निवेदन।


फ़ॉलोअर

989 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं
989 लेबलों वाले संदेश दिखाए जा रहे हैं. सभी संदेश दिखाएं

रविवार, 1 अप्रैल 2018

989....आओ मूर्खो, मूर्ख दिवस मनायें

नाईन एट नाईन
मतलब
एक अप्रैल दो हज़्ज़ार अट्ठारह

अप्रैल फूल का नाम जुबान पर आते ही सभी के दिमाग पर एक अप्रैल की तारीख छा जाती है। भले ही आप सभी अपने दोस्तों या करीबियों के साथ कोई मजाक कर उन्हें मूर्ख बनाने की कोशिश हर रोज करते होंगे, लेकिन एक अप्रैल को यह कुछ खास होता है। यूं समझिए कि यह दिन खास इसलिए ही रखा कि आप अपनों के साथ कुछ मजाक कर उन्हें मूर्ख बना सकें और उनके चेहरे पर कुछ समय के लिए हंसी ला सके। लेकिन ध्यान यह भी रखना चाहिए कि आपका मजाक किसी के लिए नुकसानदायक साबित न हो जाए।

इस दिन को लेकर कई और कहानियां भी प्रचलित हैं, लेकिन हर कथा का मूल उद्देश्य है 
पूरे दिन को मनोरंजन के साथ व्यतीत करना है।

सभी कहानियाँ विदेशों की है...भारत में ऐसा कोई पर्व नहीं...फिर भी पढ़िए...
...............
बहुत पहले यूनान में मोक्सर नामक एक मजाकिया राजा था। एक दिन उसने स्वप्न में देखा कि किसी चींटी ने उसे जिंदा निगल लिया है। सुबह उसकी नींद टूटी तो स्वप्न की बात पर वह जोर-जोर से हंसने लगा। रानी ने हंसने का कारण पूछा तो उसने बताया कि रात मैंने सपने में देखा कि एक चींटी ने मुझे जिंदा निगल लिया है। सुन कर रानी भी हंसने लगी। तभी एक ज्योतिष ने आकर कहा, महाराज इस स्वप्न का अर्थ है, आज का दिन आप हंसी-मजाक व ठिठोली के साथ व्यतीत करें। उस दिन अप्रैल महीने की पहली तारीख थी। बस तब से लगातार एक हंसी-मजाक भरा दिन हर वर्ष मनाया जाने लगा।
....................

एक अन्य लोक कथा के अनुसार एक अप्सरा ने किसान से दोस्ती की और कहा- यदि तुम एक मटकी भर 
पानी एक ही सांस में पी जाओगे तो मैं तुम्हें वरदान दूंगी। मेहनतकश किसान ने तुरंत पानी से भरा 
मटका उठाया और पी गया। जब उसने वरदान वाली बात दोहराई तो अप्सरा बोली- तुम बहुत 
भोले-भाले हो, आज से तुम्हें मैं यह वरदान देती हूं कि तुम अपनी चुटीली बातों द्वारा लोगों के बीच 
खूब हंसी-मजाक करोगे। अप्सरा का वरदान पाकर किसान ने लोगों को बहुत हंसाया। इसी कारण ही 
एक हंसी का पर्व जन्मा, जिसे हम अप्रैल फूल के नाम से पुकारते हैं।
......................

बहुत पहले चीन में सनन्ती नामक एक संत थे, जिनकी दाढ़ी जमीन तक लम्बी थी। एक दिन उनकी 
दाढ़ी में अचानक आग लग गई तो वे बचाओ-बचाओ कह कर उछलने लगे। उन्हें इस तरह उछलते 
देख कर बच्चे जोर-जोर से हंसने लगे। तभी संत ने कहा, मैं तो मर रहा हूं, लेकिन तुम आज के ही 
दिन खूब हंसोगे, इतना कह कर उन्होंने प्राण त्याग दिए।

अब चलिए आज की संक्षिप्त प्रस्तुति की ओर....

1अप्रैल को "अप्रैल फूल " बनाने के बजाय 
एक पेड़ लगाकर "अप्रैल कूल" बनाए।

साहित्यकार श्री देव किशन सिंह को पौधा देते नरपत सिंह राजपुरोहित
सभी सम्मानित सदस्यो से निवेदन है कि 1 अप्रैल को "अप्रैल फूल " बनाने के बजाय एक पेड़ लगाकर "अप्रैल कूल" बनाए । आप की एक 
छोटी सी मुहिम धरती को "कूल " बनाने मे मदद कर सकती है ।


"थीम चुराई मेरी"...... डॉ.रूपचन्द्र शास्त्री 'मयंक'
कुछ ने पूरी पंक्ति उड़ाई,
कुछ ने थीम चुराई मेरी।
मैं तो रोज नया लिखता हूँ
रोज बजाता हूँ रणभेरी।

मूरखता का वरदान...श्वेता सिन्हा

समझदारी का पाठ पढ़
हम अघा गये भगवान
थोड़ी सी मूरखता का
अब तुमसे माँगे वरदान

अदब,कायदे,ढ़ंग,तरतीब
सब झगड़े बुद्धिमानों के
प्रेम,परोपकार,भाईचारा
श्रृंगार कहाये मतिमारों के

बेस्वाद ज़िंदगी...साधना वैद

कैसी विचित्र सी मनोदशा है यह ! 
भूलती जा रही हूँ सब कुछ इन दिनों ! 
इतने वर्षों का सतत अभ्यास 
अनगिनत सुबहों शामों का 
अनवरत श्रम 
सब जैसे निष्फल हुआ जाता है 



इस अवसर पर आदरणीय डॉ. सुशील भाई जोशी 
अपने खास दिन 
‘मूर्ख दिवस’ पर 
क्षमा करेंगे आप 
के लिये नहीं 
केवल अपने जैसों 
के लिये ढेर सारी 
शुभकामनाऐं.....

पाखँडी कहलाने 
से अच्छा 
महामूर्ख कहलायें
झूठे सपनों की झूठी 
बातों के झूठों की 
बीमारी ना फैलायें
सच को देख सामने 
अपने आँख कान बंद 
रखने से बाज आयें
...............
आज अब बस...
पीछे पलटकर देखती हूँ
989 नम्बर का मील का
पत्थर दिखाई पड़ा

खुश हुई मैं
हजारवाँ पत्थर भी अब
ग्यारह मील के बाद
दिखाई दे जाएगा
सादर
यशोदा





Related Posts Plugin for WordPress, Blogger...