एक ही उपाय है
देखो सभ कुछ जो सकते हो देख
चिंतन करो चिंता नहीं
नहीं तो जल जाएगी चिता सोचने से पहले
अब देखिये आज की चयनित कड़ियां...


चोर
बाजार चर्चा का गर्म हुआ
था आज तक चोर गुम नाम
सब के समक्ष आ ही गया
वह सरे आम बदनाम हो गया
नजरें न मिला पाया सब से
जीना उसका हराम हो गया |
आतंक का मजहब (Religion_of_Terror)
सभी मुस्लिम भाइयों से अनुरोध है की सत्य स्वीकारिये और इनका प्रत्यक्ष या परोक्ष समर्थन बंद करें क्योंकि जब कोई "काफिर" नहीं रहेगा तो ये आग आप के घर में
भी लगेगी. आज वही देश ज्यादा सुरक्षित हैं जहाँ काफिरों की संख्या ज्यादा है.. भारत के सभी काफिरों(गैरमुश्लिम) और सूवरों(छद्मसेकुलर) को सन्देश ये है की इस
भुलावे में न रहे की आप बचे हैं अलकायदा का भारतीय चीफ संभल उत्तर प्रदेश का है और ISIS के समर्थन में मुकदमा लड़ने वाले ओवैसी बंधू भारत के ही हैं. अरीब मजीद
ISIS का लड़का महाराष्ट्र का है तो यूपी वाले सीरिया में शहादत दे आये हैं.. तो आप या तो प्रतिउत्तर के लिए तैयार रहें या मरने के लिए....
एक रास्ता और भी है "कुरान की कुछ आयते याद कर लें,शायद अगली बार आपका गला कटने से बच जाये"...
अमर शहीद कैप्टन विक्रम 'शेरशाह' बत्रा जी का १७ वें बलिदान दिवस
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16 जून को कैप्टन ने अपने जुड़वां भाई विशाल को द्रास सेक्टर से चिट्ठी में लिखा –“प्रिय कुशु, मां और पिताजी का ख्याल रखना ... यहाँ कुछ भी हो सकता है।” 
अदम्य साहस और पराक्रम के लिए कैप्टन विक्रम बत्रा को 15 अगस्त, 1999 को परमवीर चक्र के सम्मान से नवाजा गया जो उनके पिता जी.एल. बत्रा ने प्राप्त किया। विक्रम
बत्रा ने 18 वर्ष की आयु में ही अपने नेत्र दान करने का निर्णय ले लिया था। वह नेत्र बैंक के कार्ड को हमेशा अपने पास रखते थे।
 १७ वें बलिदान दिवस पर अमर शहीद कैप्टन विक्रम 'शेरशाह' बत्रा जी को शत शत नमन ! 
जलाना है अगर कुछ तो ग़मे फ़ुर्क़त जला देना
निकल आएगी ही सूरत कोई उस तक पहुँचने की
ओ मेरे दिलनशीं ख़ुद के ज़रा दिल का पता देना
किसी ग़ाफ़िल को गरचे इश्क़ फ़र्माए कोई तो क्यूँ
बहुत आसान है आसान यह जुम्ला सुना देना

तुम क्‍या हो...
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पर साथ ही मि‍ला मुझे
प्रति‍पल संदेह
अवि‍श्‍वास
और अंतस को छीलती
लपटें उठाती भाषा

चल सको तो चलो साथ मेरे उधर
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याद तेरी सताती हमें रात भर
जागते जागते हो गयी फिर सहर
दिल पे करते रहे वार पे वार तुम
और चलाते रहे अपनी तीरे नज़र
भूल सकता नहीं उनको हिमकर कभी
ज़ख्म दिल के भला कैसे जाएँगे भर

अंतर्द्वंद........संध्या शर्मा
s1600/DWAND
सच कहूं तो
अपनी हालत पर
दया से ज्यादा
गुस्सा आता है
जो आज
अपने आप से ही
मुंह छुपाता
फिर रहा हो
जो खुद को
निरन्तर छल रहा हो
जिसके पास
आज के लिए जवाब न हो





धन्यवाद।












5 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात..
    वाह..
    बेहतरीन रचनाएँ
    देखी आज का सच

    सच कहूं तो
    अपनी हालत पर
    दया से ज्यादा
    गुस्सा आता है

    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति हेतु धन्यवाद!

    उत्तर देंहटाएं
  3. अच्छे लिंक्स, सुंदर प्रस्तुति....मेरी पोस्ट को जगह देने के लिए आभार

    उत्तर देंहटाएं

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