सत श्री अकाल :: ਸਤਿ ਸ੍ਰੀ ਅਕਾਲ
मेरो मेरो सभी कहत हैं, हित सों बाध्यौ चीत।
अंतकाल संगी नहिं कोऊ, यह अचरज की रीत॥
मन मूरख अजहूं नहिं समुझत, सिख दै हारयो नीत।
नानक भव-जल-पार परै जो गावै प्रभु के गीत॥
गुरुनानक
गुरु देह बानी सब अमृत , सुने सो अमृत पावे,
कहे 'गुरने' मूरत का पुजारी, देह के पार न जावे।
देह देहलीज़ ही ना लांघे, वो कैसे अमृत पावे ,
अमृत घाट पे रहता 'गुरने', ओय प्यासा मर जावे।
गुरुनानक
ओमकार रूपी परमेश्वर का एक ही नाम है और यही सत्य है।
वह सम्पूर्ण सृष्टि का करता पुरुष है। यह ब्रह्मांड उसी परमेश्वर के इशारे पर चल रहा है।
वह निर्भय है, उसका किसी से वैर नहीं है। उसकी कोई मूर्ति नहीं है,
उसका कोई रूप या आकार नहीं है। वह अजन्मा है, यानी
परमात्मा योनि और जन्म-मरण से रहित है। उस परमात्मा को
पाना गुरु की कृपा पर ही निर्भर करता है।
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आप सभी को यथायोग्य
प्रणामाशीष
मझली देवरानी का फोन आया ,
-"दीदी! छोटी देवरानी को बिटिया हुई है, शाम का दीया जलना बंद होगा क्या ?"
-"हाँ! सुनी देखी तो हूँ ,जबतक छठी ना हो जाए ,पूजा बंद रहता है..."
-"तब... ?"
-"तब क्या... जितने दिन नहीं जलेगा...
-"तब क्या... जितने दिन नहीं जलेगा...
उतने दीये ज्यादा पूर्णिमा के दिन जल जाएगा...
पहले भी ऐसा होता रहा है न... ह न त..."
@विकल्प सब चीज का मौजूद है
दीपों धप्पे से
लुका-छिपी चाँद की-
"त्रिपुर" नामक दैत्य पर विजय के पश्चात देवताओं ने
कार्तिक पूर्णिमा के दिन अपने सेनापति कार्तिकेय के साथ शंकर की
महाआरती और नगर को दीपमालाओं से सुसज्जित कर
विजय दिवस मनाया था। आज भी कार्तिक पूर्णिमा को सुबह पवित्र स्नान
और सांझ ढलते ही दीपदान की धार्मिंक मान्याता निभायी जाती है।
दीपावली
घर-घर सजे , सजे हैं आँगन।
जलते पटाखे, फ़ुलझड़ियाँ बम।।
लक्ष्मी गणेश का पूजन करें लोग।
लड्डुओं का लगता है भोग॥
‘गुरू पर्व’ है, ‘देव दीवाली भी’, दूरदर्शन पर वाराणसी से सीधा प्रसारण किया जायेगा,
प्रधानमन्त्री भी जायेंगे. परसों वह दो अन्य महिलाओं के साथ
दिगबोई व तिनसुकिया के स्कूलों में जायेगी. विकलांग दिवस के अवसर पर
मृणाल ज्योति में एक चित्रकला व निबन्ध प्रतियोगिता के लिए निमन्त्रण देना है
><><
गंगातट पर उतरे देवलोक की छवि
जैसी है काशी की देव दीपावली।

आज से अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच का
दो दिवसीय 29 वां लघुकथा सम्मेलन होने जा रहा है
किस्सा सुनायेंगे वहाँ से आकर
मिलते हैं फिर
प्रधानमन्त्री भी जायेंगे. परसों वह दो अन्य महिलाओं के साथ
दिगबोई व तिनसुकिया के स्कूलों में जायेगी. विकलांग दिवस के अवसर पर
मृणाल ज्योति में एक चित्रकला व निबन्ध प्रतियोगिता के लिए निमन्त्रण देना है
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गंगातट पर उतरे देवलोक की छवि
जैसी है काशी की देव दीपावली।

आज से अखिल भारतीय प्रगतिशील लघुकथा मंच का
दो दिवसीय 29 वां लघुकथा सम्मेलन होने जा रहा है
किस्सा सुनायेंगे वहाँ से आकर
मिलते हैं फिर