सादर अभिवादन....
माह दिसम्बर का पहला दिन
भारी छुट्टियों का महीना
बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे लोग...
आपको तआज़्ज़ुब हो रहा होगा
आज हम क्यों...
आज हमारी सखी श्वेता
अपरिहार्य कारणों से नहीं आ सकी
चलिए चलते हैं पसंदीदा रचनाओं की ओर...
नव प्रवेश...
बेटियों का क्या है कसूर....पूनम मोहन
लड़की कमाने वाली चाहिए,
खुद का खर्च उठाने वाली चाहिए
शादी का खर्च तो आप उठाओगे ही
दरवाजे की शोभा तो बढ़ाओगे ही,
लड़की कमाऊं चाहिए,
और हमें कुछ नहीं चाहिए।
कल तीस नवम्बर को बाईसवीं सालगिरह थी कविता दीदी की
.........शुभकामनाएँ.........
हुए हम घायल प्यार में तेरे..... कविता रावत
कल तक बेखबर दिल प्यार से
उसे अब प्यार निभाना सीखना है
रहना है जिस दिल में उसे
गहराई उसकी भी नापना है
पहली प्यार की ये दीवानगी

मैं .......रश्मि प्रभा
मैं एक माँ हूँ
जिसके भीतर सुबह का सूरज
सारे सिद्ध मंत्र पढता है
मैं प्रत्यक्ष
अति साधारण
परोक्ष में सुनती हूँ वे सारे मंत्र ...
ॐ मेरी नसों में
रक्त बन प्रवाहित होता है

परिणीता........ डॉ .इंदिरा गुप्ता
एक युग्म
हम दोनो होंगे
सुख सौभाग्य
रचेंगे
सुन अर्धांगिनी
अपने जीवन को
शुचि, यश
गौरव से
भर देगे !

जो झूठा होता है,....दिलबाग ‘विर्क’
लाठी वाले जीतते रहे हैं यहाँ पर हर युग में
इतिहास का हर पन्ना यही क़िस्सा सुनाता है अक्सर।
भले ही दामन भरा हो ख़ुशियों से, मगर ये सच है
दर्द का लम्हा सबको अपने पास बुलाता है अक्सर।

सर्द सुबह.......फुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
फिर लौटकर न आएगी कोहरे में डूबी ये सुबह,
शीत में भींग-भींगकर फिर न थप-थपाएगी ये सुबह,
सर्दियों की आड़ में फिर न बुलाएगी ये सुबह,
फिर क्युँ न मैं भी हो लूँ, इन सर्द सुबहो संग?
बाँट लूँ गर्म साँसें, देख लूँ कुछ जागे सपने!

हर दीपक दम तोड़ रहा है...कुसुम कोठारी
स्वार्थ का खेल हर कोई खेल रहा है
मासूमियत लाचार दम तोड रही है
शांति के दूत कहीं दिखते नही है
हर और शिकारी बाज उड रहे है
दो दिन पहले का अखबार

उलूक का पन्ना
हर जुबाँ से
एक पूरी गीता
लिखी हुई
हर दीवार
सड़क पेड़ पर
चिपकी हुई
बहुत दूर से
अंधों को तक
नजर आती है
.......
आज्ञा दें यशोदा को..
भारी छुट्टियों का महीना
बेसब्री से प्रतीक्षा कर रहे थे लोग...
आपको तआज़्ज़ुब हो रहा होगा
आज हम क्यों...
आज हमारी सखी श्वेता
अपरिहार्य कारणों से नहीं आ सकी
चलिए चलते हैं पसंदीदा रचनाओं की ओर...
नव प्रवेश...
बेटियों का क्या है कसूर....पूनम मोहन
लड़की कमाने वाली चाहिए,
खुद का खर्च उठाने वाली चाहिए
शादी का खर्च तो आप उठाओगे ही
दरवाजे की शोभा तो बढ़ाओगे ही,
लड़की कमाऊं चाहिए,
और हमें कुछ नहीं चाहिए।
कल तीस नवम्बर को बाईसवीं सालगिरह थी कविता दीदी की
.........शुभकामनाएँ.........
हुए हम घायल प्यार में तेरे..... कविता रावत
कल तक बेखबर दिल प्यार से
उसे अब प्यार निभाना सीखना है
रहना है जिस दिल में उसे
गहराई उसकी भी नापना है
पहली प्यार की ये दीवानगी

मैं .......रश्मि प्रभा
मैं एक माँ हूँ
जिसके भीतर सुबह का सूरज
सारे सिद्ध मंत्र पढता है
मैं प्रत्यक्ष
अति साधारण
परोक्ष में सुनती हूँ वे सारे मंत्र ...
ॐ मेरी नसों में
रक्त बन प्रवाहित होता है

परिणीता........ डॉ .इंदिरा गुप्ता
एक युग्म
हम दोनो होंगे
सुख सौभाग्य
रचेंगे
सुन अर्धांगिनी
अपने जीवन को
शुचि, यश
गौरव से
भर देगे !

जो झूठा होता है,....दिलबाग ‘विर्क’
लाठी वाले जीतते रहे हैं यहाँ पर हर युग में
इतिहास का हर पन्ना यही क़िस्सा सुनाता है अक्सर।
भले ही दामन भरा हो ख़ुशियों से, मगर ये सच है
दर्द का लम्हा सबको अपने पास बुलाता है अक्सर।

सर्द सुबह.......फुरुषोत्तम कुमार सिन्हा
फिर लौटकर न आएगी कोहरे में डूबी ये सुबह,
शीत में भींग-भींगकर फिर न थप-थपाएगी ये सुबह,
सर्दियों की आड़ में फिर न बुलाएगी ये सुबह,
फिर क्युँ न मैं भी हो लूँ, इन सर्द सुबहो संग?
बाँट लूँ गर्म साँसें, देख लूँ कुछ जागे सपने!

हर दीपक दम तोड़ रहा है...कुसुम कोठारी
स्वार्थ का खेल हर कोई खेल रहा है
मासूमियत लाचार दम तोड रही है
शांति के दूत कहीं दिखते नही है
हर और शिकारी बाज उड रहे है
दो दिन पहले का अखबार

उलूक का पन्ना
हर जुबाँ से
एक पूरी गीता
लिखी हुई
हर दीवार
सड़क पेड़ पर
चिपकी हुई
बहुत दूर से
अंधों को तक
नजर आती है
.......
आज्ञा दें यशोदा को..

