पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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शनिवार, 16 जुलाई 2016

365 ..“अतीत की सुखों के लिए सोच क्यों, अनागत भविष्य के लिए भय क्यों “,






सभी को यथायोग्य
प्रणाशीष

अंत हाजिर हो जाता है ज्यूँ ही कुछ शुरू होता है
रोज बातें होती है ... प्रलय होगा
खूबसूरत दुनिया का अंत होगा
 जब होगा तब होगा 
कल होने वाली बात का आज क्यूँ चिंता करें और चर्चा करें
आज चर्चा करते हैं ..... 
वर्ष के अंत का ... 
शुरू होने वाले जन्मदिन का
इस ब्लॉग पर लिंक बनते हुए एक साल पूरे हो जायेंगे 
19 जुलाई 2016 को
 मेरा बनाया अगला अंक 
हैप्पी बर्थ डे मनाने के बाद आयेगा

एक अंत की चर्चा कुछ यूँ भी
अंत करण = ज़मीर की किरणें

मन, बुद्धि, अहंकार व चित्त
वश में रहे , ना तो हम सब
चारो खाने चित


आत्मविश्वास
कालिदास ने कुमारसंभवम में कहा है,
‘प्रायः प्रत्ययमाधत्ते स्वगुणेषूमादरः’
अर्थात्‌ बड़े लोगों से प्राप्त सम्मान अपने गुणों में विश्वास उत्पन्न कर देता है।

ऐसे लोग वही कहते हैं जो जयशंकर प्रसाद जी ने चन्द्रगुप्त में कहा है,
“अतीत की सुखों के लिए सोच क्यों, अनागत भविष्य के लिए भय क्यों,
और वर्तमान को मैं अपने अनुकूल बना ही लूंगा, फिर चिंता किस बात की?”


~**समय**~
समय! कब रुका है किसी के लिए?
वो तो यूँ गुज़र जाता है...
पलक झपकते ही!-
मानो सीढ़ियाँ उतर जाता हो कोई,
तेज़-तेज़,
छलाँग लगाते हुए -
धप! धप! धप! - और बस!-
यूँ गुज़रता है समय!

प्रेम
जब तक सांस है तब तक सबका साथ है
जन्म-जन्म के साथी निस्वार्थ भाव से
करते हैं हम सबको
प्यार बिना शर्तों के

कुछ बोल दे बादल
क्षार सा खारा जल तू पीता,
जिह्वा से तेरी बहता बस मीठा सा जल,
बूंदों में तेरी रचती गंगा-जमुना जल,
तू कितना प्यारा कितना अनमोल बादल,
बोल दे, तू भी कुछ तो दे बोल बादल!

जयपुर की सैर
वाह !!! सब को जैसे पंख लग गए , हम हवा से बाते करने लगे ,
फटाफट सब कपड़े वगैरा निकालने और सजने - सवांरने लगे ,थोड़ी देर पहले फैली ख़ामोशी टूट गई ।
ठीक 6 बजे राजीव अपनी गाडी के साथ प्रकट हुए और हम सब चल दिए
खेड़ापती  बालाजी के मंदिर को देखने ...यह जयपुर शहर से 51 km दूर है
जयपुर के शानदार दरवाजो से गुजरती हुई हमारी कार जा रही थी रास्ते में बिड़ला मन्दिर ,
सिटी पैलेस ,हवामहल और जलमहल को पार् करते हुए हम पहुँच गए खड़े गणपति।।।


आज जन्मदिन
सुनो, सुनो, जो सबके जन्मदिन को याद दिलाते हैं, जो अखबारों में छपे हुए ब्लॉग की सूचना सामने लाते हैं, जो ब्लॉगिंग की छुपी हुई ट्रिक्स बताते हैं, जो आने वाले कल की तस्वीर दिखाते हैं और जो ज्ञान विज्ञान की खबरों को हमें सुनाते हैं, उन श्री श्री श्री पाबला जी का आज जन्मदिन है




फिर मिलेंगे ..... तब तक के लिए

आखरी सलाम


विभा रानी श्रीवास्तव




6 टिप्‍पणियां:

  1. शुभ प्रभात दीदी
    सादर नमन
    पहले वर्ष की अंतिम प्रस्तुति में
    आपने जन्म दिन तो मना ही लिया
    अच्छी व सटीक रचनाएँ चुनी
    आपने आज को लिए
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभप्रभात...
    आप का अंदाज सब से अलग है...
    आदरणीय आंटी जी....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति ..सफलता का एक वर्ष पूर्ण होने पर हार्दिक बधाई, शुभकामनाएं सभी सदस्यों को ..

    उत्तर देंहटाएं
  4. 365 पूरे करने के लिये बधाई । तीन दिन बाद एक वर्ष भी होने जा रहा है । हलचल टीम को बधाई और शुभकामनाएं ।

    उत्तर देंहटाएं
  5. दीदी, मेरी कविता "कुछ बोल दे बादल" को यह सम्मान प्दान करने हेतु विशेष आभार।

    purushottamjeevankalash.blogspot.com

    सभी पाठक / कविगण यहाँ भी आमंत्रित हैं। आपका आशीष वाँछित व प्रार्थनीय है।

    उत्तर देंहटाएं
  6. दीदी, मेरी कविता "कुछ बोल दे बादल" को यह सम्मान प्दान करने हेतु विशेष आभार।

    purushottamjeevankalash.blogspot.com

    सभी पाठक / कविगण यहाँ भी आमंत्रित हैं। आपका आशीष वाँछित व प्रार्थनीय है।

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