
सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
बिहार से कर्नाटक
कर्नाटक से तमिलनाडू
चेन्नई में ढूँढ़ रही हूँ
वागर्थ
फिलहाल हम रुकेंगे केवल वाक् एवं उसके अर्थ तक।
इसके लिए भारतीय चिंतन-ज्ञान परंपरा में एक यायावरी करते हैं
और देखते हैं कि कहां क्या मिल जाता है और किसके काम का,
उसमें से क्या निकलता है? आप साथ देंगे तो मेरी यात्रा का एकांत
मुझे कम सतायेगा। वैसे मैं यह तो कह नहीं सकता कि
यह पूर्णतः स्वांतः सुखाय है लेकिन उसके मूल में वह जरूर है
क्योंकि इस यात्रा का निपर्णय तो मैं ने स्वयं लिया है।
वागर्थ
यह सही है कि एकांत जी के प्रति मेरे मन में अपने
व्यक्तिगत अनुभवों के कारण सम्मान है । एक स्थापित लेखक/संपादक का
मुझ बिल्कुल अपरिचित, बिल्कुल नये और एक कम उम्र रचनाकार को
गंभीरतापूर्वक फ़ोन पर सुनने, विनम्रता से जवाब देने और प्रोत्साहित करने के
सहज तरीके की छाप मेरे मन पर है । लेकिन उनके योगदान के
मूल्यांकन का आधार मात्र मेरा अनुभव नहीं है । मैं निजी बातचीत से
जानता हूँ कि मेरे कई अन्य लेखक मित्रों का भी मुझसे मिलता-जुलता अनुभव रहा है ।
वागर्थ के लिए अनुवाद
और ख़्वाब खो गए हैं
ओ क़िस्मत की रेखा
या तो थाम लो मुझे
या जाने दो
कर लेने दो मुझे दोस्ती इस तूफान से
मेरे अपने खयालात का तूफ़ान
आदी अपने फटते हुए किनारों का
वागर्थ में प्रकाशित

‘वागर्थ’(अक्टूबर, २०१७) में प्रकाशित

शब्द-सत्ता का अध्ययन
वार्गर्थाविव संपृक्तौ वागर्थप्रतिपत्तये।
जगत: पितरौ वंदे पार्वतीपरमेश्वरौ।''
जगत: पितरौ वंदे
''मैं वागर्थ के सम्यक् ज्ञान के लिए जगत् के
माता-पिता उन पार्वती और परमेश्वर की वंदना करता हूँ,
जो स्वयं वागर्थ की तरह ही संयुक्त है।''
फिर मिलेंगे