शीर्षक पंक्ति: आदरणीय नूपुरं जी की रचना से।
सादर अभिवादन।
भारतीय फ़िल्म संगीत का चमकदार सितारा रहीं आशा भोंसले जी अब दूसरी दुनिया के सफ़र पर चली गयी हैं. संगीत जगत में एक युग जैसे समाप्त हो गया!
विनम्र श्रद्धांजलि!
अपने स्वर से दुनिया को विविधतापूर्ण मनोरंजन देनेवाली आशा जी अपने पीछे संगीत का समृद्ध ख़ज़ाना छोड़ गयीं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.
उनके कुछ नग़्मे जो मेरे दिल को छू गये-
विनम्र श्रद्धांजलि!
अपने स्वर से दुनिया को विविधतापूर्ण मनोरंजन देनेवाली आशा जी अपने पीछे संगीत का समृद्ध ख़ज़ाना छोड़ गयीं. ईश्वर उनकी आत्मा को शांति प्रदान करे.
उनके कुछ नग़्मे जो मेरे दिल को छू गये-
1.नन्हे-मुन्ने बच्चे तेरी मुट्ठी में क्या है.
2.उड़ें जब-जब ज़ुल्फ़ें तेरीं
3.ओ मेरे सोना रे
4.जहाँ तक महक है मेरे गेसुओं की, चले आइए
5.कोई आया, धड़कन कहती है
6.मेरे भैया, मेरे अनमोल रतन, तेरे बदले में ज़माने की कोई चीज़ न लूँ
7.यार बादशाह, यार दिलरुबा
8. इक परदेसी मेरा दिल ले गया
9. झुमका गिरा रे बरेली के बाज़ार में
10. अभी न जाओ छोड़कर
आदि -आदि...।
सोमवारीय अंक में पढ़िए पाँच पसंदीदा रचनाएँ-
झूमर से झूमते अमलतास फूले
रास्तों के किनारे सोनमोहर बिछे
छज्जे-छज्जे पर बोगनवेलिया लगे
मजाल है कि कोई भी रंग छूट जाए
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धीरे-धीरे कुछ आँखों को इसमें भी कला नज़र आई,बेतरतीब सी ये आदत, एक अजीब सी पहचान बन पाई।जो था कभी आलस का खेल, अब बन गया एक तमाशा,
लोग यहाँ तस्वीरें खींचें, जैसे कोई अनोखा नज़ारा।
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कितनी चट्टानें थीं भारी
रस्तों में पावन सलिला के,
राह बनाती उन्हें तोड़ती
ठुक-ठुक चलती थी अंतर में!
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यूनियन अध्यक्ष ने माइक संभाला, सभा शुरू हुई. आज उनका लहजा बदला हुआ था, आवाज में गुस्सा था और ऊँची थी, "साथियों, प्रबंधन कहता है कि कारखाना घाटे में है! जिसके कारण वे इसे चलाने में असमर्थ हैं, वे सरकार से इसे बंद करने की परमिशन मांग रहे हैं. लेकिन आज हमारे पास वो सच है जो इनके मुहँ बन्द कर देगा."
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आज पढ़िए...'पंचवटी की छाया में है, सुन्दर पर्ण-कुटीर बना'
किस व्रत में है व्रती वीर यह, निद्रा का यों त्याग किये,
राजभोग्य के योग्य विपिन में, बैठा आज विराग लिये।
बना हुआ है प्रहरी जिसका, उस कुटीर में क्या धन है,
जिसकी रक्षा में रत इसका, तन है, मन है, जीवन है!
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फिर मिलेंगे।
रवीन्द्र सिंह यादव
