सादर अभिवादन
आज छः सौ उनन्चासवां अंक
खुशी है, आनन्द है और हर्ष भी है
आपके इस ब्लॉग "पांच लिंकों का आनन्द में"
प्रारम्भ हो गई अतिथि चर्चाकार को आमंत्रित करने की परम्परा
और इस परम्परा की दूसरी कड़ी कल प्रकाशित होगी
आज की स्थिति में दो अतिथि घऱ पर हैँ
कौन आएगा कल..ये राज़ है...राज़ ही रहने देते हैं
चलिए आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर..

श्वेत श्याम मनोभाव....श्वेता सिन्हा
एक धरा से पड़ा मिला
दूजा आसमां में उड़ा मिला,
एक काजल सा तम मन
दूजा जलता कपूर सम मन,
कभी भाव धूल में पड़े मिले
कभी राह में फूल भरे मिले,

"अमलतास के झूमर"......डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
ये मौसम की मार, हमेशा खुश हो कर सहते हैं,
दोपहरी में क्लान्त पथिक को, छाया देते रहते हैं,
सूरज की भट्टी में तपकर, कंचन से हो जाते हैं।
लू के गर्म थपेड़े खाकर भी, हँसते-मुस्काते हैं।।

उल्लास....फुरुषोत्तम सिन्हा
पलछिन नृत्य कर रहा आज जीवन,
बज उठे नव ताल बज उठा प्राणों का कंपन,
थिरक रहे कण-कण थिरक रहा धड़कन,
वो कौन बिखेर गया उल्लास इस मन के आंगन!
स्याही से लिखी तहरीरें....साधना वैद
बचपन में जब लिखना सीख रही थी
स्लेट पर बत्ती से जाने क्या-क्या
उल्टा सीधा लिखती थी
फिर उन विचित्र अक्षरों और
टेढ़ी मेढ़ी आकृतियों को देख
खूब जी खोल कर हँसती थी !
सुख-दुःख जुटाया है...डॉ. जेन्नी शबनम
तिनका-तिनका जोड़कर
सुख-दुःख जुटाया है
सुख कभी-कभी झाँककर
अपने होने का एहसास कराता है
पता तो बता दो....डॉ. सुशील कुमार जोशी

कुछ पता ही नहीं
क्या खोया वो
या उसका रास्ता
किससे पूछे
कहाँ जा कर कोई
भरोसा उठ गया
‘उलूक’ जमाने का
उससे भी और
उसके रास्तों से भी
पहली बार
सुना जब से
रास्ते को ही
साथ लेकर अपने
कहीं खो गया कोई ।
आज्ञा दें यशोदा को
अरे हाँ .....याद आया
आपने कोकाकोला तो पिया ही होगा
ये पीने के अलावा एक और काम करता है
जंग साफ करने का...अब जंग लिकालने हेतु
मंहगा रस्ट रिमूव्हर खरीदने की ज़रूरत नहीं
देखिए इस तरह काम करता है ये....
कौन आएगा कल..ये राज़ है...राज़ ही रहने देते हैं
चलिए आज की पसंदीदा रचनाओं की ओर..
श्वेत श्याम मनोभाव....श्वेता सिन्हा
एक धरा से पड़ा मिला
दूजा आसमां में उड़ा मिला,
एक काजल सा तम मन
दूजा जलता कपूर सम मन,
कभी भाव धूल में पड़े मिले
कभी राह में फूल भरे मिले,

"अमलतास के झूमर"......डॉ. रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
ये मौसम की मार, हमेशा खुश हो कर सहते हैं,
दोपहरी में क्लान्त पथिक को, छाया देते रहते हैं,
सूरज की भट्टी में तपकर, कंचन से हो जाते हैं।
लू के गर्म थपेड़े खाकर भी, हँसते-मुस्काते हैं।।

उल्लास....फुरुषोत्तम सिन्हा
पलछिन नृत्य कर रहा आज जीवन,
बज उठे नव ताल बज उठा प्राणों का कंपन,
थिरक रहे कण-कण थिरक रहा धड़कन,
वो कौन बिखेर गया उल्लास इस मन के आंगन!
स्याही से लिखी तहरीरें....साधना वैद
बचपन में जब लिखना सीख रही थी
स्लेट पर बत्ती से जाने क्या-क्या
उल्टा सीधा लिखती थी
फिर उन विचित्र अक्षरों और
टेढ़ी मेढ़ी आकृतियों को देख
खूब जी खोल कर हँसती थी !
सुख-दुःख जुटाया है...डॉ. जेन्नी शबनम
तिनका-तिनका जोड़कर
सुख-दुःख जुटाया है
सुख कभी-कभी झाँककर
अपने होने का एहसास कराता है
पता तो बता दो....डॉ. सुशील कुमार जोशी

कुछ पता ही नहीं
क्या खोया वो
या उसका रास्ता
किससे पूछे
कहाँ जा कर कोई
भरोसा उठ गया
‘उलूक’ जमाने का
उससे भी और
उसके रास्तों से भी
पहली बार
सुना जब से
रास्ते को ही
साथ लेकर अपने
कहीं खो गया कोई ।
आज्ञा दें यशोदा को
अरे हाँ .....याद आया
आपने कोकाकोला तो पिया ही होगा
ये पीने के अलावा एक और काम करता है
जंग साफ करने का...अब जंग लिकालने हेतु
मंहगा रस्ट रिमूव्हर खरीदने की ज़रूरत नहीं
देखिए इस तरह काम करता है ये....


