पाँच लिंकों का आनन्द

पाँच लिंकों का आनन्द

आनन्द के साथ-साथ उत्साह भी है...अब आप के और हमारे सहयोग से प्रतिदिन सज रही है पांच लिंकों का आनन्द की हलचल..... पांच रचनाओं के चयन के लिये आप सब की नयी पुरानी श्रेष्ठ रचनाएं आमंत्रित हैं। आप चाहें तो आप अन्य किसी रचनाकार की श्रेष्ठ रचना की जानकारी भी हमे दे सकते हैं। अन्य रचनाकारों से भी हमारा निवेदन है कि आप भी यहां चर्चाकार बनकर सब को आनंदित करें.... इस के लिये आप केवल इस ब्लॉग पर दिये संपर्क प्रारूप का प्रयोग करें। इस आशा के साथ। हम सब संस्थापक पांच लिंकों का आनंद। धन्यवाद एक और निवेदन आप सभी से आदरपूर्वक अनुरोध है कि 'पांच लिंकों का आनंद' के अगले विशेषांक हेतु अपनी अथवा अपने पसंद के किसी भी रचनाकार की रचनाओं का लिंक हमें आगामी रविवार तक प्रेषित करें। आप हमें ई -मेल इस पते पर करें dhruvsinghvns@gmail.com तो आइये एक कारवां बनायें। एक मंच,सशक्त मंच ! सादर

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बुधवार, 26 अप्रैल 2017

649....रास्ते का खोना या खोना किसी का रास्ते में

सादर अभिवादन
आज छः सौ उनन्चासवां अंक
खुशी है, आनन्द है और हर्ष भी है
आपके इस ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द में" 
प्रारम्भ हो गई अतिथि चर्चाकार को आमंत्रित करने की परम्परा
और इस परम्परा की दूसरी कड़ी कल प्रकाशित होगी
आज की स्थिति में दो अतिथि घऱ पर हैँ
कौन आएगा कल..ये राज़ है...राज़ ही रहने देते हैं

चलिए आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर..



श्वेत श्याम मनोभाव....श्वेता सिन्हा
एक धरा से  पड़ा मिला
दूजा आसमां में उड़ा मिला,
एक काजल सा तम मन
दूजा जलता कपूर सम मन,
कभी भाव धूल में पड़े मिले
कभी राह में फूल भरे मिले,




"अमलतास के झूमर"......डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
ये मौसम की मार, हमेशा खुश हो कर सहते हैं,
दोपहरी में क्लान्त पथिक को, छाया देते रहते हैं,
सूरज की भट्टी में तपकर, कंचन से हो जाते हैं।
लू के गर्म थपेड़े खाकर भी, हँसते-मुस्काते हैं।।


उल्लास....फुरुषोत्तम सिन्हा
पलछिन नृत्य कर रहा आज जीवन,
बज उठे नव ताल बज उठा प्राणों का कंपन,
थिरक रहे कण-कण थिरक रहा धड़कन,
वो कौन बिखेर गया उल्लास इस मन के आंगन!


स्याही से लिखी तहरीरें....साधना वैद
बचपन में जब लिखना सीख रही थी
स्लेट पर बत्ती से जाने क्या-क्या
उल्टा सीधा लिखती थी  
फिर उन विचित्र अक्षरों और
टेढ़ी मेढ़ी आकृतियों को देख
खूब जी खोल कर हँसती थी !


सुख-दुःख जुटाया है...डॉ. जेन्नी शबनम
तिनका-तिनका जोड़कर  
सुख-दुःख जुटाया है  
सुख कभी-कभी झाँककर  
अपने होने का एहसास कराता है  


पता तो बता दो....डॉ. सुशील कुमार जोशी

कुछ पता ही नहीं 
क्या खोया वो 
या उसका रास्ता 
किससे पूछे 
कहाँ जा कर कोई 
भरोसा उठ गया
‘उलूक’ जमाने का 
उससे भी और 
उसके रास्तों से भी 
पहली बार 
सुना जब से 
रास्ते को ही 
साथ लेकर अपने 
कहीं खो गया कोई ।

आज्ञा दें यशोदा को

अरे हाँ .....याद आया
आपने कोकाकोला तो पिया ही होगा
ये पीने के अलावा एक और काम करता है
जंग साफ करने का...अब जंग लिकालने हेतु 

मंहगा रस्ट रिमूव्हर खरीदने की ज़रूरत नहीं

देखिए इस तरह काम करता है ये....








8 टिप्‍पणियां:

  1. बहुत-बहुत धन्यवाद, आभार ।।।।।

    उत्तर देंहटाएं
  2. पठनीय सूत्रों से सजी बहुत ही खूबसूरत हलचल आज की यशोदा जी ! मेरी रचना को सम्मिलित करने के लिए आपका हृदय से बहुत-बहुत धन्यवाद एवं आभार !

    उत्तर देंहटाएं
  3. बहुत सुंदर संकलन अंतिम टिप्स तो कमाल की है दी👌👌
    मेरी रचना को म न देने के लिए हृदय से आभार यशोदा दी।

    उत्तर देंहटाएं
  4. बढ़िया प्रस्तुति। आभार यशोदा जी 'उलूक' के सूत्र को जगह देने के लिये।

    उत्तर देंहटाएं
  5. शुभप्रभात....
    सुंदर प्रस्तुति...
    अब कल की प्रतीक्षा है....

    उत्तर देंहटाएं
  6. आदरणीय पाठकगण
    आपने आज का वीडियो तो देखा ही होगा
    नहीं देखा है तो ज़रूर देखिए
    एक छिपा संदेश है...
    कोका कोला जब जंग से जंग जीत जाता है
    तो आपके पेट पर रहम करे
    ये कतई सम्भव नहीं है
    सादर

    उत्तर देंहटाएं
  7. बहुत अच्छी हलचल प्रस्तुति

    उत्तर देंहटाएं

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