पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

समर्थक

बुधवार, 22 जून 2016

341..गुज़रते वक़्त का कोई मेरा हमदर्द होगा

सादर अभिवादन

आज की प्रस्तुति मिली जुली सरकार की ओर से
कुछ मेरी पसंद के हैं..और
कुछ मेरी सरकार की पसंद के
ये सब इन्टरनेट के चलते है...
हम दोषी नहीं है ....





......संकलन से
: एक खूबसूरत सोच :
अगर कोई पूछे जिंदगी में क्या खोया और क्या पाया,
तो बेशक कहना, जो कुछ खोया वो मेरी नादानी थी और जो भी पाया वो प्रभु की मेहरबानी थी, खूबसूरत रिश्ता है मेरा और भगवान के बीच में, ज्यादा मैं मांगता. नहीं और कम वो देता नहीं.. 


कालीपद "प्रसाद"...
सारी सारी रात-जग जिन के लिए
पूछते वे जागरण किन के लिए |1|
चाँद तारों तो झुले हैं रात में
एक सूरज को रखा दिन के लिए |२|
 




मालती मिश्रा..
'आधुनिक नारी' यह शब्द बहुत सुनने को मिलता है। कोई इस शब्द का प्रयोग अपने शक्ति प्रदर्शन के लिए करता है मसलन "मैं आधुनिक नारी हूँ गलत बात बर्दाश्त नहीं कर सकती।" 
तो दूसरी तरफ कुछ लोग इस शब्द का प्रयोग ताने देने के लिए भी करते हैं, जैसे-"अरे भई ये तो आधुनिक नारी हैं बड़ों का सम्मान क्यों करेंगी।"





राजेश त्रिपाठी..
देखो कुटिया का दम अब घुटता है।
सामने इक महल आ तना  होगा।।

उसकी आंखों में अब सिर्फ आंसू हैं।
सपना सुंदर-सा छिन गया होगा।।


आज की शीर्षक रचना... 


दिगम्बर नासवा...
किसी उजड़े हुए दिल का गुबारो-गर्द होगा
सुना है आज मौसम वादियों में सर्द होगा


मेरी आँखों में जो सपना सुनहरी दे गया है
गुज़रते वक़्त का कोई मेरा हमदर्द होगा

आज्ञा दें मिली जुली सरकार को..
फिर मिलेंगे..
दिग्विजय












7 टिप्‍पणियां:

  1. सरकार मिलजुल कर मजबूती के साथ चलती रहे । सुन्दर सूत्र प्रस्तुति ।

    उत्तर देंहटाएं
  2. शुभप्रभात...
    सुंदर संकलन....

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुन्दर हलचल प्रस्तुति ..

    उत्तर देंहटाएं
  4. बहुत सुंदर प्रस्तुति आज के लिंक की। सभी रचनाएँ बेमिसाल हैं। कृपया अन्यथा न लें मेरा नाम मालती मिश्रा है।

    उत्तर देंहटाएं
  5. बहुत सुंदर प्रस्तुति आज के लिंक की। सभी रचनाएँ बेमिसाल हैं। कृपया अन्यथा न लें मेरा नाम मालती मिश्रा है।

    उत्तर देंहटाएं
    उत्तर
    1. शुभ प्रभात
      क्षमा चाहती हूँ
      सुधार रही हूूँ
      कृपया पुनः देखें
      सादर

      हटाएं

आभार। कृपया ब्लाग को फॉलो भी करें

आपकी टिप्पणियाँ एवं प्रतिक्रियाएँ हमारा उत्साह बढाती हैं और हमें बेहतर होने में मदद करती हैं !! आप से निवेदन है आप टिप्पणियों द्वारा दैनिक प्रस्तुति पर अपने विचार अवश्य व्यक्त करें।

टिप्पणीकारों से निवेदन

1. आज के प्रस्तुत अंक में पांचों रचनाएं आप को कैसी लगी? संबंधित ब्लॉगों पर टिप्पणी देकर भी रचनाकारों का मनोबल बढ़ाएं।
2. टिप्पणियां केवल प्रस्तुति पर या लिंक की गयी रचनाओं पर ही दें। सभ्य भाषा का प्रयोग करें . किसी की भावनाओं को आहत करने वाली भाषा का प्रयोग न करें।
३. प्रस्तुति पर अपनी वास्तविक राय प्रकट करें .
4. लिंक की गयी रचनाओं के विचार, रचनाकार के व्यक्तिगत विचार है, ये आवश्यक नहीं कि चर्चाकार, प्रबंधक या संचालक भी इस से सहमत हो।
प्रस्तुति पर आपकी अनुमोल समीक्षा व अमूल्य टिप्पणियों के लिए आपका हार्दिक आभार।




Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...