पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

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शनिवार, 9 जुलाई 2016

358 ..... आओ हँस कर बात करें






सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष


दिनादि से अंत
हँस कर बितायें
सार्थक
जीये और जीने दें




मेरे आँगन की चहकती चिड़िया तू, तू ही रत्न कोहिनूर है
तू जब पास मेरे तो लगे हर गम मुझसे दूर है 
रोहिणी की तपिश में सानवी, तू ही ठण्डी श्रावणी बयार
देखूँ तुझे तो मन करता है यूँ ही निहारूँ तुझे बारम्बार 
मेरे जीवन संगीत का तू है इकतारा 
मेरे लिए तो तू ही है नीलगगन का ध्रुवतारा 




चुनाव के समय तो इन लोगों की चांदी ही चांदी रहती है! 
मुफ्त में साड़ी, कंबल एवं दारू भी मिल जाती है। 
कई बार तो वोट के एवज में, नोटों से इनकी जेब तक भरी जाती है। 
इतना ही नहीं, हमारी सरकार तो जीवन के अंत समय में भी इनका साथ देती है। 
केंद्र या राज्य सरकार के किसी मजदूर की मृत्यु पर उसके 
अंतिम संस्कार के लिए भी सरकार आर्थिक सहायता देती है! 





और सियासी चालों में तुम,
गलती से मत फंस जाना !
इनका मकसद हमें लड़ाना
इन बातों में मत आना !
भूल के सारे शिकवे हम सब,
अपना वतन आबाद करें !
आओ हँस कर बात करें !







एक सुबह की वाक और चार किस्से

1.
मोटरसाइकल पर सवार एक लड़का...
लड़के के हाथ में पानी की बोतल...
और झाड़ियों वाला मैदान

मेरा भारत महान






जिस  आदमी ने तारा को खरीदा था 
वह आदमी हरीशचंदृ के पुत्र को भी 
अपने साथ यह कहते हुए ले गया
 कि बछडा गाय के साथ ही जाता है ।







ईमानदारी के विरुद्ध मैं भी चिंतन करने को तैयार हूँ | 
ये जानते हुये भी कि चिन्तन का विषय मैंने नहीं निर्धारित किया है, 
मेरे अपने फायदे या नुकसान से जुड़ा मसला नहीं है |
पहली कड़ी में आदत के विरुद्ध कजरौटे से दुश्मनी कैसे संभव है भाई | 
आज तक काजल की कोठरी में बैठने की आदत थी, 
अब काजल से परहेज हजम कैसे होगा | 






सबसे काली घड़ियों में आती हैं तुमसे मिलने
वे तमाम मुहब्बतें जो खो गई थीं.
पागलखाने तक जाने वाली पगडण्डी 
बिछने लगती है जैसे बिछती थीं आँखें
एड्ना लिएबेर्मन की,
बस उसी की आँखें जो 
शहरों की छतों से ऊंची उठकर 
चमक सकती थीं. 



फिर मिलेंगे ..... तब तक  के लिए
आखरी सलाम



विभा रानी श्रीवास्तव




4 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत सुन्दर प्रस्तुति विभा जी ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. सुंदर अति सुंदर आदरणीय आंटी जी....

    उत्तर देंहटाएं
  3. शुभ प्रभात दीदी
    मेरी सुबह अभी हुई है
    ....
    पूरब में मकान
    घांस का मैदान
    जानवर हलाकान
    फिर भी
    मेरा भारत महान
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  4. सुन्दर रचनाओंं का समावेश आदरणीया. मेरी क़ृति को स्थान देने हेतु मेरी एवं नन्हीं सानवी की और से हार्दिक आभार

    उत्तर देंहटाएं

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